
दमोह जिला अस्पताल Damoh District Hospital (Source: Patrika)
Damoh District Hospital: दमोह जिला अस्पताल के अति-संवेदनशील आईसीयू वार्ड की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। गंभीर मरीजों को इलाज की सुविधा न मिलने के कारण डॉक्टर उन्हें सीधे जबलपुर रेफर कर रहे हैं। हाल ही में सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुई एक शिकायत ने आईसीयू की अव्यवस्थाओं और स्टाफ की कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है।
अपनी सास का इलाज कराने आईसीयू पहुंचीं कविता रयकवार ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता का आरोप है कि रात के समय आईसीयू में मच्छरों का प्रकोप है। जब उन्होंने इसकी शिकायत ड्यूटी पर तैनात वार्ड बॉय से की, तो उन्हें संवेदनहीन जवाब मिला कि कोतवाली में शिकायत कर दो, पुलिस आकर मच्छरों को पकड़ लेगी।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि रात के वक्त वार्ड बॉय और अटेंडर आपस में अनावश्यक मजाक करते हैं, जबकि डॉक्टर राउंड पर नहीं आते। मूलभूत सुविधाओं और उचित व्यवहार के अभाव में परिजनों को अपनी मरीज को रात में ही निजी अस्पताल ले जाना पड़ा।
अस्पताल में गंभीर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन 14 बेड वाली इस आईसीयू यूनिट का क्षमता के अनुसार उपयोग नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि औसतन केवल 5 बेड पर ही मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, बाकी बेड खाली पड़े रहते हैं। जब आईसीयू जैसी संवेदनशील जगह पर परिजनों को मच्छरों, गंदगी और स्टाफ के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है, तो सामान्य वार्डों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, मेडिसिन विशेषज्ञ होने के बावजूद आईसीयू के लिए किसी डॉक्टर की स्थायी जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आईसीयू में 24 घंटे प्रशिक्षित चिकित्सक की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन यहां दिन में डॉक्टर राउंड लेकर चले जाते हैं और रात में आपात स्थिति में कोई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होता। पूरा वार्ड महज नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा है।
मेडिसिन विभाग में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों को ओपीडी, आईपीडी और वार्ड राउंड तीनों संभालने पड़ते हैं। फिर भी आईसीयू को बेहतर ढंग से चलाने के प्रयास जारी हैं। जहां तक इस शिकायत का सवाल है, तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है।-डॉ. प्रहलाद पटेल, सिविल सर्जन, दमोह
Updated on:
28 Jul 2026 11:41 am
Published on:
28 Jul 2026 11:41 am
