दमोह. वृद्धों की पीड़ा सुनकर आंखें भरना लाजमी हैं। काश, इसे शासन के नमुाइंदे भी समझ पाते। बात इंदिरा गांधी पेंशन योजना के पात्र वृद्धों से जुड़ी हैं, जिन्हें तीन महीने से पेंशन नहीं मिली हैं, अब चौथा भी शुरू हो गया हैं।
कुछ वृद्ध ऐसे भी हैं, जिनकी पीड़ा सुनकर आप अपने जेब से उनकी मदद करने आगे आ जाएंगे, क्योंकि, उनका पूरा माह का खर्च उन्हीं ६०० से जो चलता हैं। दवा से लेकर अन्य कार्य इन्हीं पैसों से होते हैं और जब तीन-चार महीने यही राशि उनके पास नहीं आती है, तो हर बार की तरह वह आधार, समग्र, फोटो लेकर नगरपालिका और बैंकों के चक्कर काटते नजर आते हैं और कहते हैं साहब मैं जिंदा हूं, पेंशन दिला दीजिए। हालांकि, इस बार उनकी ई-केवायसी नहीं होना वजह नहीं है, वजह शासन स्तर से वृद्धों, विधवाओं की पेंशन रुकना हैं, जिसका जवाब पेंशन अधिकारियों के पास भी नहीं हैं।