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MP-UP को जोड़ने वाले 125 करोड़ के अटेर पुल पर आई दरार, 9 साल से चल रहा निर्माण

Ater-Jaitpur Bridge- अटेर पुल पर ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही प्लेटफार्म की डेक उखड़ने लगी है। सरिया उभरा, जर्जर दीवार और टूटी रेलिंग ने निर्माण की क्वालिटी पर सवाल खड़े कर दिए है।

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भिंड

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Akash Dewani

Jun 13, 2026

bhind ater-jaitpur bridge deck damaged before traffic start

Ater-Jaitpur Bridge: MP-UP को जोड़ने वाला अटेर पुल शुरू होने से पहले ही जर्जर (फोटो सोर्स- Patrika)

Ater-Jaitpur Bridge deck damage: मध्य प्रदेश के भिंड जिले में 125 करोड़ की ज्यादा की लागत में बन रहा अटेर पुल शुरू होने से जर्जर हो गया है। अटेर-जैतपुर घाट पर निर्माणाधीन पुल (Ater-Jaitpur Bridge) की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। पुल पर ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही प्लेटफार्म की डेक उखड़ने लगी है। सरिया उभरा, जर्जर दीवार और टूटी रेलिंग ने निर्माण की क्वालिटी पर सवाल खड़े कर दिए है। पुल पर कई जगह कंक्रीट उखड़ गई है, जिसे लेकर सेतु निगम के अधिकारी भी चिंतित है और डेक के क्षतिग्रस्त हिस्से को तीन दिन में सही कराने की बात कही जा रही है।

बता दें पुल पर फिलहाल आवागमन भी शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में बिना ट्रैफिक दबाव के प्लेटफार्म पर सरिया उभर जाना पुल के लिए चिंताजनक है। बारिश का पानी क्षतिग्रस्त दारों से होकर पुल के अंदर जा रहा है। इसे लेकर सेतु निगम और एजेंसी के इंजीनियर बेपरवाह नजर आए है। जबकि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने हाल ही में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से शिकायत कर स्थिति से रूबरू किया है।

9 साल से बन रहा है पुल

अटेर पुल का निर्माण पिछले नौ साल से किया जा रहा है। पुल 2025 में बनकर तैयार हो गया था, लेकिन अतरिक्त हिस्से (350 मीटर) का निर्माण किए जाने के चलते इस पुल से आवागमन बंद कर दिया गया है। जनता का कहना है कि करोड़ों रुपए करदाताओं के धन से खर्च किए गए हैं। ऐसे में जनता को यह जानने का अधिकार है कि निर्माण में किस स्तर की सामग्री का उपयोग हुआ, गुणवत्ता परीक्षण कब और कैसे किया गया, तथा किन अधिकारियों ने इसे संतोषजनक मानकर स्वीकृति प्रदान की। पुल का रास्ता लंबे समय से बंद क्यों रखा गया है; क्या केवल तकनीकी कारण हैं या निर्माण संबंधी कमियां आम लोगों की नजरों से छिपी रहें। पुल की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग उठ रही है। गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई को लेकर भी ग्रामीण शिकायत कर रहे हैं।

फैक्ट फाइल

  • 350 मीटर अतिरिक्त पुल का निर्माण।
  • 125 करोड़ की लागत से बन रहा पुल।
  • 2017 से चल रहा है पुल का निर्माण।
  • 2025 में बनकर तैयार हुआ था पुल।
  • 2021 में आई बाढ़ के बाद बढ़ाई ऊंचाई।

पुल निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण का महत्व

यह पुल एमपी और यूपी को जोड़ने के साथ ही क्षेत्रवासियों के लिए विकास की मुख्य सीढ़ी है। इसकी मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। गुणवत्ता नियंत्रण में सामग्री की जांच, निर्माण प्रक्रियाओ का पालन और नियमित निरीक्षण शामिल हैं। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी करती है, बल्कि लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल सकती है। निर्माण के हर चरण में तीसरे पक्ष द्वारा जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करना पारदर्शिता बढ़ाता है, जिससे जनता का विश्वास बना रहता है।

कमजोर संरचना का संकेत

जानकारों की मानें तो पुल के डेक में दरारें उसकी संरचनात्मक कमजोरी या अत्यधिक भार का स्पष्ट संकेत होती है। ऐसे मामलों में सुरक्षा के लिए तुरंत यातायात को नियंत्रित करना पड़ सकता है। पुल के डेक पर दरारों के सामान्य कारणों में अत्यधिक भार शामिल है, जब क्षमता से अधिक भारी वाहन लगातार गुजरते हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव भी एक प्रमुख कारण है, जिसमें कंक्रीट या डामर का अत्यधिक गर्मी या ठंड में फैलना और सिकुड़ना शामिल है। निर्माण में त्रुटि, जैसे घटिया सामग्री का उपयोग या कंक्रीट की सही तरीके से देखभाल न होना भी दरारों को जन्म देता है। इसके अतिरिक्त, जल निकासी की समस्या से पानी का जमाव डामर और कंक्रीट को कमजोर कर देता है, जिससे दरारें पड़ सकती है।

दीवार भी हो गई खोखली- ग्रामीण

पुल के प्लेटफार्म की छत जर्जर हो गई है। रेलिंग टूट गई हैं। दीवार भी खोखली हो गई है। पुल को लेकर वरिष्ठ अधिकारी ध्यान दें और लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की जाए।- गौरव ओझा, ग्रामीण अटेर

जिम्मेदारों ने शरारती तत्वों पर मढ़ी जिम्मेदारी

यूपी के शरारती तत्वों द्वारा रेलिंग को नुकसान पहुंचाया गया है। डेक का जो हिस्सा क्षतिग्रस्त है, उसकी तीन दिन में मरम्मत करवाएंगे। क्षतिग्रस्त क्यों हुआ, इसकी जांच की जाएगी।- सौरभ गौड़, एसडीओ, सेतु निगम, भिण्ड