बुरी खबर: करेंसी व्यवस्था की स्थाई समिति का निर्णय, सतना सहित प्रदेश के नौ जिलों के स्टेट बैंक करेंसी चेस्ट होंगे बंद
रमाशंकर शर्मा@सतना। जिले के लिए बुरी खबर है। यहां का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एक करेंसी चेस्ट बंद होगा। नागौद स्थित एसबीआइ के इस करेंसी चेस्ट सहित प्रदेश के 9 जिलों के चेस्ट बंद करने का निर्णय लिया है। ये चेस्ट क्यों बंद किए जा रहे हैं? इस संबंध में कुछ स्पष्ट खुलासा तो नहीं किया है पर बताया गया कि निर्णय करेंसी व्यवस्था की स्थाई समिति ने लिया।
25 अक्टूबर को करेंसी व्यवस्था की स्थाई समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें चेस्ट संबंधी लेनदेन को लेकर चर्चा की गई। इसमें अपेक्षित परिणाम नहीं देने वाले करेंसी चेस्ट को बंद करने का निर्णय समिति में लिया गया है। समिति ने यह निर्णय लिया कि प्रदेश के 9 जिलों के भारतीय स्टेट बैंक के करेंसी चेस्ट को बंद कर दिया जाए।
मांगी गई सलाह
समिति ने निर्णय के क्रियान्वयन के पहले प्रत्येक संबंधित जिलों के जिलास्तरीय परामर्शदात्री समिति से इस निर्णय के परिप्रेक्ष्य सलाह मांगी है। कहा एक बार जिला स्तर पर इसका परीक्षण कराकर करेंसी चेस्ट की उपलब्धता व आवश्यकता के आधार पर जिला स्तरीय परामर्श दात्री समिति में विचार किया जाए। समिति के निर्णय को संचालनालय संस्थागत वित्त को बताया जाए।
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क्या है करेंसी चेस्ट
करेंसी चेस्ट (मुद्रा तिजोरी) की स्थापना बैंक नोट के वितरण को सुचारू रूप से चलाने के लिए आरबीआइ ने की है। आरबीआइ इसे खोलने के लिए बैंकों की चयनित ब्रांच को अनुमति देती है। इन करेंसी चेस्ट में आरबीआइ बैंक नोटों का भंडारण करता है। करेंसी चेस्ट अपने कार्य क्षेत्र में आने वाले अन्य बैंक शाखाओं को भी नोट सप्लाई करता है।
इन्हें बंद करने का निर्णय
भारतीय स्टेट बैंक का सतना जिले का नागौद चेस्ट सहित देवास का बागली चेस्ट, इंदौर का सांवेर, खरगोन का महेश्वर, सागर का खुरई, नीमच का जावद, भिंड का मेहगांव, बालाघाट का लांजी, रतलाम का सैलाना चेस्ट शामिल है।
तो यह है वजह
जानकारों का कहना है कि इन दिनों बैंकों की हालत काफी खराब है और चेस्ट में काफी खर्च आता है। चेस्ट के लिए बैंक को न केवल सुरक्षा के लिए पुलिस बल को उसका भुगतान करना पड़ता है बल्कि कर्मचारी रखे जाते हैं। औसतन 1 से 2 लाख रुपए चेस्ट का खर्च आ जाता है। दूसरा स्टेट बैंक का प्रदेश में एनपीए बहुत बढ़ गया है। इससे उसकी इंटरेस्ट इंकम काफी घट गई है। इसलिए स्टेट बैंक प्रदेश में एक्सपेंडीचर खर्च करने की नीयत से इस तरह के सख्त फैसले ले रहा है।