
सतना. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किये जाने वाले यूनीक आधार कार्ड की सतना जिले में डुप्लीकेट कॉपी तैयार कर उसका दुरुपयोग किया जा रहा है। लेकिन जिला प्रशासन इस मामले की जांच में लीपापोती में जुट गया है। नागौद स्थित मध्यांचल बैंक में आधार कार्ड लिंक कराने पहुंची महिला के पास मौजूद कार्ड किसी और का पाया जाने के बाद भी इस मामले की गहन जांच किये बिना जिला प्रशासन ने अपनी आधिकारिक सफाई देते हुए यह बताया है कि आधार कार्ड यूनीक ही है और महिला का आधार कार्ड दूसरा है। लेकिन इस मामले में चुप्पी साध ली गई है कि जो फर्जी आधार कार्ड लेकर महिला बैंक पहुंची थी वह कैसे बना और कहां से बनाया गया? इस मामले में बैंक मैनेजर से भी आधिकारिक बयान नहीं लिये गये। सिर्फ संबंधित महिला से दूरभाष पर बात कर अपर कलेक्टर ने सफाई जारी कर दी ।
यह है मामला
विगत दिवस महिला कुसुम कली कुशवाहा ने नागौद के मध्यांचल बैंक में जाकर अपने आधार नंबर 690583728452 को अपने बैंक खाते में लिंक करने का आवेदन दिया। इसके साथ ही उसने अपना आधार कार्ड भी दिखाया। जिसमें यही नंबर लिखा हुआ था। लेकिन बैंक मैनेजर ने पाया कि यह आधार नंबर पहले से ही किसी खाते से लिंक है और यह नंबर किसी अन्य का है। पड़ताल में पाया गया कि यही आधार नंबर पतवारा निवासी अंकुश बागरी का है। इस मामले को पत्रिका ने प्रकाशित करते हुए फर्जीवाड़े की आशंका जाहिर की।
यह आई जिला प्रशासन की सफाई
इस मामले में कलेक्टर के निर्देश पर की गई जांच के बाद अपर कलेक्टर ने आधिकारिक तौर पर बताया कि संबंधित मामले की जांच के लिये भोपाल से आधार की जांच करवाई गई। जिसमें संबंधित आधार अंकुश बागरी का पाया गया। तथा संबंधित महिला से दूरभाष पर संपर्क किया गया जिसमें उसके परिवार के सदस्य ने जो आधार नंबर प्रेषित किया वह 67455102**43 है। अपर कलेक्टर ने बताया है कि दो लोगों को जो एक ही नंबर बताया गया है वह केवल एक व्यक्ति का है एवं महिला का आधार नंबर दूसरा है।
सवालों के घेरे में जांच
जिस जल्दबाजी में जिला प्रशासन ने सफाई दी है उससे जांच ही सवालों के घेरे में आ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित महिला कुसुम कली कुशवाहा अपने साथ जो आधार कार्ड जिसका नंबर 690583728452 लेकर बैंक में लिंक करवाने गई थी वह उसके संबंध में बैंक अधिकारियों से क्यों नहीं पूछा गया? जबकि उसने इसी आधार नंबर को लिंक करने आवेदन भी दिया था और यही नंबर का आधार कार्ड लेकर गई थी।
अब कुसुम कली के दो आधार नंबर सामने आए
जिला प्रशासन की सफाई के बाद एक बार फिर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गये हैं। पहले बैंक में जो आधार कार्ड कुसुम कली ने दिया था उसका दूसरा नंबर था और अब जिला प्रशासन को जो आधार कार्ड प्रस्तुत किया है उसका नंबर दूसरा है। सवाल यह है कि क्या एक व्यक्ति के दो आधार नंबर यूआईडीएआई जारी करता है? अगर ऐसा नहीं है तो फर्जी आधार कार्ड के मामले में जिला प्रशासन जांच करने से क्यों बच रहा है।