
सतना। देशभर में शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े के लिए बदनाम सतना जिले की जांच देश की बड़ी एजेंसियों में शुमार एनआइए कर रही है और एसटीएफ जबलपुर को इस गड़बड़झाले से जुड़े दस्तावेज संकलन का काम दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी जिले में लाइसेंस फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थिति यह है कि जो लाइसेंस जांच में गड़बड़ पाए गए थे उनके नवीनीकरण पर निराकरण होने तक रोक लगी है। इसके बाद भी लगभग दो दर्जन ऐसे लाइसेंस नवीनीकृत कर दिए गए हैं।
मामले में भी लिपिकीय स्टाफ का नाम सामने आ रहा है। बताया गया कि अपर कलेक्टर के पास लिपिक द्वारा जानकारी छिपाकर प्रकरण प्रस्तुत करता रहा और अधिकारी भी बिना पूछताछ के उन्हें रिन्यू करते चले गए। ज्यादातर गड़बड़झाला एबी सिंह के समय होना बताया जा रहा है। इस फर्जीवाड़े के दोषी माने गए सरकारी कर्मचारी के परिजन का मामला भी बताया गया है। जानकारी के अनुसार, जिले में तत्कालीन शस्त्र शाखा लिपिकों द्वारा व्यापक पैमाने पर शस्त्र लाइसेंसों में गड़बड़ी की गई थी।
300 शस्त्र लाइसेंसों में गड़बड़झाला
2013 में हुए खुलासे और कई बार जांच में यह तथ्य प्रमाणित है कि यहां बिना नाम के ही लाइसेंस नवीनीकृत कर दिए गए। वह भी ऐसे लाइसेंस जो जम्मू कश्मीर राज्य से जारी हुए हैं। नियम विरुद्ध शस्त्रों की सीमा वृद्धि कर दी गई। मनमानी कारतूसों की संख्या बढ़ा दी। इस तरह जांच में लगभग 300 शस्त्र लाइसेंसों में गड़बड़झाला किया गया। इसके बाद इन लाइसेंसों के नवीनीकरण पर रोक लगा दी गई है। लेकिन जानकारी सामने आ रही कि लगभग दो दर्जन शस्त्र लाइसेंस जो गड़बड़झाले की जद में हैं उन्हें भी नवीनीकृत करवा दिया गया। इसमें ज्यादातर लाइसेंस अपर कलेक्टर एबी सिंह के कार्यकाल के हैं।
इस तरह नवीनीकृत हुए लाइसेंस
बताया गया कि जांच में गड़बड़ पाए गए जिन लाइसेंसों को रिन्यू कर दिया गया है उनमें नागौद के तीन से चार लाइसेंस, कोलगवां डिलौरा के 2 से 3 लाइसेंस, अमरपाटन के एक से दो लाइसेंस, मैहर से लगभग दो लाइसेंस, छींदा से एक, धवारी सहित अन्य स्थानों के निवासियों के लाइसेंस नियम विरुद्ध नवीनीकृत कर दिए गए। मामले में अधिकारियों का कहना है कि उनके सामने प्रस्तुत की गई नोटशीट में लिपिकीय स्टाफ ने इन तथ्यों को छिपा दिया होगा। अगर संबंधित लाइसेंसों के जांच में होने का उल्लेख किया गया होता तो इस तरह की गड़बड़ी नहीं होती। बहरहाल अब यह तो जांच का विषय है कि अधिकारी ने इस तरह से लिपिक से काम करवाया या लिपिक ने खुद अपने स्तर पर ऐसा कृत्य किया।
कमिश्नर को किया गुमराह
इतना ही नहीं शस्त्र शाखा ने लाइसेंस फर्जीवाड़े में दोषी पाए गए लोगों के हितों को देखते हुए संभागायुक्त को भी गुमराह करने से परहेज नहीं किया। अपर कलेक्टर के हस्ताक्षर से 18 अप्रैल को एक पत्र लिखवाते हुए अधूरा सच बताकर जांच कार्रवाई निरस्त करना बता दिया, जबकि हकीकत यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद पहली गठित कमेटी की जांच जरूर रोकी गई थी। इसके बाद नई कमेटी गठित कर पुन: जांच कराई गई थी। जिसमें भी लाइसेंस में गड़बड़ी लगभग यथावत रही है। जिसकी रिपोर्ट भी अपर कलेक्टर के माध्यम से कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। हालांकि इसके पहले कोई निर्णय हो पाता एनआइए के निर्देश पर एसटीएफ इस जांच से जुड़े सभी दस्तावेज अपने कब्जे में कर ली है।
अगर ऐसा हुआ होगा तो उसकी जांच करवा ली जाएगी। गड़बड़ी किस स्तर से हुई है यह दिखवाया जाएगा। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी।
सतेन्द्र सिंह, कलेक्टर