सतना

फाइटर प्लेन की पेंटिंग बनाते हुए बीता था अवनि का बचपन, यहां पढ़ें सफलता की पूरी कहानी

देश में पहली बार फाइटर प्लेन उड़ाने के लिए चयनित तीन महिला पायलटों में शामिल मध्यप्रदेश के रीवा शहर की अवनि ने इतिहास रच दिया है।

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Feb 22, 2018
avani chaturvedi

रीवा। देश में पहली बार फाइटर प्लेन उड़ाने के लिए चयनित तीन महिला पायलटों में शामिल मध्यप्रदेश के रीवा शहर की अवनि ने इतिहास रच दिया है। बताया गया कि अवनि का बचपन फाइटर प्लेन की पेंटिंग बनाते हुए बीता था। वायुसेना के जिन विमानों की पेंटिंग बनाया करती थीं अब वे उसी को आसमान पर न केवल उड़ाएंगी बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों को पलक झपकते ही तबाह कर देगीं।

कल्पना चावला को जीवन का आदर्श मानने वाली इस जबांज की कहानी भी किसी परी कथा से कम नहीं है। वह 19 फरवरी को गुजरात के जामनगर में मिग-21 फाइटर प्लेन आधा घंटे तक अकेले उड़ाया। ऐसा करने वाली वह देश की पहली महिला पायलट बनी हैं।

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मौके को भुनाया
कम्प्यूटर इंजीनियर से फाइटर पायलट बनने तक का अवनि का सफर दिलचस्प है। अभी तक इस बारे में परिवार को भी नहीं पता था। डेढ़ साल तक हैदराबाद में चल रही ट्रेनिंग के दौरान अवनि चतुवेर्दी हेलीकाप्टर और ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम ही उड़ा रही थीं। लेकिन परीक्षण के दौरान सामने आई उनकी कुशलता और अन्य पायलटों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन एक नया मौका बनकर आया।

बस आगे ही बढ़ने की धुन सवार
अध्ययन और सीखने की धुन अवनि में बचपन से ही रही है। उनके पिता दिनकर प्रसाद चतुवेर्दी जल संसाधन विभाग में कार्यपालन यंत्री हैं। वे अभी रीवा में पदस्थ हैं। जबकि मां सविता चतुवेर्दी गृहणी हैं। मूलत: सतना निवासी चतुवेर्दी की अधिकतर समय पदस्थापना बाणसागर परियोजना के बांध स्थल देवलौंद में रही है। इसलिए अवनि ने 12 तक पढ़ाई वहीं की। इसके बाद ज्ञानस्थली राजस्थान से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया। कुछ समय तक उन्होंने आईबीएम कम्पनी में काम कर रही थीं, तभी वायुसेना में के लिए आवेदन किया। ट्रेनिंग में चयनित होने के बाद हैदराबाद चलीं गईं। उसने साथ की दो अन्य पायलटों की अपेक्षा अच्छा प्रदर्शन करके दिखाया है।

मानसिक एकाग्रता रही चुनौती
परिजन जब भी प्रशिक्षण के बारे में कुछ पूछते तो वह बताती रही कि यहां पर शारीरिक श्रम की अपेक्षा मानसिक एकाग्रता जरूरी है। अभी तक परिवार के लोगों को भी यह नहीं पता था कि बेटी फाइटर प्लेन उड़ाएगी। वायुसेना की ओर से इसलिए घोषणा नहीं की गई थी कि प्रशिक्षण में कमजोर रही तो हेलीकॉप्टर या फिर ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम में भेजा जाएगा। लेकिन बेहतर प्रदर्शन के चलते उसे पहली वरीयता मिली और अब वे फाइटर पायलट होंगी।

कल्पना चावला हैं आदर्श
अवनि के पिता ने बताया कि वह बचपन से कल्पना चावला की फैन रही है। जब भी टीवी या अखबार में उनके बारे में कुछ भी प्रकाशित होता तो वह बड़े ध्यान से जानकारी लेती थी। वह अक्सर कहती थी कि कड़ी मेहनत से ऐसे मुकाम हासिल कर सकती है। उसने कमरे में कल्पना की कई तस्वीरें भी लगा रखी हैं।

भाई से मिली प्रेरणा
दिलचस्प संयोग है कि अवनि के भाई नीरभ भी सेना में कैप्टन हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने वायुसेना में जाने का मन बनाया। अवनि ने पेंटिंग में बेहतर नाम कमाया है। सिविल लाइन स्थित अफसर कॉलोनी के घर में भी उसकी पेंटिंग कला के नमूने हैं, जहां पर उसने कई तस्वीरें बना रखी है। उन्हीं पेंटिंग में वायुसेना के फाइटर प्लेन भी रहे हैं।

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Published on:
22 Feb 2018 12:57 pm
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