
सतना। प्राइवेट सेक्टर के बैंक IDBI सतना में पैसा जमा करना सुरक्षित नहीं है। इस बैंक में खुलवाए गए फिक्स डिपॉजिट (FD) खाते न केवल सिस्टम से गायब हो रहे हैं और उसमें जमा राशि का भी कुछ पता नहीं चल रहा है। ऐसे लगभग आधा दर्जन मामले सामने आए हैं। एक्सीडेंट केस में मिले मुआवजे की राशि को कोर्ट के आदेश के बाद हितग्राहियों ने आईडीबीआई बैंक में फिक्स डिपॉजिट के रूप में जमा करवाया। लेकिन कुछ साल बाद जब इस खाते की जानकारी लेने पहुंचे तो पता चला कि उनका खाता सिस्टम से गायब है और राशि का भी पता नहीं है। सतना जिले के इतिहास में बैंक फ्राड का अपनी तरह का यह पहला मामला है। हितग्राहियों का कहना है कि मौजूदा बैंक प्रबंधन बता रहा है कि बैंक के किसी अधिकारी ने बड़ी गड़बड़ी कर दी है। लेकिन अभी तक हितग्राहियों को राशि नहीं मिली है जिससे वे बैंक और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
उचेहरा तहसील के जिगनहट निवासी ममता पत्नी लल्लूलाल चौधरी के पुत्र नीरज की रेल दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस मामले में रेल दावा अधिकरण द्वारा 1188340 रुपए का भुगतान किया गया। जिसमें माता ममता और पिता लल्लूलाल दोनों के हिस्से में 594170- 594170 रुपए दिए गए। कोर्ट के नियमों के तहत इस राशि का एक हिस्सा बैंक में एफडी के रूप में रखा जाता है। यह राशि इनके द्वारा आईडीबीआई बैंक राजेन्द्र नगर शाखा में एफडी के रूप में जमा कर दी गई। नियमानुसार यह एफडी मैच्योरिटी के पहले तोड़ी नहीं जा सकती थी। लल्लूलाल बताते हैं कि कुछ आवश्यकता होने पर एफडी से मिलने वाली ब्याज की राशि की जानकारी लेने बैंक पहुंचे तो वहां पहले कहा गया कि यह एफडी ही फर्जी है। जब लल्लूलाल ने अपनी पत्नी ममता की 3.90 लाख रुपए की एफडी के तत्समय के दस्तावेज दिखाए तो कहा गया कि खाता बंद हो गया है। फिर चक्कर लगाने पर पता चला कि यह राशि आहरित कर ली गई है और अब इस नंबर की कोई एफडी नहीं है। अब लल्लूलाल बैंक, पुलिस और जनसुनवाई में चक्कर लगा रहे हैं।
नागौद तहसील के ग्राम महकोना निवासी खुशीराम बागरी के बेटे देव बागरी 4 साल पहले एक्सीडेंट हो गया। जिसमें उसका बांया पैर कट गया। कोर्ट के आदेश पर एक्सीडेंटल केस 10.17 लाख रुपए बना। जिसकी कोर्ट के आदेश पर आईडीबीआई बैंक राजेन्द्र नगर शाखा में खुलवाई गई। जिसकी पूर्णता अवधि 2033 थी। पूर्णता अवधि के पहले यह राशि नहीं निकाली जा सकती थी। कोर्ट के आदेश पर तय माहों में ब्याज संरक्षक पिता को देने के आदेश हुए। लेकिन बैंक ने एक साल तक कोई ब्याज नहीं दिया। खुशीराम ने बताया कि ब्याज नहीं मिलने पर जब एक साल बाद बैंक गए तो पता चला कि यह बैंक खाता मौजूद ही नहीं है जिस पर 6.80 फीसदी ब्याज मिलना था। जब बैंक वालों से चर्चा हुई तो बैंक वालों ने बताया कि बैंक के कर्मचारी गड़बड़ी कर गए हैं। अब नया खाता खोलते हैं। इसके बाद पुत्र के नाम पर खाता खोला गया और इसकी ब्याज दर 5.95 फीसदी वाला कर दिया। जब इसका विरोध किया तो फिर से एफडी तोड़ कर खुशीराम के नाम पर एफडी कर दी। इस खेल में मूल खाता बदल गया। राशि भी गायब हो गई। अब जो नया खाता खोला है उसमें भी 60 से 70 हजार का हेरफेर है। बैंक वाले सभी दस्तावेज अपने पास रख लिए हैं और इधर उधर टाल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अकेले यह दो मामले नहीं है, इस तरह के लगभग आधा दर्जन मामले सामने आए हैं। सभी में मूल एफडी खाता गायब है और राशि का भी पता नहीं है। हितग्राही अपनी पूरी राशि पाने चक्कर लगा रहे हैं। यह भी जानकारी सामने आई है कि आईडीबीआई बैंक राजेन्द्र नगर शाखा में अधिकारी और अन्य लोगों ने मिलकर बड़ा बैंक फ्राड किया है। यह जानकारी बैंक मैनेजर आशीष तिवारी को भी है लेकिन इस मामले में न तो वे एफआईआर दर्ज करा रहे हैं और न ही हितग्राहियों को उनकी राशि वापस कर रहे हैं।
इस फर्जीवाड़े के मामले कलेक्टर के पास शिकायत के रूप में पहुंचे हैं। जिस पर कलेक्टर ने एलडीएम को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है और दोषी बैंक कर्मी अभी भी मजे में है और अपना पैसा गवां चुके हितग्राही चक्कर लगा रहे हैं।
इस मामले में आईडीबीआई बैंक के मैनेजर आशीष तिवारी से बात की गई। पहले तो उन्होंने ऐसी किसी भी घटना को सिरे से खारिज कर दिया। जब उन्हें प्रकरण बताते हुए उनके खाते से गायब रकम की जानकारी चाही गई तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया। इसके बाद उन्हें सवालों के मैसेज भी दिए लेकिन उन्होंने इस पर भी चुप्पी साधे रखी।
"कलेक्टर ने कुछ आईडीबीआई बैंक के कुछ प्रकरण जांच के लिए दिए हैं। इन्हें संबंधित बैंक शाखा को दिया गया है। वहां से प्रतिवेदन आने के बाद कलेक्टर को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।" - गौतम शर्मा, एलडीएम