आचार संहिता उल्लघन के बाद भी निर्वाचन अधिकारी खामोश
सतना। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव-2018 के मददेनजर लगी हुई आचार संहिता के उल्लघंन का मामला सामने आया है। बताया गया कि सत्ताधारी दल के नेता डंके की चोट पर नियमों की धज्जिया उड़ा रहे है और जिला निर्वाचन अधिकारी खामोश बैठे हुए है। एक ऐसा ही मामला सतना जिला अंतर्गत मैहर रेलवे ओवर ब्रिज का सामने आया है। जहां सतना लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद गणेश सिंह ने अपने समर्थकों के साथ ब्रिज का उद्घाटन किया है। जिला कांग्रेस कमेटी ने आचार संहिता के बीच इस पुल के उद्घाटन को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए जिला निवार्चन अधिकारी से कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आरोप लगाया है कि सत्तापक्ष के दबाव में सरकारी मशीनरी आचार संहिता के दौरान भी उनके लिए काम करती नजर आ रही है।
ये है मामला
बता दें कि, वर्षों से रीवा-कटनी के बीच नेशनल हाईवे-7 के चौड़ीकरण व उन्नयन का कार्य किया जा रहा है। पुल का कार्य पूर्ण होने पर बुधवार को बेहद-सादे समारोह के बीच अपने समर्थकों के साथ सांसद गणेश सिंह ने नारियल फोड़कर ब्रिज का उदघाटन किया। विधानसभा चुनाव 2018 की आचार संहिता के बीच सांसद द्वारा किया गया यह उदघाटन विवादों में फंस गया है। जैसे ही विपक्षी दल को उदघाटन की बात पता चली तो कांग्रेस भड़क गई। जिला कांग्रेस कमेटी के जिम्मेदारों ने कहा कि मैहर बाइपास पर बने रेलवे ओवर ब्रिज का उद्घाटन पूरी तरह गलत है। आचार संहिता के बीच पुल का उद्घाटन करने की शिकायत निर्वाचन आयोग से की जाएगी।
आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन
कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए बयान जारी किया है कि, मैहर बाईपास रेलवे ओवर ब्रिज का उदघाटन सतना सांसद द्वारा किया गया है जो कि चुनाव आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन है। कांग्रेस इस मामले को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करायेगी। प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लगी होने के बावजूद जिस प्रकार से सत्ताधारी दल के नेता डंके की चोट पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं। उससे जिला निर्वाचन अधिकारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री की फोटोयुक्त संबल योजना के कार्ड बांटे जा रहे हैं। भाजपा नेताओं के दबाव में कर्मचारियों को कार्ड बांटने के लिए मजबूर किया जा रहा है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। इससे पहले जनसंर्पक अधिकारी द्वारा चुनाव आचार संहिता लगी होने के बाद भी प्रदेश सरकार की मंत्री ललिता यादव का कार्यक्रम जारी किया गया, मामला संज्ञान में लाए जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। आज सांसद जैसे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ने चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए चुनाव आयोग को सीधी चुनौती दी है। उस पर चुनाव आयोग क्या कार्यवाही करता है इसका जबाब जनता जानना चाहती है।