
सतना। शहर की बेपटरी हो चुकी यातायात व्यवस्था को लेकर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यातायात पुलिस की ओर से मैन-पावर की कमी बताई गई थी। अन्य व्यवस्थाएं नहीं होने का भी हवाला दिया गया था। तब कलेक्टर और सांसद ने इस संबंध में निगम को सहयोग करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शहर में सुगम यातायात की मुहिम की के लिए नगर निगम ने अपने अतिक्रमण दस्ते 4 कर्मचारी सहित वाहन यातायात पुलिस को दिए थे। इसके साथ ही इन वाहनों का डीजल भी निगम दे रहा है। लेकिन अब स्थिति यह है कि यातायात पुलिस सड़क का अतिक्रमण हटाने की जगह इन कर्मचारियों का उपयोग हेलमेट चेकिंग के दौरान वाहनों को पकड़ने में कर रही है।
फिर बनी अराजकता की स्थिति
इन दिनों शहर की सड़कों पर एक बार फिर वाहन खड़े होने शुरू हो गए हैं, सड़क की पटरी पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा होने लगा है। लेकिन इस अस्थाई अतिक्रमण को हटाने में यातायात पुलिस की कोई रुचि नहीं है। जबकि इसके लिए बकायदे नगर निगम ने कर्मचारी, वाहन और डीजल नियमित तौर पर ले रही है। यातायात पुलिस अब नगर निगम के इन कर्मचारियों को कोठी तिराहे सहित अन्य स्थानों पर नियमित तौर पर होने वाली हेलमेट चेकिंग के काम में लगा रही है। निगम के कर्मचारियों को यह ड्यूटी दी गई है कि दो पहिया वाहनों को रोकें और यातायात पुलिस के सामने वाहन चालक को ले जाएं। ऐसे में न केवल इन कर्मचारियों की उपलब्धता का यातायात पुलिस दुरुपयोग कर रही है बल्कि सुगम यातायात के प्रबंधन को हाशिए पर रख दिया गया है।
यह दी गई थी व्यवस्था
सुगम यातायात व्यवस्था बनाने के नाम पर नगर निगम ने अतिक्रमण दस्ते के चार मस्टर कर्मी और एक वाहन चालक यातायात पुलिस को सौंपा था। इसके अलावा एक हाइड्रोलिक क्रेन और एक ट्रक दिया गया था। क्रेन का इस्तेमाल सड़क पर खड़े वाहनों को उठाने सहित सड़क की पटरी का अतिक्रमण हटाने में उपयोग किया जाना था। इसी तरह ट्रक का उपयोग सड़क पर यातायात बाधित करने वाले दो पहिया वाहनों को लोड करके यातायात थाने पहुंचाना था। मस्टर कर्मियों का काम वाहनों को लोड कराने सहित अतिक्रमण हटाने में सहयोग करना था। इतना ही नहीं नगर निगम इसके लिए यातायात पुलिस की डिमांड पर 200 से 250 लीटर डीजल भी प्रदान करता है। लेकिन इस व्यवस्था के नाम पर निगम के खजाने से पैसा तो लगातार जा रहा है लेकिन परिणाम शून्य है।
यह करना था, जो नहीं किया जा रहा
नगर निगम के पास समस्या था कि उनके पास अमला था लेकिन वाहनों पर चालानी कार्यवाही करने के अधिकार नहीं थे। यातायात पुलिस के पास समस्या थी कि उनके पास अधिकार थे लेकिन बल नहीं था। लिहाजा सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में तय किया गया कि निगम के कर्मचारी और वाहन देकर सुगम यातायात व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके लिए रीवा रोड, स्टेशन रोड, जिला अस्पताल के सामने, कन्या महाविद्यालय के सामने सहित शहर के अन्य यातायात बाधित स्थलों पर यह टीम सतत निगरानी करेगी और अतिक्रमण व अन्य बाधा हटाकर सुगम यातायात मुहैया कराएगी। लेकिन स्थिति यह हो गई है कि पूरा बल और वाहन हेलमेट चेकिंग की चालानी कार्यवाही में लगा दिया गया है और रीवा रोड, स्टेशन रोड, अस्पताल के सामने सहित अन्य स्थलों पर सड़कों पर फिर से वाहन खड़े होने लगे हैं और यातायात प्रभावित होने लगा है।
तत्कालीन एसपी ने कस रखी थी लगाम
तत्कालीन एसपी आशुतोष गुप्ता ने शहर की यातायात व्यवस्था को सही रखने यातायात पुलिस की कमान कस रखी थी। सड़क पर जाम लगते ही यातायात पुलिस के अधिकारी तलब हो जाते थे। लेकिन अब तो हाल यह है कि जाम लगता रहता है किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। सड़क की पटरी से अतिक्रमण हटाने यातायात पुलिस के प्रभारी को महीनों से सुगम यातायात की दिशा में नहीं देखा गया। जो थोडा बहुत खानापूर्ति निगम का अमला करता रहता था वह भी अब बाइक पकड़ने में लगा दिया गया। शहर के बेपटरी हो रखे यातायात की फिक्र किसी को नहीं है।
"इस मामले में पुलिस अधीक्षक से चर्चा करेंगे। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया जाएगा कि चिन्हित स्थलों पर यातायात व्यवस्था सही नहीं है और निगम से दिए गए कर्मचारियों और वाहनों से अन्य कार्य लिए जा रहे हैं।" - शेर सिंह मीना, निगमायुक्त
Published on:
20 May 2026 09:57 am
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