
सतना। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में नए अधिकारियों कर्मचारियों की पदस्थापना के बाद रक्त की दलाली पर सख्ती से लगाम लगाये जाने के कारण अब खून की दलाली का कार्य रीवा शिफ्ट हो गया है। खून की दलाली रीवा स्थित बिंध्या ब्लड बैंक से हो रही है और इस ब्लड बैंक के सतना में दो रमेश साहू और अभय सिंह दो ऑपरेटिव बताए जा रहे हैं। कहने को रक्त रीवा स्थित ब्लड बैंक से निकाल कर पहुंचाना बताया जाता है लेकिन हकीकत यह है कि इनके द्वारा सतना में ही रक्त निकाला जाता है और विंध्या ब्लड बैंक के दस्तावेज और सील जो इनके द्वारा अपने पास रखी गई है ब्लड बैग में लगाकर जरूरतमंद को दे देते हैं। इनके द्वारा एक ब्लड बैग 4 हजार रुपए में बेचा जाता है।
सतना में हैं दो ऑपरेटिव
जानकारी के अनुसार सतना शहर में विंध्या ब्लड बैंक का मुख्य कर्ताधर्ता रमेश साहू है। इसके द्वारा ग्राहक से रक्त का सौदा तय किया जाता है और ब्लड ग्रुप की जानकारी ली जाती है। ग्राहक से सौदा फाइनल होने के बाद रमेश ग्राहक को अपने दूसरे ऑपरेटिव अभय सिंह का नंबर देता है और अभय सिंह को ग्राहक का नंबर देता है। सौदा होने के कुछ देर तक इंतजार किया जाता है। ग्राहक अगर अभय को फोन लगा लेता है तो ठीक अन्यथा कुछ देर में अभय सिंह ग्राहक को फोन लगाता है और जानकारी लेता है। इस दौरान उसके द्वारा फिर से ब्लड ग्रुप की जानकारी ली जाती है और कितने रक्त की आवश्यकता होती है यह भी पूछा जाता है। इसके बाद मिलने का स्थल तय करता है। तय स्थल पर 15 से 20 मिनट में अभय पहुंच जाता है। यहां ग्राहक से अस्पताल या नर्सिंग होम द्वारा दिए गए ब्लड रिक्यूजीशन फॉर्म (रक्त मांग पत्र) को लिया जाता है। इसके दो घंटे बाद उन्हें रक्त उपलब्ध करा दिया जाता है। लेकिन रक्त इन्हें मानक प्रक्रिया से उपलब्ध नहीं कराया जाता है। बल्कि एक पन्नी में बर्फ डालकर उसी में ब्लड बैग रख दिया जाता है। इसके बाद संबंधित से रुपए लिये जाते हैं।
इस तरह संचालित होता है नेटवर्क
विंध्या ब्लड बैंक रीवा में है लेकिन इसका पूरा कारोबार सतना से ही संचालित होता है। इसके लिए इनके द्वारा फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए जाते हैं। इसकी पुष्टि जिला अस्पताल के आर्थो वार्ड में भर्ती रामअवतार साकेत के लिए विंध्या ब्लड बैंक रीवा से उपलब्ध कराए गए रक्त से होती है। यह ब्लड रामावतार साकेत के रिश्तेदार दिलीप कुमार वर्मा को दिया गया था। दिलीप के बयान से ब्लड बैंक के सतना में चल रहे अवैध कारोबार का खुलासा होता है। दिलीप ने पत्रिका को बताया कि उसे अपने एक रिश्तेदार से रमेश साहू का नंबर मिला था और बताया गया था कि इसके द्वारा ब्लड बेचा जाता है। इस पर रमेश साहू से बात होने के बाद अभय से फोन पर बात हुई। उसने जिला अस्पताल के बाहर बुलाया। 16 मई की सुबह लगभग साढ़े सात बजे अभय को जिला अस्पताल से जारी किया गया ब्लड रिक्विजिशन फॉर्म दिया गया। इसके बाद लगभग साढ़े 10 बजे अभय वापस जिला अस्पताल के बाहर बुलाया। पन्नी में बर्फ के बीच दो ब्लड बैग थमा दिए। इसके बाद नगद पैसे मांगे लेकिन नगद नहीं होने पर ऑन लाइन पेमेंट 8 हजार रुपए का किया गया।
दस्तावेजों से पकड़ में आया कि सतना से हो रहा कारोबार
अभय ने ब्लड बैग के साथ दिलीप वर्मा को ट्रांसफ्यूजन रियेक्शन फार्म भी दिया। जो मरीज को ब्लड चढ़ने के बाद भरा जाता है। इसमें ब्लड इश्यू करने का टाइम 8.20 लिखा हुआ है। अर्थात ब्लड रिक्विजिशन फॉर्म अभय को मिलने के 50 मिनट बाद ब्लड इश्यू कर दिया गया। ब्लड बैंक प्रोटोकॉल के अनुसार बिना ब्लड रिक्विजिशन फॉर्म की मूल प्रति के ब्लड बैंक कोई ब्लड इश्यू नहीं कर सकता है। सतना के जिला अस्पताल से रीवा के विंध्या ब्लड बैंक तक सामान्य स्थिति में 50 मिनट में नहीं पहुंचा जा सकता है। ऐसे में 8.20 पर ब्लड कैसे इश्यू कर दिया गया अपने आप में बड़ा सवाल है। इससे साबित हो रहा है कि रक्त सतना से ही इश्यू किया गया। और विंध्या ब्लड बैंक के दस्तावेज और सील भी यहीं लगाए गए।
इस तरह निकाला जाता है सतना में रक्त
जानकारों के अनुसार विंध्या ब्लड बैंक की एक वैन है। जो अक्सर बिरला हास्पिटल के आस पास खड़ी रहती है। कभी कभी यह बायपास के पास भी खड़ी होती है जहां रमेश साहू का घर है। इसी वैन में इनके द्वारा रक्त निकालने की प्रक्रिया की जाती है। इसके बाद ब्लड बैग को संबंधित ग्राहक के पास भेज दिया जाता है।
लगभग 300 डोनर का नेटवर्क
जानकारों का कहना है कि रमेश साहू के नेटवर्क में लगभग 300 डोनर हैं। पहले जब सतना में ब्लड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं थी तो रघुराज सिंह नामक व्यक्ति रक्त की दलाली का बड़ा नेटवर्क चलाता था। लेकिन इसके द्वारा रक्त सिर्फ नर्सिंग होम और निजी अस्पताल में सप्लाई किया जाता था। उसका पूरा काम सतना में रमेश साहू देखता था। उसके निधन के बाद पूरा नेटवर्क रमेश साहू के पास आ गया। जिसमें 300 से ज्यादा डोनर थे। अब इसी डोनर नेटवर्क के जरिए रमेश साहू रक्त का कारोबार विंध्या ब्लड बैंक के लिए करता है। चूंकि यह रक्त पेशेवर डोनर से निकाला जाता है इसलिए इनके रक्त में हीमोग्लोबिन कम होता है।
कम था हीमोग्लोबिन
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ अंकिता पाण्डेय ने बताया कि रामावतार साकेत के लिए विंध्या ब्लड बैंक से जो रक्त भेजा गया था उसकी जांच में हीमोग्लोबिन की मात्रा तय मानक से कम मिली है। अन्य कमियां भी पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट जल्द ही प्रस्तुत कर दी जाएगी। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पेशेवर डोनर का रक्त है।
Published on:
19 May 2026 09:32 am
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