
Satna news: सूंघने की तेज क्षमता और कड़ी ट्रेनिंग के कारण पुलिस के डॉग कई बार ऐसे सुराग तलाश लेते हैं, जहां इंसानी जांच की पहुंच सीमित हो जाती है। बम और विस्फोटक सामग्री की तलाश से लेकर अपराधियों के सुराग तक, ये डॉग पुलिस की जांच में अहम कड़ी बनते हैं। घंटों की ट्रेनिंग और अनुशासित दिनचर्या इन्हें मुश्किल हालातों में काम करने के लिए तैयार करती है। सतना पुलिस के डॉग स्क्वॉड में दो डीएसपी लेवल के डॉग हैं गोपी और सारा। गोपी पुलिस का भरोसेमंद साथी है, जो खतरे को सूंघकर पुलिस को अलर्ट करने में माहिर है।
जर्मन शेफर्ड प्रजाति का गोपी इन दिनों पुलिस का भरोसेमंद साथी बना हुआ है। आठ साल का गोपी स्निफर डॉग है और वम व अन्य विस्फोटक सामग्री की सूचना मिलने पर संदिग्ध स्थानों की जांच में पुलिस की मदद करता है। वह पिछले पांच साल से एमपी के सतना शहर में पदस्थ है। गोपी की एक साल की विशेष ट्रेनिंग भोपाल स्थित प्रशिक्षण केंद्र में हुई। सफल होने के बाद उसकी पोस्टिंग सतना की गई। तब से वह अपने हैंडलर प्रधान आरक्षक राधाकांत के कमांड पर काम कर रहा है। वीआइपी मूवमेंट के दौरान गोपी की व्यस्तता बढ़ जाती है। अच्छे कार्य के लिए दो बार स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित हो चुका है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इसी साल मार्च में जिला कोर्ट परिसर और प्रधान डाकघर में बम होने की फर्जी कॉल मिलने पर गोपी को जांच के लिए लगाया गया था। गोपी ने बेहद कम समय में दोनों परिसरों को छान मारा और पुलिस को जांच में जरूरी मदद मिली। गोपी को चुनौतीपूर्ण इलाकों में काम करने का अनुभव भी है। नक्सल प्रभावित रहे बालाघाट जिले में उसे हॉक फोर्स के साथ घने जंगलों में बारूदी सुरंगों की तलाश के लिए लगाया गया था।
गोपी की दिनचर्या अनुशासित है। हँडलर राधाकांत के साथ वह दिन में दो बार टहलता है और उसे दो समय भोजन दिया जाता है। इसके अलावा रोजाना एक्सरसाइज भी कराई जाती है, ताकि वह ड्यूटी के लिए हमेशा फिट रहे।
जिला पुलिस के डॉग स्क्वॉड में गोपी के साथ लेब्राडोर प्रजाति की सारा भी शामिल है। डीएसपी सारा ट्रैक डॉग है और हैंडलर संतलाल कुशवाहा के कमांड पर काम करती है। पुलिस के अनुसार सारा कई क्राइम सीन पर सुराग तलाशने में पुलिस की मददगार साबित हुई है। डॉग स्क्वॉड के ये दोनों सदस्य सिर्फ ड्यूटी का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि अपने हैंडलरों के साथ उनका खास तालमेल भी है।