
मैहर। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने नौकरी बचाने के लिए दर्जनों मेडिकल सर्टिफिकेट पेश किए गए, जिनमें अलग-अलग समय पर कई गंभीर बीमारियों का हवाला दिया गया। लेकिन जब इन प्रमाणपत्रों और सेवा रिकॉर्ड की जांच हुई तो न केवल सेवा समाप्ति का आदेश बरकरार रहा, बल्कि अपील करने पर न्यायालय से भी राहत नहीं मिली। मामले में मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने वाले डाक्टर भी सवालों में आ गए हैं। उन्होंने दो माह के अंदर तीन सर्टिफिकेट बनाए और तीनों बार अलग-अलग गंभीर बीमारियों को कारण बताया।
मैहर जिले के अमरपाटन ब्लाक के ग्राम इटमा (खजुरीताल) की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मनीषा तिवारी ने सेवा समाप्ति के आदेश को चुनौती देते हुए अपर कलेक्टर न्यायालय में अपील दायर की थी। उनका दावा था कि कोविड संक्रमण, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और मातृत्व कारणों से वह नियमित रूप से कार्य नहीं कर सकीं। हालांकि सुनवाई के दौरान सामने आए दस्तावेजों ने कई सवाल खड़े कर दिए।
बीमारियों की लंबी सूची
मामले में प्रस्तुत मेडिकल प्रमाणपत्रों के अनुसार कार्यकर्ता ने अलग-अलग समय में ह्यूमेटिज्म अर्थराइटिस, एनीमिया, जॉन्डिस, एंटरिक फीवर, पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज , हेपेटाइटिस एवं बैकएक, सियाटिका, पायरेक्सिया ऑफ अननोन ओरिजिन, मलेरिया, ब्रोंकाइटिस और डिस्पनिया जैसी बीमारियों के आधार पर अवकाश लिया। वर्ष 2019 से 2024 के बीच जारी किए गए 12 मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत किए गए। इसमें वर्ष 2024 के 6 माहों में जून से दिसंबर तक 8 मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत किये गए। इसमें जून, जुलाई और अगस्त में डॉ सीएम तिवारी ने अपने मेडिकल सर्टिफिकेट में अलग-अलग गंभीर बीमारी बताई। इसके बाद सितंबर से दिसंबर तक डॉ मनीष गुप्ता ने चार मेडिकल सर्टिफिकेट में अलग-अलग गंभीर बीमारी बताई। हद तो यह हो गई कि 1 दिसंबर 2024 को डॉ मनीष गुप्ता 30 दिन का मेडिकल सर्टिफिकेट देते हैं और बीमारी डिस्पनिया ब्रोंकाइटिस बताते हैं। ठीक एक दिन बाद डॉ सीएम 4 सप्ताह का मेडिकल सर्टिफिकेट देते हैं और बीमारी सियाटिक (राइट) विथ बैकएक बताते हैं। इन सभी दस्तावेजों को देखते हुए अपर कलेक्टर संजना जैन ने न्यायालयीन आदेश में स्पष्ट उल्लेखित किया है कि इस प्रकार प्रस्तुत अस्वस्थता और फिटनेस संबंधी प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता संदेह से परे स्थापित नहीं हो सकी।
वर्षों से अनुपस्थिति और बार-बार नोटिस
विभागीय अभिलेखों के अनुसार पाया गया कि मनीषा तिवारी को कई बार नोटिस भेजे गए। रजिस्टर्ड डाक से भी नोटिस भेजे गए। जिसमें बताया गया कि वे इटमा खजुरी ताल में निवास नहीं करती है बल्कि अन्यत्र ससुराल में रहती है। वर्ष 2020 में उन्हें पहले भी पद से पृथक किया गया था। बाद में आजीविका की स्थिति को देखते हुए विभाग ने उन्हें पुनः नियुक्त कर 'अंतिम अवसर' दिया था। सभी दस्तावेजों, विभागीय रिपोर्टों और प्रस्तुत तर्कों का परीक्षण करने के बाद अपर कलेक्टर ने सेवा समाप्ति आदेश को वैध मानते हुए अपील निरस्त कर दी।