OMG: इस पॉलीहाउस में इंसान से बड़ी लौकी, 6 फीट की लौकी देखकर हो जाएंगे हैरान

शेरगंज स्थित एकेएस विवि के कृषि विभाग द्वारा शोध व बीज उत्पादन के लिए पॉली हाउस में लगाई गई लौकी की फसल छात्र एवं यहां आने वालों लोगों के लिए कौतूहल का विषय है। पॉली हाउस के अंदर लटक रही छह फीट लंबी लौकी को देख सभी हैरान हैं।
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Jan 05, 2017
satna news
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सतना।
यदि कोई 6 फीट लंबी आदमकद अथवा 10 से 12 किलो बजनी लौकी देख ले तो उसका आश्चर्यचकित होना स्वाभाविक है, लेकिन अब वह दिन दूर नहीं जब जिले के खेतों और बगिया में इस तरह की लौकी देखने को मिल जाए। दरअसल, सतना के एकेएस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने लौकी की दो उन्नत किस्में विकसित की है।

अभी इनका उत्पादन प्रयोग के तौर पर पॉली हाउस में किया गया है पर अगले खरीफ सीजन में इनके बीज जिले के किसानों को भी उपलब्ध होंगे।
शेरगंज स्थित एकेएस विवि के कृषि विभाग द्वारा शोध व बीज उत्पादन के लिए पॉली हाउस में लगाई गई

लौकी की फसल छात्र एवं यहां आने वालों लोगों के लिए कौतूहल का विषय है। पॉली हाउस के अंदर लटक रही छह फीट लंबी लौकी को देख सभी हैरान हैं। जाति की बोवनी कर प्रति हेक्टेयर 700 से 1300 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है।

किसानों के लाभदायक

शोध निदेशक डॉ. एसएस तोमर व विभागाध्यक्ष डॉ. त्रिभुवन सिंह ने बताया कि लौकी की लंबे फलों वाली प्रजाति नरेन्द्र शिवानी की बुवाई समय से एक माह की देरी पर 28 अगस्त को की गई थी। इसके बावजूद उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा। इसके फलों की लंबाई 6 फिट तक हो चुकी है। यह किसानों के लाभदायक है।

विंध्य की माटी उपयुक्त

पौधे की निगरानी करने वाले प्रो. शिवपूजन सिंह एवं प्रियंका मिश्रा ने बताया कि पॉली हाउस में इस प्रजाति पर किए गए शोध से यह सिद्ध हो गया है कि नरेन्द्र शिवनी प्रजाति विंध्य की मिट्टी के लिए उपयुक्त है। किसान इसकी बुवाई जुलाई मध्य में कर ठंड के मौमम में अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।

1300 क्विंटल तक उत्पादन
इस कद्दू वर्गीय प्रजाति की बोवनी कर प्रति हेक्टेयर 700 से 1300 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है। इसके एक पौधे में 100 से 150 फल लगते हैं। जिनका उपयोग सब्जी के अलावा, हलुआ व रायता बनाने में होता है। इसके पके हुए कठोर फलों का उपयोग सजावट व शंख बनाने में होता है।
Published on:
05 Jan 2017 01:12 pm