मझगवां बीएमओ की बड़ी कार्रवाई, बिरसिंहपुर में एक फर्जी अस्पताल सहित तीन क्लीनिक सीज
सतना। स्वास्थ्य महकमे ने अंतत: कलेक्टर की सख्ती के बाद गुरुवार को झोलाछाप चिकित्सकों और नियम विरुद्ध संचालित हो रहे क्लीनिक के खिलाफ सीजिंग और एफआईआर की कार्रवाई शुरू कर दिया। बिरसिंहपुर में बीएमओ ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर तीन क्लीनिक सहित एक फर्जी अस्पताल सीज किया है। जड़ी बूटी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। कथित आयुर्वेद चिकित्सक अंजना विश्वास को एक स्कूली छात्रा का गर्भपात करते पकड़ा गया।
कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कम्प
बीएमओ डॉ. तरुणकांत मिश्रा ने उनका क्लीनिक सीज करने के साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई है। कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कम्प मचा हुआ है। उल्लेखनीय है कि झोलाछाप चिकित्सकों के मामले को पत्रिका ने प्रमुखता से उठाते हुए इस फर्जीवाड़ा का खुलासा किया था।
अंजना विश्वास के यहां दबिश
बीएमओ मझगवां डॉ. तरुणकांत मिश्रा और बिरसिंहपुर के एमओ डॉ. रुपेश गर्ग ने टीम के साथ बिरसिंहपुर में चिकित्सकीय फर्जीवाड़े के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। लगभग 10.30 बजे इन्होंने डॉ. अंजना विश्वास के यहां दबिश दी। इस पर विश्वास ने अपने क्लीनिक का पंजीयन दिखाया। उसमें उन्हें आयुर्वेद क्लीनिक संचालित करने की अनुमति थी।
मामला काफी गंभीर
बीएमओ ने जब अंदर जांच की तो पाया कि यहां डिलेवरी टेबल में एक लड़की लेटी हुई है। पूछताछ में पता चला कि उसका गर्भपात किया गया है। यह मामला काफी गंभीर माना गया, क्योंकि गर्भपात गैर प्रशिक्षित चिकित्सक और बिना मान्यता प्राप्त संस्था में किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकता। साथ ही यहां कॉपर-टी सहित काफी मात्रा में एलोपैथी दवाएं भी पाई गईं।
हंगामा खड़ा किया
आनन-फानन मामले की सूचना सीएमएचओ को दी गई। साथ ही इस क्लीनिक को सीज करते हुए अंजना विश्वास के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई। इस दौरान जब कार्रवाई प्रतिवेदन में अंजना विश्वास के हस्ताक्षर लिए जाने लगे तो उसने हंगामा खड़ा करते हुए हस्ताक्षर करने से इंकार करने लगी।
वरना घसीटते ले जाएंगे
इसकी जानकारी पुलिस को मिलने पर थाना प्रभारी ने कहा कि एक तो अवैध काम कर रही हो और उस पर हंगामा। नियमत: हस्ताक्षर कर दो वरना क्लीनिक से थाने तक घसीटते ले जाएंगे। तब जाकर उसके तेवर ढीले पड़े और उसने प्रक्रिया के तहत प्रतिवेदन में हस्ताक्षर किए।
कलेक्टर ने लगाई फटकार
स्वास्थ्य महकमे द्वारा झोलाछाप चिकित्सकों और फर्जी क्लीनिकों पर खानापूर्ति की कार्रवाई को देखते हुए कलेक्टर मुकेश कुमार शुक्ला ने सीएमएचओ को फटकार लगाई। गुरुवार को वीसी के बाद उन्होंने सीएमएचओ को सख्त लहजे में कहा कि झोलाछाप डाक्टरों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करते? नोटिस देने की जानकारी पर कहा कि नोटिस क्या होती है, इनकी दुकानें सीज करो और एफआईआर दर्ज कराओ।
एसपी की नाराजगी के बाद एफआईआर
बीएमओ ने अवैध क्लीनिक और चिकित्सकों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद अंजना कुमार विश्वास, सागर विश्वास, पीसी विश्वकर्मा, सीबू, विनोद कुमार सिंह और निखिल सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आवेदन दिया। लेकिन सभापुर थाना प्रभारी कल्याणी पाल विनोद और निखिल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के बाद अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया। जांच के नाम पर मामले को टालने की कोशिश की। जब पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर को इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने थाना प्रभारी को फटकार लगाई। एसपी ने पत्रिका को बताया कि थाना प्रभारी को आदेशित कर दिया गया है और इसके बाद संबंधितों पर म.प्र. राज्य आयुर्विज्ञान अधिनियम की धारा २४ व संबंधितों पर भादवि की धारा ३१२ व ३१३ के तहत प्रकरण कायम कर लिया गया है।
बंगाली दवाखाना, ऐलोपैथिक दवाएं
अगली कार्रवाई सीबू पदाराय के बंगाली दवाखाना में हुई। यहां भी आपत्तिजनक दवाएं मिलीं। जो दवाएं यहां पाई गई उसके उपयोग और उस चिकित्सा पद्धति से इलाज का इनके पास कोई लाइसेंस नहीं मिला। इस पर क्लीनिक सीज करने के निर्देश बीएमओ ने दिए तो डॉक्टर गिड़गिड़ाने लगा। बोला बच्चों का पेट पालने के लिए यह कर रहे हैं। इस पर एमओ डॉ. रूपेश सोनी ने कहा कि अपने बच्चों का पेट पालने के लिये दूसरों के बच्चों को मारने का कारोबार करोगे। इसके बाद क्लीनिक सीज करवा दिया।
दांत का डॉक्टर, पेट फाडऩे के औजार
अगली कार्रवाई कथित डॉक्टर सागर विश्वास के यहां हुई। इन्होंने अपने बोर्ड में दांतों का डॉक्टर बता रखा था। पूछताछ में उसने बताया कि वे सिर्फ दांतों से संबंधित बीमारी का इलाज करते हैं। लेकिन जब यहां जांच की गई तो आपरेशन टूल्स पाए गए। टूल्स तो ऐसे भी मिले जिनसे पेट तक खोला जा सकता है। इन्हें इस तरह के कारोबार की अनुमति नहीं थी। लिहाजा, इनका भी क्लीनिक सीज किया गया।
सीज किया फर्जी अस्पताल
इसके बाद यहां चल रहे फर्जी निजी अस्पताल जनहित चिकित्सालय में दल पहुंचा। यहां एक मरीज बैठा पाया गया। जब संचालक पीसी विश्वकर्मा से अस्पताल संचालन के दस्तावेज चाहे गए तो वे प्रस्तुत नहीं किये जा सके। नियम विरुद्ध चिकित्सालय संचालन पर जब इसे सीज करने की कार्रवाई शुरू की गई तो डॉक्टर विश्वकर्मा ने इसे अपना घर भी बताते हुए विरोध शुरू किया। तब बीएमओ और एमओ ने कहा कि कलेक्टर के आदेश हैं। आप इसमें बाधा मत बने। तब जाकर इस अस्पताल को सीज किया जा सका। इस तरह के अस्पताल संचालन पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के निर्देश है कि इन पर मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम १९७३ की धारा ८ का (1)(2) के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाए।
आश्रम में दवाओं के नाम पर जड़ी बूटी का कारोबार
इसी दौरान बीएमओ को जानकारी मिली कि हरियाणा के दो युवक त्यागीजी आश्रम में दवाओं के नाम पर फर्जीवाड़ा करते हैं। इस पर दल मौके पर पहुंचा। जांच में पाया गया कि विनोद कुमार सिंह निवासी कैथल हरियाणा और निखिल सिंह निवासी हरियाणा द्वारा यहां जड़ीबूटी के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है। इनके पास से चूर्ण पॉवडर दो बैग, काली गोलियां और तेल की कई शीशियां बरामद की गईं। साथ ही दो घंटे में इनके द्वारा किये गये कारोबार के 30 हजार रुपए भी बरामद किए गए। इस पर इनके विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए राशि थाने में जब्त कराई गई।