उचेहरा की लिलजी नदी को मिलेगा जीवनदान, रीवा की बिछिया और सिंगरौली की सुखाड़ भी होगी सदानीरा
सतना। ऐसी नदियां जो वर्षाकाल के बाद सूख जाती हैं और इस पर आधारित आजीविका और पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित होता है, उन नदियों को सदानीरा बनाया जाएगा। नदी पुनर्जीवन योजना के तहत नदी में बारह माह पानी का सतत प्रवाह बनाए रखने सतना सहित प्रदेश के 35 जिलों की एक-एक नदियों का चयन किया गया है। सतना जिले में उचेहरा जनपद की लिलजी नदी को चुना गया है तो रीवा की बिछिया और सिंगरौली की सुखाड़ नदी का चयन किया गया है।
यह काम पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की मनरेगा योजना के तहत किया जाएगा। इस संबंध में कलेक्टर एवं जिपं सीइओ को विकास आयुक्त ने आवश्यक निर्देश दिए हैं। बताया गया कि नदी पुनर्जीवन योजना के तहत सतना के उचेहरा जनपद की लिलजी नदी के 49 किलोमीटर के हिस्से में काम किया जाएगा। इस कार्यक्रम को पूरा करने के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नोडल अधिकारी होंगे।
भूजल संवर्धन कार्यों की योजना
इस प्रोजेक्ट में मनरेगा के जिला परियोजना अधिकारी और सीनियर डाला मैनेजर नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम के लिए चयनित जल संरक्षण और भूजल संवर्धन कार्यों की योजना के प्रावधानों तथा प्रक्रिया के तहत समयबद्ध शासकीय स्वीकृतियां सुनिश्चित कराएंगे। इस मामले में आरईएस के ईई कि जिम्मेदारी तकनीकि मार्गदर्शन के साथ ही जलसंरक्षण और भूजल संवर्धन के कार्यों की मानीटरिंग की होगी।
वाटर शेड के जिला तकनीकि विशेषज्ञ
काम समय सीमा में हो यह देखना भी इनका ही काम होगा। वाटर शेड के जिला तकनीकि विशेषज्ञ व जिला परियोजना समन्वयक का काम होगा कि वे कार्यका वाटरशेड के सिद्धांत के आधार पर चयन में सहभागी बनेगे और निगरानी के साथ ही नियमित रिपोर्ट भी वे जिपं सीईओ को देंगे।
यह सिद्धांत करेगा काम
इस पूरे प्रोजेक्ट की मेन थीम है कि सूख रही नदी के तल से भूजल का स्तर ऊपर बनाए रखना। इसके लिए नदी के कैचमेंट व कछार में जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के कार्य व्यापक पैमाने पर सघनता से करने होंगे। जिससे भूजल का स्तर नदी तल से ऊपर होकर बेस फ्लो के रूप में नदी में प्रवाहित हो और नदी पुनर्जीवित हो सके।