चालकों का न पुलिस वेरिफिकेशन न ही स्वास्थ परीक्षण, आरटीओ महकमा यदा-कदा ही करता है बसों पर कार्रवाई, साठगांठ के चलते जारी हो जाते परमिट
सतना। स्कूली बसों को लेकर सतना की स्थिति इंदौर से ज्यादा खराब है। स्कूलों द्वारा १५ साल से ज्यादा पुरानी बसें सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए बच्चों को उसमें बैठाया जाता है। सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर, फिटनेस, बीमा सहित तमाम मापदंडों को लेकर लापरवाही बरती जा रही है।
चालकों का न तो स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है, न ही पुलिस वेरिफिकेशन होता है। परिवहन व स्कूल शिक्षा विभाग के मापदंड का खुलेआम उल्लंघन जारी है। ऐसे में अगर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा।
आदेश देकर भूले
गत सितंबर माह में स्कूल शिक्षा विभाग ने डीईओ व आरटीओ को आदेशित किया था कि स्कूली बसों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस, फस्र्ट एड बाक्स, स्पीड गवर्नर, महिला स्टाफ सहित चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन व समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाना होगा। इसके बाद स्कूलों को आदेश जारी कर दिए गए। जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति भी हुई। लेकिन, आज तक शत प्रतिशत बसों में मापदंडों को लागू नहीं कराया जा सका।
हादसे के बाद ही जागरुकता
सालभर में दर्जन भर बैठकें और हिदायतें देने के बाद भी हालात जस के तस हैं। अब तक शहर के स्कूल, कॉलेजों में खटारा बसें दौड़ रही हैं। वैन भी एलपीजी से चल रहे हैं। लेकिन महीनों से इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा, 80 फीसदी स्कूल और कॉलेज बसों में न जीपीएस लगे और न स्पीड गवर्नर।
6 माह से बसों की जांच नहीं
कैमरे तो दूर की बात हैं। आरटीओ कार्यालय से भी 6 माह से बसों की जांच नहीं की गई है। बसें खुलेआम बिना फिटनेस ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। जब हादसे होते हैं तब जागरुकता आती है। आनन-फानन कुछ घंटे सड़क पर खड़ा होकर कार्रवाई की खानापूर्ति कर ली जाती है।
सभी की लापरवाही
डीईओ व आरटीओ को आदेश में चेताया गया था कि स्कूल प्रबंधन को पत्र लिखकर निर्धारित मांपदड पूरे करने के आदेश दिए जाएं। साथ ही महीनेभर के अंदर सभी बसों में गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित होना चाहिए। तय समय के बाद निगरानी आरटीओ करंेगे। लेकिन अब तक स्कूली बसों की जांच को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
15 वर्ष पूरा, कागज नहीं
परिवहन विभाग के नियमों के अनुरूप एक वाहन सड़क पर सिर्फ 15 वर्ष तक दौड़ सकता है। शनिवार को आरटीओ जांच में भी यह बात सामने आई। बस क्रमांक एमपी 19 डी 6859 का पंजीयन वर्ष 2002 में हुआ था। जो बिना कागजात व फिटनेस के सड़क पर दौड़ती पाई गई। बस क्रमांक एमपी 19 पी 0404 का भी फिटनेस समाप्त हो चुका है। दोनों बसों के खिलाफ आरटीओ ने कार्रवाई करते हुए थाने में खड़ी करवा दी।