भेजे गए थे 6 नाम, कलेक्टर से मांगा गया चरित्र सत्यापन
सतना. कांग्रेस को सत्ता में आए 11 माह से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन कांग्रेसराज में नगर निगम को एल्डरमैन नहीं मिल सका और कई लोग एल्डरमैन का सपना संजोए खाली बैठे रह गए। अब जब इस परिषद का कार्यकाल महज 1 माह शेष बचा है, ऐसे में मंत्री से हरी झण्डी मिली भी तो 6 नामों में से एक नाम की। हालांकि मंत्री की सहमति मिलने के बाद अब शासन स्तर से एल्डर मैन नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। कलेक्टर से संबंधित नाम गणेश त्रिवेदी का चरित्र सत्यापन चाहा गया है। अब यह देखने वाली बात हो गई कि प्रक्रिया लाल फीताशाही में उलझती है या त्रिवेदी गिनती के कार्यकाल में एल्डर मैन बन पाते हैं। हालांकि अन्य नामों पर मंत्री की सहमति न बन पाने को लेकर कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।
यह है प्रावधान
नगर निगम में निर्वाचित पार्षदों के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वालों की बतौर एल्डरमैन नियुक्ति का प्रावधान है। हालांकि इन्हें सामान्य भाषा में गैर निर्वाचित पार्षदों की तरह देखा जाता है लेकिन पार्षद वार्ड के प्रतिनिधि होते हैं जबकि एल्डरमैन पूरे निगम क्षेत्र के। सत्ता में आने के बाद कांगे्रस ने जुलाई माह में निगमों में एल्डरमैन नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी थी। लेकिन सतना में यह मामला अभी तक फिट नहीं हो सका है। अब जबकि परिषद को 1 माह शेष बचे हैं तब सतना नगर निगम में एल्डमैन नियुक्ति की प्रक्रिया अंजाम के करीब तक पहुंच चुकी है।
6 नामों में से एक पर सहमति
सतना नगर निगम में एल्डरमैन के लिए जिले से जो नाम संबंधितों की ओर से भेजे गए थे उसमें 6 नाम शामिल थे। इनमें सविता अग्रवाल, गुलाब सोनी, मो. असलम, महेंद्र वर्धन सिद्धार्थ, सुधीर सिंह बघेल और गणेश त्रिवेदी के नाम शामिल थे। राजधानी के सूत्रों की मानें तो सतना से भेजे गए नामों में से मंत्री नगरीय विकास एवं आवास विभाग जयवर्धन सिंह ने महज एक नाम पर अपनी सहमति जताई है। उन्होंने गणेश त्रिवेदी के नाम पर सहमति जताते हुए निगम में एक एल्डरमैन नियुक्त करने की सहमति दी है। बताया गया है कि मंत्री के निर्देश के बाद अब चिन्हित एक नाम गणेश त्रिवेदी के चरित्र सत्यापन के लिये कलेक्टर को पत्र लिखा जाएगा। जहां से रिपोर्ट आने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
फिर गरमाएगी कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति
जिन 5 नामों पर स्वीकृति की मुहर नहीं लगी है वे कही न कहीं से हाल के दिनों में कांग्रेस की राजनीति में गरमाहट लाने में शामिल रहे हैं। मसलन सविता अग्रवाल ने कार्यकारिणी से इस्तीफा दिया था तो गुलाब सोनी ने नगर अध्यक्ष के खिलाफ एक तरीके से मोर्चा खोल दिया था। इसी तरह से महेंद्र वर्धन को विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा की लॉबी का माना जाता है। ऐसे में यह तो माना जा रहा है कि इन नामों की अस्वीकृति कांग्रेस के अंदरखाने में शोर तो जरूर मचाएगी।