सतना

क्या पांचवीं बार चुनावी समर में उतरे शंकरलाल तिवारी लगाएं जीत का चौका, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

MP election 2018: पांचवीं बार चुनावी मैदान में शंकरलाल तिवारी, पढ़ें पूरी प्रोफाइल

2 min read
Nov 03, 2018
MP Assembly Election : Shankar Lal tiwari Satna BJP MLA Profile
MP Assembly Election : Shankar Lal tiwari Satna BJP MLA Profile

प्रोफाइल
- नाम : शंकरलाल तिवारी
- शिक्षा : 11वीं बोर्ड 1968 में
- प्लस प्वांइट: सरलता,कास्ट फैक्टर
- माइनस प्वांइट: 15 साल की एंटी इन्कम्बेंसी
- सोशल मीडिया पर रहते हैं सक्रिय
- ट्विटर पर ये सक्रिय रहते हैं।
- फेसबुक पर भी हैं लेकिन समर्थक ही चलाते हैं
- पुराना रेकॉॅर्ड: 15 साल विस में जनता का प्रतिनिधित्व
- प्रोफेशन : खेती (विधायक बनने से पहले)
- शौक : खाली समय में किताबें पढ़ते हैं
- ठीहा : ये ज्यादातर घर पर ही मिलते हैं।

पांचवीं बार चुनावी मैदान में शंकर
शंकरलाल तिवारी पांचवीं बार चुनावी मैदान में होंगे। 2003 से लगातार विधायक शंकर लाल ने पहला चुनाव 1998 में निर्दलीय लड़ा था। 2003, 2008 और 2013 में भाजपा से चुनावी मैदान में रहे।

ऐसे बनी पहचान
विधायक बनने से पहले ये एक स्थानीय अखबार में पत्रकार रहे हैं। यह उनकी शुरुआती पहचान का बड़ा कारण था। इससे पूर्व उन्होंने खुद का बेधड़क भारत नाम से साप्ताहिक अखबार भी निकाला था। 1998 में लोकतांत्रिक भाजपा पार्टी भी बनाई थी।

चकदही में हुआ जन्म
शंकरलाल तिवारी बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं। इनका जन्म 8 अप्रैल 1953 को चकदही गांव में हुआ था। सतना के सुभाष चौक पर पुस्तैनी मकान में परिवार के साथ रहते हैं। पत्नी सुषमा तिवारी, तीन बेटे राजनारायण, आशीष व पुनीत साथ में रहते हैं। एक बेटी विजयश्री हैं। शंकरलाल से ही परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि शुरू होती है।

बचपन में संघ से जुड़े
शंकर लाल बचपन से ही संघ से जुड़ गए थे। 1975 तक स्थानीय स्तर पर युवा व बेबाक नेता की छवि बना चुके थे। आपातकाल में जेल गए। इस तरह मीसाबंदी के रूप में 18 माह तक जेल में रहे। इन्हें रीवा, टीकमगढ़ और सतना की जेल में रखा गया था। जब बाहर आए तो संघ और भाजपा की राजनीति में सक्रियता बढ़ा दी। इसके बाद जिलास्तर पर पार्टी में विभिन्न पदों पर दायित्व निभाते रहे हैं।

जातिगत समीकरण
47 फीसदी सामान्य वर्ग के मतदाता, पिछड़ा वर्ग के 24, एसटी 10 और एससी मतदाता 14 फीसदी हैं। करीब 10 फीसदी मुस्लिम मतदाता भी हैं। शंकरलाल तिवारी 20 फीसदी ब्राह्मण व 12 फीसदी व्यापारी मतदाता सहित 24 फीसदी पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं में पकड़ रखते हैं। उनकी तीन बार की जीत का यही बड़ा कारण है।

हार-जीत का एनालिसिस
2008 में 38,682 वोट मिले, जीत का अंतर 10,800 था। 2013 में 56,160 वोट मिले। जीत का अंतर बढ़कर 15,332 हो गया।

Published on:
03 Nov 2018 03:39 pm