सतना

दसवीं और 12वीं के बोर्ड के रिजल्ट से पहले पैरेंट्स और बच्चे पढ़ लें ये खबर

एमपी बोर्ड और सीबीएसइ के रिजल्ट इसी महीने आ जाएंगे। पैरेंट्स और बच्चों के लिए जरूरी टिप्स

3 min read
May 11, 2018
दसवीं और 12वीं के बोर्ड के रिजल्ट से पहले पैरेंट्स और बच्चे पढ़ लें ये खबर

सतना. मई के दूसरे सप्ताह से रिजल्ट का दौर शुरू होने वाला है। एमपी बोर्ड और सीबीएसइ के रिजल्ट इसी महीने आ जाएंगे। संभावित डेट के अनुसार एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं के परिणाम 14 मई को तो सीबीएसइ में 28 मई को 12वीं और 21 मई को दसवीं का परिणाम घोषित किया जाएगा। इस दौरान स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स दोनों ही डरे हुए हैं। पैरेंट्स सोचते हैं कि रिजल्ट खराब होने से उनका बच्चा कोई गलत कदम न उठा ले। स्टूडेंट सोच रहे हैं कि पता नहीं मैं अपने पैरेंट्स का ख्याब पूरा कर पाऊंगा या नहीं। ऐसे में दोनों को समझदारी दिखानी चाहिए। ज्यादा जिम्मेदारी पैरेंट्स के कंधों पर है। उन्हें बच्चों के कोमल मन को समझना होगा। एक्सपर्ट का कहना है कि रिजल्ट आते ही शहर ही नहीं, प्रदेश में बच्चों द्वारा उठाए जाने वाले गलत कामों की खबरें सामान्य हो जाती हैं। इसलिए पैंरेट्स पूरी तरह से बच्चों पर नजर रखें और उनके ऊपर किसी भी तरह का दवाब न बनाएं। बच्चों के कम अंक आए या फिर फेल हो जाए तो इस गलती को हंसते हुए माफ कर दें।
रिजल्ट वाले दिन जरूर गौर करें
रिजल्ट वाले दिन जरूर गौर करेअपने रिश्तेदारों की बात अपने बच्चे से कराने से बचें। नार्मल होने पर वह खुद ही बात कर लेगा ।
साथ ही रिश्तेदारों को बताएं कि बच्चे को असुविधाजनक स्थिति में ना डालें।
जरूरत पडऩे पर बच्चों को काउंसलर के पास ले कर जाएं।
बच्चों को बताएं कि रिजल्ट सिर्फ जीवन का एक हिस्सा है, अगर दोबारा मेहनत ही की जाए तो फि र से वह पास हो सकते हैं।
उसके साथ बैठे और अच्छे अच्छे विचार साझा करें।
धोके से भी ताना मत दें। न ही एेसे लोगों को मिलने दें।

IMAGE CREDIT: Sajal Gupta/Patrika

पैरेंट्स को समझनी होगी बच्चों की क्षमता
साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक स्टूडेंट के आत्मघाती कदम उठाने की सबसे बड़ी वजह है पैरेंट्स का अति महत्वाकांक्षी होना। घर पर पढ़ाई को लेकर दबाव होना। कई बार पैरेंट्स अपनी अधूरी इच्छाएं बच्चों पर लाद देते हैं। यही नहीं वे बच्चों को विषय उसके हिसाब से नहीं बल्कि उसमें मिलने वाले पैकेज या फि र अन्य की देखा देखी
कर दिलाते हैं। यही आगे जाकर बच्चे के लिए मुसीबत बन जाता है और मन पढ़ाई में न लगने की वजह से यह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता।

IMAGE CREDIT: sajal gupta/Patrika


एेसे दिखें लक्षण तो खतरा
बच्चा ज्यादा किसी से बात नहीं कर रहा हो या गुमसुम हो।
बच्चे भविष्य में खुद के न होने या खुद की वजह से किसी को भी परेशानी न होने जैसी बातें करें।
पसंदीदा गतिविधियां बंद कर दें और अपने ख्यालों में खोया रहें।
दुख भरे गीत या कविता लिखे या फि र संगीत सुनें ।

बच्चों से बात करने की कोशिश करें
अगर किसी बच्चे में इस तरह के लक्षण दिखें तो सबसे पहले उससे बात करें। जो बच्चे के सबसे ज्यादा नजदीक है भाई-बहन या माता पिता कोई भी बच्चे से उसके विचार जानने की कोशिश करें। पता चलते ही सारा परिवार कोशिश करें कि उसका ध्यान इन गतिविधियों से हटे। उसके साथ हर वक्त रहे मगर निगरानी के लिए नहीं अपनत्व के दृष्टि से।

रिजल्ट से पहले इन बातों का ध्यान रखें
बच्चे को बताएं कि यह महज एक असफ लता है न कि जीवन का अंत।
फैमिली ट्रिप प्लान करें जिससे बच्चे का माइंड डाइवर्ट हो।
कोशिश करें यह प्लानिंग रिजल्ट के आसपास बने।
बच्चा अगर दुखी है तो उससे असफ ल लोगों की प्रेरणादायक कहानियां सुनाएं।
खुद भी परिवार में बच्चे के रिजल्ट को लेकर किसी तरह की टिप्पणी न करें ।
बच्चे की किसी से भी तुलना न करें।

ये भी पढ़ें

चित्रकारों की नजर से ऐसा हो अपना सुंदर सतना, देखे इन फोटो में
Published on:
11 May 2018 12:41 pm
Also Read
View All