
रीवा। बात 1980 के मध्यावधि चुनाव की है। तब के नेता विपक्ष रहे अर्जुन सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जा रहा था। पार्टी के भीतर गुटबाजी ने ऐसा जोर पकड़ा कि उन्हीं के चुनाव चिह्न में पेच फंस गया। सीधी जिले के सभी छह प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न का आवंटन पार्टी की ओर से समय पर नहीं पहुंचा तो जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी मानते हुए रेलगाड़ी का चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया।
प्रत्याशियों के सामने असमंजस की स्थिति
नौ राज्यों में हो रहे उस चुनाव में यह घटनाक्रम सुर्खियों में आ गया। इधर चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशी परेशान थे। इसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग को की गई, जहां से मामला नहीं सुलझा तो केन्द्रीय निर्वाचन आयोग तक बात पहुंची। कई दिनों तक प्रत्याशियों के सामने असमंजस की स्थिति रही। वे प्रचार के लिए नहीं निकल पा रहे थे। कुछ प्रत्याशियों ने बुलेटिन भी छपवा लिया था।
विपक्ष की ओर से किया गया गलत प्रचारित
वहीं विपक्ष की ओर से यह प्रचारित किया गया कि कांग्रेस पार्टी यहां के सभी प्रत्याशियों से नाराज है, इसलिए ऐसा किया गया है। सप्ताहभर के भीतर ही केन्द्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से आदेश जारी किया गया कि सीधी जिले के सभी छह उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न रेलगाड़ी की जगह पंजा आवंटित किया जाए। इस घटनाक्रम का शिकार अर्जुन सिंह भी हुए और उन्हें भी रेलगाड़ी चिह्न मिला था।
अर्जुन-विद्याचरण मुख्यमंत्री पद के थे दावेदार
वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेश सिंह गहरवार बताते हैं कि उस समय कुंवर अर्जुन सिंह और विद्याचरण शुक्ला दोनों मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे। आंतरिक विरोध की वजह से ही चुनाव चिह्न पर पेच फंसा। उस दौरान एआइसीसी के महासचिव बूटा सिंह, जीके मूपनार, एआर अंतुले मध्यप्रदेश के चुनाव की निगरानी कर रहे थे। पार्टी की ओर से एआर अंतुले चुनाव चिह्न आवंटित कर रहे थे।
विद्याचरण को केन्द्र में बुला लिया
अर्जुन सिंह के समर्थकों ने उस दौरान आरोप लगाया था कि विद्याचरण और अंतुले ने जानबूझकर ऐसा किया है। इंदिरा गांधी भी इस मामले को लेकर नाराज हुई थीं और विधायकों का अधिक विद्याचरण के साथ होने के बावजूद उन्होंने अर्जुन सिंह को मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान कर दिया था। इसकी भरपाई के लिए उन्होंने विद्याचरण को केन्द्र में बुला लिया।
सभी को मिली थी जीत
जिन प्रत्याशियों को रेलगाड़ी का चुनाव चिह्न आवंटित हुआ था उनमें चुरहट से अर्जुन सिंह चुनाव लड़ रहे थे। इनके विरोध में जनता पार्टी के चंद्रप्रताप तिवारी थे। बाद में पंजा चिह्न आवंटित होने पर सभी सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते। सीधी से इंद्रजीत पटेल, धौहनी से जगवा देवी, गोपद बनास से कमलेश्वर द्विवेदी, देवसर से पतिराज सिंह, सिंगरौली से वंशमणि वर्मा जीते थे।