
diwali ki dharmik paramparaye why we celebrate diwali in hindi
सतना। दीपावली जैसे खास त्योहार पर भी आमजन की सुरक्षा व शांति के लिए ड्यूटी पर रहने वाले पुलिस अधिकारियों, जवानों के घर सौहार्द व सकारात्मक ऊर्जा से भरे रहे। उनकी पत्नियों ने घर और बाहर की जिम्मेदारी बखूबी संभाली। वे अपने घर में दीपावली मनाने से पहले साथ में काम करने वालों और गरीबों के घर जाकर उनके परिवार व बच्चों को गिफ्ट देने के बाद अपने घर में दीपावली मनाई। परोपकार व सद्भाव के इस जज्बे को सलाम...।
परिवार संग मनाते हैं खुशियां
इस बार नए घर में शिफ्ट हुए हैं। इसलिए इसे बेहतर तरीके से सजाया है। हम अक्सर गांव जाकर परिवार के साथ दीपावली मनाते हैं। इसके पहले ही अपने यहां काम करने वालों को तोहफा देते हैं। इसलिए बाजार से मिठाइयां, पटाखे और कपड़े खरीद कर ले जाते हैं। परिवार के साथ पकवान बनाकर एक-दूसरे से मिल लेते हैं। पूरे घर को दीपों से सजाया था। अब बच्चों को भी इस त्योहार का महत्व समझ आने लगा है। आसपास के बच्चों को मिठाई और पटाखे बांटते हैं।
रचना पटेल, स्नातक (फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट वीरेन्द्र पटेल की पत्नी)
बुजुर्गों को बांटते हैं कपड़े-मिठाई
दीपावली को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहता है। बेटी ही तय करती है घर में कैसी सजावट होनी है। उसी हिसाब से हम मिलकर घर को सजाये थे। धनतेरस पर कुछ जरूरत का सामान खरीद कर बच्चों के लिए कपड़े लेते हैं। पकवान बनाते हैं और फिर सभी को बधाई देकर अपने घर आमंत्रित करते हैं। कॉलोनी के बच्चों के साथ मिलकर पटाखे फोड़ते हैं और मिठाई बांटते हैं। हम गरीब बुजुर्गों को कुछ कपड़े और मिठाई देते हैं।
अंजना सिंह बघेल, स्नातक (सहायक उप निरीक्षक आरपीएफ सुनील सिंह बघेल की पत्नी)
गरीबों का रहता है ध्यान
रोशनी के इस पर्व को लेकर काफी उत्साह रहता है। जब यह साथ होते हैं तो परिवार के लिए नए कपड़े और घर की जरूरत का सामान लेते हैं। दीपावली के पूजन में अक्सर ये साथ नहीं होते। एेसे में कॉलोनी में रहने वाले पुलिस परिवारों के साथ मिलकर दीप जलाते हैं। घर में काम करने वालों को भी गिफ्ट देते हैं। इस दिन जो गरीब मिलते हैं उन्हें मिठाई और जरूरत का सामान भी दिए हैं।
रेनू पाण्डेय, स्नातक (उप निरीक्षक भूपेन्द्र मणि पाण्डेय की पत्नी)
कई दिन पहले से करते हैं तैयारी
उत्साह, उमंग और समृद्धि के इस त्योहार की तैयारी कई दिन पहले से करनी होती है। दीपावली पर यह अक्सर ड्यूटी में होते हैं। इसलिए जब साथ होते हैं तो त्योहार की तैयारी कर लेते हैं। साथ रहने वाले स्टाफ के परिवार के साथ दीपावली मनाते हैं। बच्चों को मिठाई बांटकर उनके साथ फुलझड़ी, पटाखे चला लेते हैं। जरूरतमंद लोगों को फल मिठाई और कपड़े बांटते हैं। यह भी कोशिश होती है कि परिवार के बुजुर्गों का साथ रहे।
मीनाक्षी त्रिपाठी, एमएससी जूलॉजी (उप निरीक्षक कपूर त्रिपाठी की पत्नी)
बच्चों की खुशी से मिलती है खुशी
पारम्परिक रूप से त्योहार मनाते हैं। पति के साथ मिलकर घर की सफाई कर लेते हैं और फिर धनतेरस को जरूरत का कुछ सामान खरीद लेते हैं। पति के साथ यह हमारी दूसरी दीपावली है। कुछ मिठाई और पकवान घर पर ही बना लेते हैं। घर को रोशनी से सजाते हैं और फिर दीपावली के दिन मोहल्ले के बच्चों के साथ पटाखे फोड़ते हैं। एक साथ पूजन करते हुए बड़ों का अशीर्वाद लेते हैं। बच्चों को मिठाई और पटाखे बांटते हैं। बच्चों की खुशी हमें भी खुशी मिलती है।
प्रियंका मिश्रा, स्नातक (आरक्षक विपेन्द्र मिश्रा की पत्नी)
Published on:
08 Nov 2018 12:17 pm
