जीत का पंजा मारने को छठवीं बार मैदान में राजेंद्र, नागेंद्र और जुगुल
सतना। विधानसभा चुनाव लड़ने में मनकहरी के रामलखन सिंह पटेल जिले के सबसे बड़े लड़इया हैं। वे इस चुनाव में लगातार 7वीं बार रामपुर बाघेलान से चुनाव मैदान में हैं। रामलखन ने पहली बार 1990 में रामपुर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। तब से आज तक एक भी विधानसभा चुनाव मिस नहीं किया। इस चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर मैदान में उतरे हैं। हालांकि चुनाव जीतने के मामले में उनका रेकॉर्ड ठीक नहीं।
वे दो बार ही विधायक बनकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर पाए हैं। विस चुनाव लड़ने में नागेंद्र सिंह नागौद, राजेंद्र सिंह अमरपाटन तथा जुगुल किशोर बागरी रैगांव दूसरे नंबर पर हैं। तीनों अब तक पांच चुनाव लड़ चुके हैं। छठवीं बार रण जीतने मैदान में हैं। एक अजब संयोग यह भी है कि उक्त तीनों प्रत्याशी चार बार विधायक रह चुके हैं। जीत का पंजा मारने छठवीं बार जोर आजमाइश जारी है।
राजेंद्र-नागेंद्र सबसे ज्यादा अनुभवी
चुनावी अनुभव की बात की जाए तो जिले की सातों विधानसभा सीट में से नागौद से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे नागेंद्र सिंह और अमरपाटन सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे डॉ. राजेंद्र कुमार सबसे अनुभवी हैं। दोनों ने ही अपना पहला चुनाव 19980 में लड़ा था और जीत दर्ज की थी। जबकि जुगुल किशोर बागरी ने पहला विस चुनाव 1990 में रैगांव की आरक्षित सीट से लड़ा था। इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
अजय सिंह छह बार के विधायक
सीधी जिले की चार सीटों पर भाजपा व कांग्रेस से जो प्रत्याशी उतारे गए हैं, उनमें अजय सिंह को सबसे पुराना योद्धा कह सकते हैं। दूसरे पायदान पर सीधी प्रत्याशी केदारनाथ शुक्ला का नाम आता है, वे लड़े तो कई बार लेकिन जीत उनके हिस्से में कुछ ही चुनाव में आई। तत्कालीन गोपद बनास सीट से केदारनाथ शुक्ला, कमलेश्वर द्विवेदी व कृष्णकुमार सिंह भंवर अक्सर एक दूसरे के आमने-सामने होते रहे हैं। इस बार भी एक-दूसरे को टक्कर देते नजर आ रहे हैं।
सतना में ये पहली बार मैदान में
इस चुनाव में भाजपा एवं कांग्रेस ने कुछ प्रत्याशियों को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा है। इनमें रैगांव से कांग्रेस उम्मीदवार कल्पना वर्मा, रामपुर से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे विक्रम सिंह, इसी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रामशंकर पयासी, सतना से सिद्धार्थ कुशवाहा तथा मैहर से श्रीकांत चतुर्वेदी हैं।
हार का रेकॉर्ड रामखेलावन के नाम
विधानसभा चुनाव 2018 में जो प्रत्याशी मैदान में हैं उनमें से सर्वाधिक बार चुनाव हारने का रेकॉर्ड अमरपाटन विधानसभा से 6वीं बार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे रामखेलावन पटेल के नाम है। ये अब तक पांच विस चुनाव लड़ चुके हैं। चार बार इन्हें मुंह की खानी पड़ी है। रामखेलावन ने पहला चुनाव 1990 में लड़ा था।
अब तक क्या
- प्रत्याशी पार्टी चुनाव जीते लडे़
- रामलखन पटेल बसपा 6 2
- नागेन्द्र सिंह भाजपा 5 4
- राजेन्द्र सिंह कांग्रेस 5 4
- जुगुल किशोर भाजपा 5 4
- रामखेलावन पटेल भाजपा 5 1
- शंकरलाल तिवारी भाजपा 4 3
- यादवेन्द्र सिंह कांग्रेस 4 1
- नारायण त्रिपाठी भाजपा 3 1
- ऊषा चौधरी बसपा 3 1