सतना

रेड जोन में हैं एमपी के 14 जिले, सूची से हटेंगे लाखों हितग्राहियों के नाम !

MP News: खाद्य संचालनालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भर में 6 लाख रुपए से अधिक वार्षिक आय वाले 1.57 लाख हितग्राही सरकारी खाद्यान्न का लाभ ले रहे थे...

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Feb 17, 2026
Public Distribution System Scheme (Photo Source - Patrika)

MP News:मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के अंतर्गत अपात्र हितग्राहियों को चिन्हित किए जाने के बाद भी उन पर कार्रवाई की रफ्तार धीमी बनी हुई है। खाद्य विभाग की समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि सतना सहित प्रदेश के 14 जिले ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में अपात्र हितग्राहियों के नाम अब तक सूची से नहीं हटाए गए हैं। ऐसे 14 जिलों को रेड जोन में रखा गया है।

खाद्य संचालनालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भर में 6 लाख रुपए से अधिक वार्षिक आय वाले 1.57 लाख हितग्राही सरकारी खाद्यान्न का लाभ ले रहे थे। इनमें से 1.41 लाख के नाम हटाए जा चुके हैं। वहीं 18726 कंपनी संचालकों में से 14791 पर कार्रवाई हुई है, जबकि 25 लाख रुपए से अधिक कारोबार करने वाले 1381 हितग्राहियों में से 1190 के नाम हटाए गए हैं और 191 मामलों में कार्रवाई बाकी है।

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सतना के सभी ब्लॉकों में अपात्रों के नाम हटाने की कार्रवाई चल रही है। उपार्जन कार्य के कारण थोड़ी देरी हुई, प्रयास है कि जल्द से जल्द अपात्रों पर एक्शन की कार्रवाई की जाएगी। स्यक जैन, डीएसओ सतना

यह है रेड जोन वाले जिले

सतना समेत प्रदेश के 14 जिले रेड जोन के दायरे में है, जहां पर 100 से अधिक अपात्र हितग्राहियों के नाम हटाना बाकी है। ग्वालियर में 5485, सतना में 2660, मुरैना में 1932, सिंगरौली में 1771, रीवा में 1342, सीधी में 950,राजगढ़ में 793, जबलपुर में 785, मऊगंज में 593, दतिया में 422, सागर में 367,विदिशा में 327, रतलाम में 203 और धार में 202 अपात्रों के नाम हटाने की कार्रवाई बाकी है। प्रदेश में सबसे अधिक संख्या वाले यह जिले चिन्हित है।

सतना की ऐसी स्थिति

सतना जिले में ही 6 लाख रुपए से अधिक वार्षिक आय वाले 3886 अपात्र हितग्राही सरकारी राशन का लाभ ले रहे थे। इनमें से अब तक 1577 हितग्राहियों पर कार्रवाई कर नाम हटाए गए हैं, जबकि 2309 मामलों में कार्रवाई लंबित है। इसी प्रकार 25 लाख रुपए से अधिक कारोबार करने वाले 32 हितग्राहियों में से केवल 18 पर कार्रवाई हो सकी है और 14 मामलों में अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कंपनी संचालक के रूप में दर्ज 463 हितग्राहियों में भी केवल 108 के नाम हटाए गए हैं, जबकि 355 पर कार्रवाई शेष है।

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Published on:
17 Feb 2026 04:11 pm
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