सतना

जमीन हड़पने भतीजे ने निगम के अमले से मिलकर चाचा को मृत घोषित कराया

जमीन हड़पने के लिए भतीजे ने नगर निगम और पटवारी से मिलकर अपने जिंदा चाचा को मृत घोषित करवा दिया। बाद में पटवारी ने अपनी पत्नी के नाम पर वही जमीन खरीद ली।

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Jun 09, 2026
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सतना। शहर में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें चाचा की संपत्ति हड़पने के लिए सगे भतीजे ने अपने जिंदा चाचा को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित करवा दिया। हद तो यह हो गई कि इस साजिश में पड़ोसियों और अन्य परिवारजनों ने भी सहायता की और स्थानीय पार्षद ने भी जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। यह पूरी साजिश रेलवे से सेवानिवृत्त हुए ईश्वरदीन सोनी के नाम की जमीन हड़पने के लिए की गई। साजिश इतनी भर नहीं रही, ईश्वरदीन की अपनी औलाद होने के बाद भी उसे औलाद विहीन बता दिया गया। बाद में पटवारी की मिलीभगत से फर्जी सजरा तैयार करवाकर इस जमीन का कर लिया गया और उसी पटवारी ने अपनी पत्नी के नाम पर जमीन भी खरीद ली। जबकि हकीकत यह है कि ईश्वरदीन जीवित है और उनके तीन बेटे हैं।

इस तरह शुरू हुई साजिश

जानकारी के अनुसार ईश्वरदीन सोनी रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और जीवित है। इनकी जमीन कोठी में है। इस जमीन को हड़पने के लिए ईश्वरदीन के भतीजे रामकरण सोनी ने जून 2024 में नगर निगम में मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें लंबी बीमारी के कारण चाचा ईश्वरदीन की मौत होना बताया।

निगम से शुरू हुआ खेल

मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन पर स्वास्थ्य अधिकारी एवं रजिस्ट्रार जन्म मृत्यु ने सफाई दरोगा को मृत्यु का सत्यापन करने का जिम्मा दिया। सफाई दरोगा ने पड़ोसी सुरेश, छंगेलाल, रामविकास, तेजभान और परिजन सीताशरण सोनी के गवाही पर ईश्वरदीन की मृत्यु प्रमाणित की। इसके आधार पर नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी ने ईश्वरदीन सोनी की मृत्यु सत्यापित होने के बाद अनुपलब्धता प्रमाण पत्र तैयार करने के निर्देश दिए। निगम के अनुपलब्धता प्रमाण पत्र के आधार पर तहसीलदार सतना ने मृत्यु पंजीयन आदेश जारी किया।

पार्षद ने भी मृत्यु प्रमाणित की

दूसरी ओर वार्ड पार्षद सौरव मलिक गोल्डी ने भी ईश्वरदीन की मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इन्होंने बताया कि 18 जुलाई 2015 को ईश्वरदीन सोनी पिता चंदूलाल सोनी निवासी वार्ड 43 की मृत्यु हो गई है। प्रमाण पत्र में तेजभान सोनी, राकेश सोनी के भी बतौर गवाह हस्ताक्षर हैं। इसके अलावा पार्षद ने जो पंचनामा बनाया उसमें छंगेलाल सोंधिया, राकेश सोनी, रामविलास सोनी, तेजभान सोनी और सीताशरण सोनी के हस्ताक्षर थे।

असली खेल कोठी में खेला गया

इस तरह मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के बाद असली खेल कोठी में खेला गया। ईश्वरदीन की कोठी में जमीन थी। इस जमीन को हड़पने के लिए रामकरण सोनी ने स्थानीय पटवारी को भी शामिल किया गया। स्थानीय पटवारी प्रवीण सिंह ने अपनी जो रिपोर्ट तैयार की उसमें ईश्वरदीन को मृतक बताया और उसे लावल्द बताते हुए जो सजरा प्रस्तुत किया उसमें ईश्वरदीन के भतीजों को बारिश के तौर पर दिखाया। इस आधार पर ईश्वरदीन की जमीन उनके भतीजों रामकरण और कतहुरा के नाम पर हो गई। बाद में यह जमीन पटवारी ने अपनी पत्नी माधवी सिंह के नाम पर खरीद ली, और जमीन का एक हिस्सा जमीन कारोबारी अंबिकेश पाठक ने खरीदा। ये दोनों जमीन की सौदेबाजी के लिए साजिश में शामिल रहे। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि ईश्वरदीन जीवित है और उनके तीन बेटे हैं।

कलेक्टर ने लगाई अधिकारियों की क्लास

इस मामले में कलेक्टर ने समय सीमा बैठक में अधिकारियों की क्लास लगा ली। फार्मर रजिस्ट्री की समीक्षा के दौरान सतना जिले की रैंक आखिरी पायदान होने पर कलेक्टर नाराज थे। कोठी तहसील की समीक्षा के दौरान उन्होंने एसडीएम से कहा कि आपका पटवारी फार्मर रजिस्ट्री नहीं करेगा, लेकिन फर्जीवाड़ा करके दूसरे की जमीन अपने पत्नी के नाम करवा लेगा। इसके बाद उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं कराने पर एसडीएम की जमकर क्लास लगाई। साथ ही स्पष्ट कहा कि पटवारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो जानी चाहिए।

"यह गंभीर मामला है। प्राथमिक रूप से पटवारी दोषी पाया गया है। उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।" -डॉ सतीश कुमार एस, कलेक्टर

Updated on:
09 Jun 2026 09:02 am
Published on:
09 Jun 2026 08:57 am