सतना

राम वन गमन पथ की शोध रिपोर्ट सतना में अटकी, मुख्यमंत्री के समक्ष होनी है प्रस्तुति

श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास ने प्रभु श्रीराम के वनवास काल के रास्तों को प्रमाणिक करने शोध करवाया है। इसका सत्यापन सतना जिले में अटका हुआ है। यह तब है जब इसे सीएम के सामने रखा जाना है।
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Jul 09, 2026
RamvanGaman

सतना। भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े सतना जिले के स्थलों के प्रमाणिकरण की प्रक्रिया जिला प्रशासन की सुस्ती के कारण अटक गई है। श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा तैयार कराई गई शोध रिपोर्ट का परीक्षण एवं पुष्टि प्रतिवेदन अभी तक सतना प्रशासन ने नहीं भेजा है, जबकि इसे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रस्तावित न्यास की बैठक में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाना है। देरी को देखते हुए न्यास के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कलेक्टर सतना को स्मरण पत्र जारी कर शीघ्र प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

न्यास ने कराया विस्तृत अध्ययन

न्यास के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्ष के वनवास में लगभग 11 वर्ष चित्रकूट क्षेत्र में व्यतीत हुए थे। इन्हीं स्थलों की ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक प्रमाणिकता स्थापित करने के लिए शोधार्थी डॉ. राम अवतार शर्मा से विस्तृत अध्ययन कराया गया। शोध पूरा होने के बाद संबंधित स्थलों का परीक्षण एवं पुष्टि कराने के लिए रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी गई।

न्यास ने जताई आपत्ति

न्यास ने कलेक्टर से कहा है कि शोध में वर्णित प्रत्येक स्थल का परीक्षण पुरातात्विक साक्ष्य, पौराणिक उल्लेख, लोक परंपरा, जनश्रुतियों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कर प्रतिवेदन भेजा जाए। इसके लिए अप्रैल और मई में भी पत्र भेजे गए थे, लेकिन अब तक पुष्टि रिपोर्ट नहीं मिली। इसी कारण मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाने वाले अंतिम शोध प्रतिवेदन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

ये स्थल शोध में प्रमाणित बताए गए

शोध प्रतिवेदन में सतना जिले के जिन स्थलों को श्रीराम वन गमन से संबंधित प्रमाणित स्थलों के रूप में शामिल किया गया है, उनमें राघव प्रयाग घाट, जानकी घाट, हनुमान धारा, स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी, अत्रि-अनसूया आश्रम, दंडकवन सीमा (सभी चित्रकूट क्षेत्र), शरभंग मुनि आश्रम, अश्वमुनि आश्रम, सुतीक्ष्ण मुनि आश्रम, सिद्धा पहाड़, जैमिनी आश्रम (जमुनिहाई), रामशैल (रक्सेलवा) तथा सीता रसोई (रक्सेलवा) शामिल हैं।

इन स्थलों का भी किया गया उल्लेख

शोध में कुछ ऐसे स्थलों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें शोधित लेकिन अभी अप्रमाणित माना गया है। इनमें शिव बाबा (लालपुर), सती माता मंदिर (गौरइया), बलचौना और सग्गर बाबा शामिल हैं।

इन आधारों पर तैयार हुई रिपोर्ट

शोध में स्थलों की प्रमाणिकता का आकलन लोकमान्यता, पुरातात्विक साक्ष्य, धार्मिक ग्रंथों के उल्लेख, परंपराओं, मेलों, नदियों तथा स्थानीय जनश्रुतियों के आधार पर किया गया है। इसके अलावा प्रत्येक स्थल की भौगोलिक स्थिति, सांस्कृतिक महत्व, पर्यटन संभावनाएं, वन क्षेत्र, आवागमन, आवास, शिक्षा, व्यापार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तृत विवरण शामिल किया गया है।

Updated on:
09 Jul 2026 09:51 am
Published on:
09 Jul 2026 09:51 am