मेडिकल कॉलेज की मदद से रिकॉर्ड कीपिंग और मरीज रजिस्ट्रेशन होगा डिजिटलाइज्ड, बनेगा गायनी आईसीयू
सतना। मेडिकल कॉलेज का खुद का अस्पताल नहीं होने से मौजूदा दौर में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक भी जिला अस्पताल में ही सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का लाभ जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को मिल सके साथ ही अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर हों, इसे लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और जिला अस्पताल प्रबंधन की साझा बैठक हुई। जिसमें अस्पताल की चिकित्सा सेवा सुदृढ़ करने व्यवस्थागत 7 बिन्दु के निर्णय लिए गए हैं। इसमें सभी की जिम्मेदारी तय की गई है। इस निर्णय में जहां मेडिसिन की चिकित्सा सेवाएं और बेहतर होंगी तो स्त्री रोग विभाग को एक आईसीयू मिल सकेगा। वेन्टीलेटर सुविधा भी मरीजों की पहुंच में होगी। सबसे नई बात यह होगी कि जिला अस्पताल की पंजीयन व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन होगा। जिसे डिजिटलाइज्ड किया जाकर चिकित्सा परामर्श और रिकार्ड कीपिंग व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।
1. मेडिसिन व्यवस्था
जिला अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ की कमी है। ऐसे में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर तय किया गया कि डॉक्टर एलपी सिंह की ओ.पी.डी. सोमवार एवं बुधवार को है, इस दिन के सभी मरीज वार्ड नम्बर 7 में भर्ती किए जाएंगे। डॉक्टर मनोज प्रजापति की ओ.पी.डी बुधवार एवं शनिवार है, इस दिन के सभी मेडिसिन के मरीज वार्ड नम्बर 6 में भर्ती किए जाएंगे। वार्ड नम्बर 10 में जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञों के द्वारा मरीज भर्ती किए जाएंगे। संबंधित चिकित्सकों के वार्ड में भर्ती मरीजों की समस्त जिम्मेदारियां संबंधित चिकित्सकों की होगी। आईसीयू में उपलब्ध कुल बेड्स में से क्रमश: एक तिहाई - एक तिहाई बेड के मरीज डॉ. एल.पी. सिंह, डॉ. मनोज प्रजापति तथा जिला चिकित्सालय के मेडिसिन विशेषज्ञ द्वारा देखे जाएंगे एवं भर्ती मरीज के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सकों की होगी। इस निर्णय के क्रियान्वयन का जिम्मा आरएमओ और मेडिसिन विशेषज्ञों का होगा।
2. शायं कालीन ओपीडी
जिला अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी के कारण सिविल सर्जन ने इवनिंग ओ.पी.डी. के संचालन में कठिनाई बताई। जिस पर मेडिकल कॉलेज के डीन ने तय किया कि सप्ताह के 4 दिन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के ओपीडी दिवस में इवनिंग ओपीडी संबंधित सीनियर रेसीडेंट मेडिसिन देखेंगे। इसके क्रियान्वयन का जिम्मा मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रभारी का होगा।
3. वातानुकूलन
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने बताया कि सर्जरी ओ.टी., माइक्रोबायोलॉजी स्टोर एवं अन्य ओ.पी.डी. वार्ड कक्षों में एसी सही काम नहीं कर रहे हैं। जिस पर सिविल सर्जन ने इन्हें एक सप्ताह में सही कराने की बात कही। इसके क्रियान्वयन का जिम्मा जिला अस्पताल के आरएमओ का होगा।
4. गायनी आईसीयू स्थापना
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में वेन्टीलेटर व्यवस्था युक्त आईसीयू संचालन का निर्णय लिया गया। इसके लिए वेन्टीलेटर एवं अन्य आवश्यक उपकरण मेडिकल कॉलेज उपलब्ध करवाएगा। इन उपकरणों को जिला अस्पताल के स्टोर के जरिए जिला अस्पताल को स्थानांतरित किए जाएगा। जिनका उपयोग स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आईसीयू स्थापित करने में किया जाएगा। इसके क्रियान्वयन का जिम्मा आरएमओ एवं जिला अस्पताल के स्टोर प्रभारी का होगा। अभी तक सतना में किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की आईसीयू नहीं है।
5. वेंटीलेटर का प्रशिक्षण
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के चिकित्सा शिक्षकों ने आईसीयू के संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण की मांग की। जिस पर मेडिकल कॉलेज के डीन ने मेडिसिन, एनेस्थीसिया और सर्जरी के चिकित्सा शिक्षकों को निर्देशित किया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के चिकित्सकों को वेन्टीलेटर प्रशिक्षण देने के साथ इसका हैण्ड्स ऑन प्रशिक्षण भी दिया जाए। डॉ निशात फातिमा प्रशिक्षण की तिथि एवं समय सारणी स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग सहित संबंधित विभागाध्यक्षों से समन्वय से निर्धारित करेंगी।
6. ओपीडी में क्यूआर कोड रजिस्ट्रेशन
ओपीडी में रजिस्ट्रेशन के लिए क्यू आर कोड व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए आभा कार्ड या आभा एप द्वारा क्यूआर कोड को स्कैन करने की व्यवस्था सहित आमजन को इसकी जानकारी देने फ्लैक्स लगाए जाएंगे। इसके अलावा क्यूआर कोड रजिस्ट्रेशन के लिए एक ओपीडी काउंटर आरक्षित किया जाएगा। सहायता के लिए कर्मचारी भी रखे जाएंगे जो आमजनों की इस व्यवस्था में सहायता करेंगे। इसके क्रियान्वयन का जिम्मा जिला अस्पताल के आरएमओ का होगा।
7. लागू होगा डीएचआईएस
जिला अस्पताल में डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना (डीएचआईएस) लागू करने का सुझाव मेडिकल कॉलेज के डीन ने दिया। इस सेवा के तहत जिला अस्पताल का रजिस्ट्रेशन होने के बाद मरीजों के रिकार्डों का डिजिटल संधारण होने के साथ ही डिजिटल भुगतान की भी सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही अपाइंटमेंट, टेली मेडिसिन जैसी सुविधाएं भी आसान हो जाएंगी। इसे क्रियान्वित करने का जिम्मा आरएमओ सहित आरकेएस के प्रभारी लिपिक का होगा।
बड़ी पहल है ये : डॉ गौतम
इस मामले में सेवानिवृत्त सीएमएचओ डॉ डीएन गौतम ने कहा कि जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा ओपीडी मेडिसिन की ही होती है। इस नई व्यवस्था से मेडिसिन के मरीजों का इलाज काफी बेहतर हो जाएगा। वेंटीलेटर संचालन जिला अस्पताल की बड़ी कमजोरी थी। कोरोना काल में वेंटीेलेटर होने के बाद भी संचालन की जानकारी नहीं होने से इनकी उपयोगिता वैसी नहीं हो सकी जैसी चाहिए थी। लेकिन अब यह कमी दूर होगी। स्त्री रोग विभाग का आईसीयू भी बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। जहां तक क्यू आर कोड रजिस्ट्रेशन और डीएचआईएस को लागू करने की बात है तो स्वास्थ्य सेवाएं के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। इससे मरीज की फाइल संधारण सहित अन्य व्यवस्थां काफी सहज हो जाएंगी।