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माधवगढ़ किला: हेरिटेज होटल तो नहीं बनाया, लीज के बाहर कब्जे के लिए निर्माण

लीज के 5 साल बाद भी माधवगढ़ किला नहीं बन पाया हैरिटेज होटल

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सतना। शहर से लगे हुए माधवगढ़ के ऐतिहासिक किले को हेरिटेज होटल में तब्दील कर पर्यटन गतिविधियां संचालित करने म.प्र. शासन पर्यटन विभाग ने इसका कब्जा निजी निवेशक को 2 सितंबर 2021 को सौंप दिया था। मे. ग्रांड विंध्या हेरिटेज फोर्ट प्रा. लि. को कब्जा पाने के बाद 4 साल में प्रोजेक्ट लागत का 50 फीसदी काम पूरा कर लेना था। लेकिन निजी निवेशक ने 50 फीसदी कार्य को दूर अभी तक काम ही प्रारंभ नहीं किया है। चौंकाने वाला मामला यह सामने आया है कि 25 लाख रुपए की लीज पर निजी निवेशक को किला और उससे लगी जमीन देने के बाद अब पर्यटन विभाग ने लीज भूमि से बाहर जाकर यहां पर 1.30 करोड़ रुपए के पुल कम पहुंच मार्ग का निर्माण शुरू कर दिया है। जिस जगह पर यह निर्माण शुरू हुआ है वह म.प्र. शासन राजस्व विभाग की भूमि है जो नाला और गोठान के रूप में दर्ज है। इस जगह निर्माण की कोई अनुमति भी नहीं ली गई है। इसे लेकर अब स्थानीय जनों ने निर्माण कार्य पर रोक लगाए जाने प्रशासन को आवेदन दिया है।

कब्जा लिया और चुप्पी साध कर बैठ गए

पर्यटन विकास निगम ने माधवगढ़ किले सहित इससे लगी जमीन को हेरिटेज होटल में तब्दील करने मे. अष्ट विनायक सिविकॉन प्रा. लि. सतना को वर्ष 2020 में 25,01,101 रुपए में 99 साल के लिये लीज पर दे दिया। इसके साथ ही निवेशक का सालाना लीज रेंट 25012 रुपए तय किया गया। लीज की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मे. ग्रांड विंध्या हेरिटेज फोर्ट प्रा. लि. 2 सितंबर 2021 को किले सहित जमीन का कब्जा सौंप दिया गया। यह कब्जा निवेशक कंपनी के डायरेक्टर शिवमूरत कुशवाहा ने पर्यटन विकास निगम के राजस्व सलाहकार नरेन्द्र श्रीवास्तव से लिया।

यह थी प्रोजेक्ट स्थापित करने की शर्त

माधवगढ़ किले को हेरिटेज होटल में तैयार करने के प्रोजेक्ट की शर्तें तय की गई थी। जिसके अनुसार कब्जा पाने के 9 माह के अंदर प्रोजेक्ट की कुल लागत का 5 फीसदी खर्च करते हुए साइट का विकास करना था और संबंधित अनुमतियां लेनी थी। एक साल में 10 फीसदी लागत के साथ काम प्रारंभ कर देना था। 4 साल में प्रोजेक्ट कास्ट की 50 फीसदी राशि से निर्माण कार्य पूरा कर लेना था। 4 साल 6 माह में 15 फीसदी राशि से उपकरण और सिस्टम स्थापित कर लेना है। 4 साल 9 माह में 15 फीसदी राशि से साज सज्जा का काम पूरा करना है। 5 वर्ष में ट्रायल रन प्रारंभ करना था।

यह है स्थिति, हैरिटेज होटल का काम शून्य

निजी निवेशक कंपनी के डायरेक्टर शिवमूरत कुशवाहा को कब्जा हासिल किए हुए 4 साल हो चुके हैं। लेकिन अभी तक प्रोजेक्ट के अनुसार कंपनी ने कोई भी काम प्रारंभ नहीं किया है। हद तो यह है इस मामले में न पर्यटन विकास निगम को कोई फिक्र है न ही जिला प्रशासन ने कोई सुध ली।

अवैध निर्माण जरूर शुरू कर दिया

इधर एमपीटी ने माधवगढ़ की नाले की आराजी क्रमांक 539/1रकवा 0.085 हेक्टेयर और हाटबाजार गोठान की आराजी क्रमांक 537/1/क/1रकवा 1.814 हेक्टेयर के अंश भाग पर पुल सहित पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। जबकि ये आराजियामाधवगढ़ किले का हिस्सा नहीं है। इतना ही नहीं इस निर्माण कार्य के लिए राजस्व विभाग से किसी प्रकार की अनुमति भी नहीं ली गई है। इसे लेकर आम जनता की ओर से आवेदन तहसीलदार को दिया गया है। जिसमें कहा गया है कि इस निर्माण से नाला संकरा हो जाएगा जिससे जल भराव होगा और हाट बाजार की गतिविधियां प्रभावित होंगी।

डायरेक्टर ने काट दिया फोन

इस किले और जमीन की लीज मेसर्स अष्ट विनायक सिविकॉन प्रा. लि. सतना को दी गई थी, जिसकी एसपीवी कंपनी ग्रांड विन्ध्या हेरिटेज फोर्ट प्रा.लि. यहां पर हेरिटेज होटल बनाने का कार्य करेगी। इसके डायरेक्टर शेषमणि कुशवाहा और शिवमूरत जगतदेव कुशवाहा हैं। शेषमणि ने बताया कि 2027 तक इसका कार्य पूरा हो सकेगा। लेकिन अभी तक कोई कार्य नहीं होने पर कहा कि तमाम अनुमतियां और डिजाइन में वक्त लगा है। तय टाइम लाइन पर उन्होंने कोई बात नहीं की। जब उनसे यह सवाल किया गया कि लीज मिलने के बाद एमपीटी यहां काम क्यों करवा रहा है तो उन्होंने फोन काट दिया।

निविदा में भी हुआ है खेल

एमपीटी ने इस किले को हेरिटेज होटल में तब्दील करने के लिए पहली निविदा 12 मई 2016 में निकाली थी। तब दो निविदाएं मिली थी जिसकी उच्चतम बोली 3.90 करोड़ रुपए मिली थी। निविदाकार ने प्रीमियम जमा नहीं किया तो निविदा निरस्त हो गई। इसके बाद 13 अप्रैल 2017 को निविदा निकाली गई। लेकिन इसमें किले के साथ भूमि नहीं होने से इसे खारिज कर दिया गया। फिर 17 मार्च 2020 को निविदा निकाली गई। एकल निविदा में 25,01,101 रुपए का ऑफर मूल्य एमपीटी (पर्यटन विकास निगम) ने 16 सितंबर 2020 को स्वीकृत कर दिया। इसका अवार्ड 2 नवंबर 2020 को जारी हुआ। इसे लेकर तमाम सवाल भी खड़े हुए थे कि जब अकेले किले की निविदा थी तो बोली 3.90 करोड़ में गई और बाद में जमीन के साथ निविदा निकली को 25 लाख में कैसे स्वीकृत हो गई? इतना ही नहीं जिस वक्त इसकी लीज तय की गई उस वक्त अकेले जमीन का मूल्य 31 करोड़ रुपए था। लेकिन सब कुछ पता होने के बाद भी शासन स्तर से इस पर चुप्पी साध ली गई। जानकारों का कहना है कि किसी राजनीतिक दबाव में यह खेल किया गया है।

"माधवगढ़ किले में अब तक कार्य क्यों नहीं शुरू हो सका है अभी इसकी जानकारी नहीं है। अगले दिन दस्तावेज चेक करके ही कुछ बता पाएंगे।" - राजेश गुप्ता, उप सचिव पर्यटन

" एक शिकायत मिली है। शिकायत का परीक्षण करवाया जाएगा। जो भी रिपोर्ट आएगी उसका प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाएगा।" - सौरभ मिश्रा, तहसीलदार