
सतना। करीब तीन दशक पुराने बाणसागर परियोजना के मुआवजा घोटाले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तहसीलदार पद से रिटायर हुए तत्कालीन आरआईमणिराज सिंह, तत्कालीन भू-अर्जन कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर त्रिवेदी और चार किसानों कौशल पटेल, सुरेश पटेल, ओमप्रकाश पटेल और जयप्रकाश पटेल को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर अर्थदंड भी लगाया गया है।
धान के खेत में ‘बना’ दिया आम-नाशपाती का बगीचा
अभियोजन के मुताबिक, वर्ष 1997 में भूमि अधिग्रहण के दौरान गंगानगर क्षेत्र के खसरों में वास्तविकता में धान की फसल थी, लेकिन रिकॉर्ड में 2338 फलदार पेड़ (आम, नाशपाती, अनार आदि) दर्ज कर दिए गए। इसी आधार पर करीब 35.49 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा स्वीकृत कर भुगतान कराया गया।
जांच में खुली परतें
मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस विभाग की विशेष इकाई ईओडब्लू ( आर्थिक अपराध शाखा) ने जांच की। ईओडब्लू रीवा इकाई की जांच में मौके पर बगीचा न मिलने और कागजों में पेड़ों की संख्या बढ़ाकर दर्शाने का खुलासा हुआ। इसमें राजस्व अमले और लाभार्थी किसानों की मिलीभगत सामने आई।
मास्टर माइंड मणिराज ने इस तरह किया खेल
दरअसल बाणसागर परियोजना में गंगासागर गांव की काफी जमीन डूब में आई थी। इसमें आराजी क्रमांक 440/1रकवा 2.35 एकड़ तथा आराजी क्रमांक 440/2रकवा 2.35 एकड़ जमीन भी डूब में आ रही थी। इनके भूमि स्वामी रामेश्वर पिता चुनकावन और रामसजीवन पिता रामेश्वर थे। इस आधार पर मुआवजा की गणना कर चेक के माध्यम से भूमि स्वामियों को 3 जून 1997 को मुआवजा दे दिया गया। इस वक्त इन आराजियों में अमरूद के 7 पेड़ और मोसम्मी को 2 पेड़ भी थे। तत्कालीन राजस्व निरीक्षण मणिराज ने यहीं से खेल शुरू किया। मणिराज ने इन पेड़ों का कब्जेदार भूमि स्वामी रामेश्वर और रामसजीवन को न बनाकर उनके स्थान पर शिवधारी पटेल, कौशल पटेल, सुरेश पटेल को दिखाया और इन्हें 14514 रुपए मुआवजा दे दिया। मणिराज का खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। गंगासागर में शिवधारी पटेल के नाम पर आराजी क्रमांक 438/1रकवा 0.87 एकड़ तथा आराजी क्रमांक 439/1करकवा 0.82 एकड़ जमीन थी। वर्ष 1993-98 पंचशाला खसरा में आराजी नंबर 438/1 के 0.82 एकड़ हिस्से में धान बोना दर्ज था तथा 0.05 एकड़ में मकान बना होना बताया गया था। इसी तरह से आराजी क्रमांक 439/1क के 0.77 एकड़ में धान बोना तथा 0.05 एकड़ में मकान बना होना दर्ज था। लेकिन मणिराज ने इन जमीनों पर 2338 पेड़ का बगीचा दिखा कर शिवधारी एवं उनके बेटों कौशल, सुरेश, जयप्रकाश, ओमप्रकाश तथा बाबूलाल पिता रामसुन्दर को अलग-अलग चेक के माध्यम से 35.49 लाख का मुआवजा दे दिया। हद तो यह भी रही जितना जमीन का रकवा था उतने में इतने ज्यादा पेड़ लगना असंभव है फिर भी मणिराज ने यह कारनामा कर दिखाया था। जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अदालत ने इसे सरकारी धन की हेराफेरी मानते हुए दोष सिद्ध किया।
दस्तावेज गायब कर बच गए प्रशासक
इस मामले में बाणसागर परियोजना के तत्कालीन प्रशासन अनूप सिंह भी दोषी पाए गए थे। लेकिन भ्रष्टाचार साबित करने वाले दस्तावेज गायब करवा दिए गए। सतना भू-अर्जन कार्यालय के लिपिक संतोष श्रीवास्तव ने लिखित में बताया कि दस्तावेज नहीं है। लिहाजा विवेचना के दौरान साक्ष्य के अभाव में आरोपी से साक्षी बना लिया गया। उधर ट्रायल के दौरान तत्कालीन भू-अर्जन अधिकारी केके शर्मा और फर्जी-भूस्वामी शिवधारी और बाबूलाल की मौत हो गई।
इन धाराओं में मिली सजा
अदालत ने तहसीलदार पद से रिटायर हुए तत्कालीन आरईमणिराज पटेल निवासी नई बस्ती सतना और क्लर्क हरीश कुमार त्रिवेदी निवासी बजरंग नगर रीवा को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-B तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(d) व 13(2) के तहत दोषी ठहराया। इन दोनों को 5-5 साल की सजा सहित 44500 रुपए का जुर्माना भी लगाया। इसी तरह से शिवधारी के चारों बेटों कौशल, सुरेश, ओमप्रकाश और जयप्रकाश को आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120-B का दोषी पाए जाने पर 5-5 साल के कारावास और 19500 रुपए के जुर्माने से दंडित किया गया। सभी को जेल भेज दिया गया है।
चुनाव लड़ने उतरे थे मणिराज
सेवानिवृत्ति के बाद रामपुर बाघेलान से वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, पर उन्हें पराजय मिली। यह चुनाव उन्होंने बसपा की टिकट से लड़ा था।
Published on:
03 Mar 2026 01:42 pm
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