
MP News, Bansagar project fake tree compensation scam(photo:AI)
MP News: कागजों में आम-अमरूद के पेड़ दर्ज कर लाखों रुपए मुआवजा देने के मामले में विशेष न्यायालय ने तत्कालीन राजस्व निरीक्षक, क्लर्क और चार किसानों को 5-5 साल के कारावास की सजा सुनाई है। ट्रायल के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। मामला एक मार्च 1997 का है।
तब बाणसागर परियोजना (Bansagar Project) यूनिट- 8 द्वारा अधिग्रहित भूमि अवॉर्ड में भ्रष्टाचार हुआ था। केस वर्ष 2015 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की रीवा इकाई ने दर्ज किया था। एडीपीओ फखरुद्दीन के अनुसार अमरपाटन तहसील के गंगासागर के भू स्वामी रामेश्वर पिता चुनकावन, रामसजीवन पिता रामेश्वर के नाम रकबा 0.955 हेक्टेयर एवं 0.955 हेक्टेयर दर्ज था।
- तत्कालीन राजस्व निरीक्षक मणिराज: वृक्षों की गणना कर पंजी में कर्जेदार का नाम दर्ज किया।
- तत्कालीन भू-अर्जन अधिकारी केके शर्मा: मुआवजा तय किया।
- तत्कालीन प्रशासक बाणसागर परियोजना अनूप सिंह: मुआवजा अनुमोदन किया।
- परियोजना क्लर्क हरीश कुमार त्रिवेदी: मुआवजा देने में संलिप्तता पाई गई।
गंगासागर गांव में शिवधारी की दोनों जमीन पर धान फसल व मकान होने के बाद भी 2338 पेड़ दर्ज कर दिए गए। इनमें ज्यादातर फलों के वृक्ष थे। तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ने फर्जी (fake tree compensation scam) भूमि स्वामी शिवधारी एवं उसके बेटे कौशल, सुरेश पटेल, जयप्रकाश पटेल, ओमप्रकाश पटेल व बाबूलाल पिता रामसुंदर पटेल को 35.49 लाख का मुआवजा दे दिया।
Updated on:
03 Mar 2026 09:26 am
Published on:
03 Mar 2026 09:25 am
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