दोषियों को बचाने राजस्व विभाग ने तैयार करवाया फर्जी पंचनामा, किसान बोले-राजस्व अमला न खेतों में गया न हमारे किसी ने बयान लिए
सतना। समर्थन मूल्य खरीदी में 93 लाख रुपए के गेहूं खरीदी घोटाले में अब राजस्व अधिकारियों का स्याह चेहरा सामने आया है। गिरदावरी में गड़बड़झाला कर फर्जी पंजीयन की राह आसान करने वाले मैदानी राजस्व अमले को बचाने के लिए मझगवां के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने किसानों की बोवनी का फर्जी पंचनामा तक बनवा डाला। पत्रिका में गिरदावरी का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद उन्होंने विवादित समिति के पंजीयनों की गिरदावरी की जांच करने के बजाय प्रकाशित केस स्टोरी से दोषियों की फंसती गर्दन को बचाने झूठा पंचनामा बनाकर अपर कलेक्टर को प्रस्तुत कर दिया। शनिवार को पत्रिका ने इस पंचनामे की पड़ताल की सामने आया कि बिना खेतों का मुआयना किए ही रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई। गांव के प्रभावित किसानों ने बताया कि न राजस्व अमला खेतों में गया न हमारे किसी ने बयान लिए।
पंचनामा रिपोर्ट: पंचनामे में कहा गया कि 23 मई 2024 को ग्राम कारीगोही में अनुविभागीय अधिकारी मझगवां, तहसीलदार मझगवां, हल्का पटवारी मझगवां, हल्का पटवारी देवरा, कारीगोही, वीरपुर, बांका, अमिरती ने ग्रामीणजनों के साथ संबंधित आराजियातों का मौके पर जाकर गिरदावरी व बोवनी का भौतिक सत्यापन किया। पाया कि आ.नं. 245/3/1 रकवा 2.023 हे. रामदास पिता भूरा साकिम कारीगोही के संपूर्ण रकबे में गेहूं की बोवनी है।
असलियत: पत्रिका टीम शनिवार को कारीगोही स्थित रामदास के घर पहुंची। घर में रामदास के बेटे भोला साकेत और रामदास की पत्नी ने बताया कि रामदास किसी काम से बाहर गए हुए हैं। इसके बाद भोला से जब आ.नं. 245/3/1 रकवा 2.023 हे. के बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि उनकी 5 एकड़ की जमीन है। वे 3 एकड़ में काबिज हैं। इसमें से 1 एकड़ में राई बोई गई थी। 2 एकड़ में गेहूं बोया था। पत्रिका में छपी खबर को सही बताते हुए कहा कि हमने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए कोई पंजीयन नहीं करवाया है। न ही मेरी जानकारी में हमारी जमीन का पंजीयन है। पटवारी ने नंबर देकर किसी अन्य के नाम जुड़वा दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न तो एसडीएम, न तहसीलदार और न ही पटवारी मेरे पास आए न ही मेरे खेत तक गए। परसों फोन लगा कर संदेश दिलवाया कि तहसीलदार आए हैं। आकर दस्तखत कर दो, वो 'गरीब' फंसे नहीं। जब 'गरीब' के संबंध में पूछा गया तो भोला ने इसके बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। बताया कि इसके बाद छोटे भाई कमलेश को भेजा। जब कमलेश वहां पहुंचा तो तहसीलदार, एसडीएम मिले ही नहीं तो वह वापस घर लौट आया। इस बात की पुष्टि रामदास की पत्नी ने भी की। इसके बाद भोला अपने साथ टीम पत्रिका को लेकर अपने खेतों में गए। यहां अभी भी खेत के दक्षिणी हिस्से में एक एकड़ में राई के डंठल पड़े हुए थे और उत्तरी हिस्से में गेहूं का कटा खेत था। इस तरह एसडीएम का पंचनामा गलत साबित हो रहा है।
पंचनामा रिपोर्ट : अनुविभागीय अधिकारी मझगवां ने अपने हस्ताक्षरित प्रतिवेदन में बताया कि आराजी नंबर 229 के कुल रकवा 1.360 हे. राम जियावन पिता रामधनी सिंह सा. कारीगोही के नाम दर्ज अभिलेख है। इसके संपूर्ण रकवे में गेहूं की फसल बोना पाया गया है। उक्त भूमि को सिकमी काश्तकार के रूप में पूजा गुप्ता पति संदीप गुप्ता द्वारा शपथ पत्र व सहमति पत्र के आधार पर पंजीयन कराया गया था।
असलियत: टीम पत्रिका कारीगोही निवासी राम जियावन पिता रामधनी सिंह के घर पहुंची। राम जियावन पिता रामधनी सिंह ने बताया कि उनका खेत जिसका आ.नं. 229 रकवा 1.36 हे. है, उसमें अरहर की फसल बोई थी। उन्होंने यहां गेहूं कि फसल बोने से स्पष्ट इनकार किया। उन्होंने कहा कि न तो उनके पास एसडीएम आए, न ही तहसीलदार आए न ही पटवारी आया और न ही उनके इस खेत में ये अधिकारी गए। उन्होंने पंचनामा बनाए जाने की जानकारी से भी इनकार किया। यह भी कहा कि अपने इस खेत का गेहूं बिक्री के लिए कोई पंजीयन नहीं करवाया है। न ही सिकमी में किसी को खेत दिया। उन्होंने पूजा गुप्ता और संदीप गुप्ता को जानने से भी इनकार किया।
खरीदी घोटाले में राजस्व की भूमिका सवालों में
93 लाख लाख के इस खरीदी घोटाले में जितने भी मामले राजस्व विभाग की जांच से संबंधित हैं सभी में खानापूर्ति की जा रही है। मसलन फर्जी पंजीयन में गड़बड़ी के कुछ उदाहरण पत्रिका ने देते हुए इसमें व्यापक गड़बडी की बात कही। जितने उदाहरण दिए दिए गए उतनों की जांच कर खानापूर्ति कर ली गई। जबकि सेवा सहकारी समिति नयागांव खुटहा के ऐसे पंजीयन जिनका गेहूं विक्रय जयतमाल खरीदी केंद्र में हुआ उन सभी की जांच करनी थी। सिकमी पंजीयन का सत्यापन किसानों से करना था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। इसी तरह पत्रिका ने गिरदावरी में गड़बड़ी उजागर की। इसमें भी जितने केस पत्रिका ने बताए उनका भी फर्जी सत्यापन कर पंचनामा बनाया। जबकि गिरदावरी की जांच खेतों में किसान के साथ जाकर करनी थी। कुल मिला कर कलेक्टर के आदेश भी राजस्व अधिकारी नहीं मान रहे हैं।
मामले में जनपद पंचायत उचेहरा की ग्राम पंचायत बाबूपुर निवासी संजय तिवारी की भूमिका संदिग्ध है। संजय खरीदी केन्द्र आवंटन की प्रक्रिया के दौरान लगातार केन्द्रों के निरीक्षण में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी के साथ नजर आता रहा। उसकी समग्र आईडी 120000208 से एक फर्जी पंजीयन सेवा सहकारी समिति नयागांव खुटहा में कराया जाता है। उसने संजय कुमार पिता धर्मराज ब्राह्मण निवासी कारीगोही की आ.नं. 198/1/2 रकवा 2.9730 हे. को स्वयं की जमीन बताते हुए अपने नाम से पंजीयन करवा लिया। इसकी सारी जानकारी प्रशासन के पास है, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह भी है कि पंजीयन में गड़बड़झाला उजागर होने के बाद एसडीएम ने इसकी और इस तरह के मामले की जांच क्यों नहीं करवाई? इस तरह किसी अन्य की जमीन किसी दूसरे के नाम कैसे स्वयं की जमीन के रूप राजस्व विभाग के सत्यापन के बाद भी चढ़ गई?