रमसा में मॉनीटरिंग का अभाव: समीक्षा में डीइओ और डीपीसी की लापरवाही आई सामने
सतना। जिले की शैक्षणिक व्यवस्था को अधिकारी किस तरह अपनी अनदेखी का शिकार बना रहे। इसकी पोल इस बार हाईस्कूल में प्रवेश के लिए चलने वाले स्कूल चलें हम अभियान में खुल गई। कक्षा 8वीं उत्तीर्ण करने वाले शत प्रतिशत बच्चों का कक्षा 9वीं में प्रवेश कराने के शासन ने निर्देश और दायित्व दिए थे। स्थिति यह है कि महज 8 दिन बचे हैं और 8वीं से 9वीं में प्रवेश करने वाले बच्चों की संख्या 65 फीसदी है। जबकि गत वर्ष इस अवधि में यह प्रतिशत 85 फीसदी था। मामले को राज्य शासन ने गंभीरता से लेते हुए जिले की मॉनीटरिंग व्यवस्था को दोषी माना है। 31 जुलाई तक शत प्रतिशत प्रवेश कराने के निर्देश दिए हैं।
ये है मामला
अपर परियोजना संचालक रमसा गौतम सिंह ने डीइओ एवं एडीपीसी रमसा को लिखे पत्र में बताया कि स्कूल चलें हम अभियान के तहत कक्षाओं में शत प्रतिशत नामांकन के निर्देश दिए गए थे। यह भी स्पष्ट किया था कि 8 से 9 में प्रवेश की शत प्रतिशत अंतरण की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। समीक्षा में पाया गया है कि जिले में इसकी मॉनीटरिंग नहीं की जा रही है। गत वर्ष कक्षा 8 से 9 में अंतरण की दर 85 फीसदी थी। इस वर्ष अभी तक प्रवेशित विद्यार्थियों की दर 65 फीसदी है। कक्षा 9वीं में प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। इसलिए डीइओ और एडीपीसी स्तर पर व्यापक पैमाने पर कार्यवाही अपेक्षित है। 95 और इससे ऊपर का लक्ष्य पूरा करने वालों को प्रशस्ति पत्र दिए जाने की भी बात कही गई है।
इन निर्देशों का सख्ती से नहीं हुआ पालन
- माध्यमिक शालाओं से टीसी निकटस्थ हाइस्कूल को दी जाए एवं हाइस्कूल स्तर पर रजिस्टर संधारित कर विद्यार्थी की ट्रेकिंग की जाए।
- प्राचार्यों का दायित्व है कि टीसी के आधार पर वह मानीटरिंग करें कि विद्यार्थी ने कहां प्रवेश लिया।
- ऐसे विद्यार्थी जो स्थानीय स्कूल में प्रवेश न लेकर टीसी लेने पहुंचे उनका पूरा रेकार्ड रखा जाए। टीसी देने से पहले वह विद्यार्थी कहां प्रवेश ले रहा है उसकी प्रविष्टि अनिवार्य है।
- अन्यत्र प्रवेश की जानकारी पोर्टल पर फीड करनी होगी।
9वीं के प्रवेश की गति काफी कमजोर है। इसकी वजह एडीपीसी और डीइओ हैं। इनका दायित्व है कि वे दिन प्रतिदिन प्रवेश की संख्या पर पोर्टल से निगरानी रखें। लेकिन जिले में गंभीरता नहीं बरती गई।
गौतम सिंह, अपर परियोजना संचालक