सतना

सतना वार्ड क्रमांक 10: टंकी सूखी, 10 साल बाद भी पानी का इंतजार

ओवरहेड टैंक के स्ट्रक्चर तक सिमट कर रह गई पानी की आपूर्ति, पार्षद का पद रिक्त होने से वार्डवासी नहीं कर पाते शिकायत

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May 11, 2018
satna nagar nigam ward no.10 news in hindi

सतना। वार्ड क्रमांक 10 की लगभग 7 हजार की आबादी पिछले 10 साल से ओवर हेड टैंक से पानी आने का इंतजार कर रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि टंकी बन जाने से पेयजल की सप्लाई मिलने लगेगी। लेकिन, जिम्मेदारों की अनदेखी से आज तक ऐसा नहीं हो सका। लगभग 10 लाख रुपए की ज्यादा लागत से तैयार यह टंकी उपयोग में नहीं आने से अब जर्जर होने लगी है। इस वार्ड के पार्षद बसेन्द्र सिंह गुड्डा का निधन 25 दिसंबर 2017 को सड़क हादसे में हो गया है। निधन के पहले तक पार्षद अपने क्षेत्र के लिए कई निर्माण कार्य की फाइल तैयार करवा चुके थे। इसमें से कई कार्य अब लंबित रह गए हैं।

पार्षद के निधन के बाद शुक्ला बरदाडीह, मारुति नगर, बमुरहा, उंचवा टोला, कोलान बस्ती समेत 20 के लगभग बस्तियां निगम प्रशासन की अनदेखी का शिकार हैं। इलाके की 7160 की आबादी आज भी कई बुनियादी सुविधाओं का रास्ता ताक रही है। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते पेयजल संकट के अलावा सड़क, नाली, नाला सहित कई प्रोजेक्ट यहां चालू नहीं हो पा रहे हैं। लगभग 10 हजार लीटर की एक टंकी एवं दो टैंकर के भरोसे पूरे वार्ड की पेयजल व्यवस्था है। गर्मी के मौसम में यह नाकाफी साबित हो रही है।

लिहाजा, सुबह से लोग डिब्बा लेकर टंकी के पास अपनी बारी का इंतजार करने लगते हैं। यहां के 50 फीसदी क्षेत्र में अमृत व जलावर्धन के तहत पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन सप्लाई अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।

patrika IMAGE CREDIT: sajal gupta

वार्ड को मिले सिर्फ 4 सफाई कर्मी

सात हजार से ज्यादा आबादी वाले इस वार्ड में महज 4 सफाइकर्मी तैनात हैं। नतीजा यह है कि चारों तरफ गंदगी का अंबार है। नाली बजबजा रही है। सड़क पर सूखा कचरा पड़ा है। मुक्ति धाम के नाम पर श्मशान घाट का निर्माण कार्य करवाया जा रहा। एक नाली का निर्माण हो रहा है। पार्षद विहीन यह वार्ड विकास की मुख्य धारा से कटा नजर आ रहा है।

बीच बस्ती चल रहे ईंट भट्ठे
शहरी क्षेत्र में कहने को तो ईंट भट्ठों पर प्रतिबंध है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इसे नियम विरुद्ध बताता है। जमीनी हकीकत यह है कि इस वार्ड में बीच बस्ती ईंट भट्ठों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। अभी तक इनके विरुद्ध न तो कोई कार्रवाई हुई न ही कोई देखने पहुंचा।

patrika IMAGE CREDIT: sajal gupta

5 डिब्बे से ज्यादा पानी न भरें
वार्ड में पानी के लिए मारामारी का आलम यह है कि यहां की पानी टंकी में स्पष्ट रूप से चेतावनी लिखवाई गई है कि कोई भी व्यक्ति 5 डिब्बे से ज्यादा पानी न भरे। ज्यादातर स्थानीय रहवासी साइकिल व हाथों में डिब्बा लेकर पानी के लिये दिन भर भटकते हैं। हादसे के बाद भी सबक नहीं: प्रमुख मार्ग के ठीक बगल से निकले नाले में कई बार लोग हादसे का शिकार हो चुके हैं। इसके दोनों ओर रेलिंग लगाने के लिए कई बार निगमायुक्त और महापौर को पत्र भी लिखा गया। लेकिन हाल जस के तस हैं। आरोप है कि यहां कराया गया नाले का काम भी गुणवत्ताविहीन है। कई स्थानों पर नाला टूटने लगा है। यही स्थिति सड़कों की है।

patrika IMAGE CREDIT: sajal gupta

वार्ड की प्रमुख समस्या पेयजल है। टैंकर से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। दूर-दूर से टंकी तक लोग आते हैं। सड़क जर्जर हो चुकी है। विकास के नाम पर कोई कार्य नहीं हो रहा।

धीरेंद्र सिंह

वार्ड में एक टंकी का निर्माण हुआ था, लेकिन बनने के बाद लीकेज होने के कारण आज तक उससे पेयजल किसी को नहीं मिला। पेयजल समस्या बढ़ गई है। गंदगी के बीच रहना मजबूरी हो गई है।

रामनाथ

नालियों की सफाई न होने से आम जनता परेशान है। सफाई कर्मचारी वार्ड का भ्रमण नहीं करते हैं। कई बार निगम कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है।

सुखलाल कुशवाहा

कई इलाकों में पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। पेयजल को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया गया। पर, इस वार्ड की ओर किसी का ध्यान
नहीं जाता है।

मुकुंदी लाल

स्ट्रीट लाइट रात को नहीं जलती है। आम जनता बीते दस वर्ष से पेयजल के लिए लड़ रही है। जो काम रुके थे वे धीरे-धीरे हो रहे हैं। नालियों की सफाई नहीं होने से परेशानी होती है।

रामाश्रय सेन

सड़कों व नालियों की सफाई नहीं होती है। नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। अधिकतर नालियां टूटी हैं। वार्ड में कुछ नई नालियों का निर्माण हो रहा है।

ज्योतिष तिवारी

बस्तियों में पाइपलाइन नहीं बिछी है। पेयजल की आपूर्ति टैंकर से होती है। जलस्रोत भी सूखे हैं। रात होते ही वार्ड अंधेरे के आगोश में समा जाता है। अंधेरे के कारण वारदातें भी होती हैं।

ओम प्रकाश कुशवाहा

हमारे घर के सामने की नाली की सफाई कई दिनों से नहीं हुई है। हम लोगों ने मिलकर भी सफाईकर्मी से शिकायत की, लेकिन ध्यान नहीं
दिया गया।

तिरसिया बाई

वार्ड में सर्वाधिक निचली बस्ती होने के बाद भी पेयजल की सुविधाएं नहीं हैं। कई बार निगम के कर्मचारियों से भी कहा गया, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। जर्जर सड़कों पर चलना मुश्किलभरा होता है।

अजय प्रजापति

पेयजल समस्या के चलते हम लोगों के सुबह दूसरे इलाके जाकर पानी लाना पड़ता है। कई बार टैंकर आता है तो पानी भरने के चक्कर में विवाद की स्थिति बन जाती है।
प्रीति कुशवाह

सड़क पूरी तरह टूट गई है। सड़कों पर चलना मुश्किल है। सुनने वाला कोई नहीं है। कई बार सड़क की समस्या से भी अवगत कराया गया लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
सुरेश वर्मा

Published on:
11 May 2018 01:32 pm
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