सतना

जैन परिवार ने मानसून ऑफर में जीती गोल्ड चेन, बोले- निडरता ही पत्रिका की पहचान

पत्रिका के चार साल से नियमित पाठक, राउरकेरा स्टील प्लांट के रिटायर्ड डीजीएम है बांधवगढ़ कॉलोनी निवासी सुभाष जैन

2 min read
Jun 02, 2018
Satna patrika Monsoon offer news in hindi

सतना। बेबाक राय ही पत्रिका की पहचान है। किसी पक्ष विशेष के समर्थन के विपरीत निष्पक्ष होकर अभिव्यक्ति देना, पत्रकारिता के सिद्धांतों पर अखबार प्रकाशित करना और निडरता के साथ खबरों की प्रस्तुति पत्रिका को अन्य अखबारों से अलग करती है। यह बात मानसून पत्रिका ऑफर के तहत गोल्ड चेन विजेता बांधवगढ़ कॉलोनी निवासी सुभाष चंद्र जैन और उनकी पत्नी विजय श्री ने कही।

जैन दंपती ने बताया, विगत चार से पत्रिका पढ़ रहे हैं। वे ओडिशा के राउरकेला स्टील प्लॉट में डिप्टी जनरल मैनेजर के रूप में पदस्थ थे। रिटायर होने के बाद 2014 में सतना शिफ्ट हुए। तभी से पत्रिका के नियमित पाठक हैं।

ये भी पढ़ें

DGP साहब! आप की पुलिस खुद नहीं लगाती हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग की देखिए अनचाही तस्वीर

निष्पक्ष संपादकीय
वे पत्रिका की संपादकीय को लेकर कहते हैं, मैं हमेशा अखबारों की संपादकीय पढ़ते रहा हूं। लगातार संपादकीय पढऩे से समझ में आने लगता है कि अखबार किस विचारधारा का है और किसका समर्थक है। लेकिन, पत्रिका के साथ ऐसा नहीं। हर मुद्दे पर निष्पक्षता के साथ संपादकीय प्रकाशित होती है। किसी पार्टी या विचारधारा का समर्थक अखबार नहीं लगता है।

सरोकार के रूप में जिम्मेदारी
जैन दंपती पत्रिका के सामाजिक सरोकार की तारीफ भी करते हैं। वे कहते हैं कि अक्सर कुछ न कुछ सामाजिक सरोकार को लेकर अखबार प्रयास करता है। अमृतम जलम्, चेंजमेकर्स, मुझसे दोस्ती करोगे जैसे कई कार्यक्रम प्रभावित करते हैं। पत्रिका ने सरकारी स्कूलों में अधिकारी व जनप्रतिनिधियों के माध्यम से एक दिन की क्लास लगाई थी। जो बेहतरीन प्रयास था, इससे बच्चों को मोटिवेशन मिलेगा।

मुहिम के कायल
जैन दंपती पत्रिका की मुहिम का कायल है। वे कहते हैं, यह अखबार हर मुहिम को अंजाम तक पहुंचाता है। अगर, कुछ गलत है तो सत्ता पक्ष से टकराने से नहीं डरता। मप्र, छग व राजस्थान में बार-बार पत्रिका ने साबित किया है। 'जब तक काला, तब तक ताला' मुहिम बेहतरीन रही। इसने साबित किया कि कलम की ताकत क्या होती है?

नेशनल कंटेंट बेहतर
जैन दंपती कहते हैं, पत्रिका का नेशनल कंटेंट बेहतर है। खबरों की संख्या ज्यादा होती है। उसके तथ्य भी अन्य अखबारों से बेहतर हैं। स्टेट कंटेंट भी ज्यादा होता है। हर रविवार जैकेट के रूप में सार्थक सामग्री प्रस्तुत की जाती है।

ये भी पढ़ें

11 हजार सीटें 14 हजार छात्र, अब कॉलेज-दर-कॉलेज भटकेंगे छात्र, फिर भी नहीं मिलेगा एडमिशन, जानिए क्यों
Published on:
02 Jun 2018 04:25 pm
Also Read
View All