सतना

satna: दांव पर दिग्गजों का सियासी भविष्य

महापौरी में जीत हार तय करेगी आगे की सियासत सईद की बसपा में एंट्री से त्रिकोणीय मुकाबले के हालात हारने वालों का अस्त हो जाएगा राजनीतिक सूरज

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Jun 18, 2022
satna: दांव पर दिग्गजों का सियासी भविष्य
satna: political future of veterans at stake

सतना. अभी तक सतना नगर निगम चुनाव के लिये महापौर की जो स्थितियां बनी हैं उससे मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है। कांग्रेस से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा मैदान में है तो भाजपा से योगेश ताम्रकार। वहीं कांग्रेस से बगावत करके बसपा प्रत्याशी के तौर पर महापौर का चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके पूर्व मंत्री सईद अहमद भी मैदान में है। जिस तरीके का इन तीनों प्रत्याशियों का राजनीतिक कद है और भविष्य में तीनों ही महापौर से बड़े पदों की उम्मीद रखते हैं ऐसे में इस चुनाव में इनका राजनीतिक भविष्य भी दाव पर है। इससे यह तय माना जा रहा है कि इस चुनाव में जो भी दो प्रत्याशी हारते हैं उनकी राजनीतिक का सूरज ढल जाएगा। लिहाजा सभी प्रत्याशी अपनी जीत के लिये पूरी ताकत लगा रहे हैं। इसके लिये साम, दाम, दण्ड, भेद जैसी सभी चालें चलनी शुरू भी हो गई हैं।इस बार महापौरी का चुनाव लड़ रहे इन तीनो प्रत्याशियों की महत्वाकांक्षाओं से उनके अपने दल के लोग भी वाकिफ है। इनमें से वे लोग भी शामिल हैं जो खुद इनकी महत्वाकांक्षाओं पर अपने राजनीतिक भविष्य की धूमिल होती छवि देख रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इन चुनावों में प्रत्याशियों को ऐसे लोगों के भितरघात का भी सामना करना पड़ेगा।

योगेश की जीत से कई नेताओं की राजनीति खतरे में

अगर भाजपा की बात करें तो प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश ताम्रकार संगठन के रास्ते सत्ता की ओर पहुंचे हैं। जिस तरीके के उनके काम हैं और पकड़ है उन्हें भविष्य का विधायक पद का भी दावेदार माना जाता है। यही वह मामला है जो भाजपा के कुछ लोगों के सीने में सांप लोटने के लिये पर्याप्त है। भाजपा के वे लोग जो खुद को विधायक का दावेदार मानते हैं उनके द्वारा योगेश को इस बार अपेक्षित मदद मिलेगी इसको लेकर तमाम कयास अभी से शुरू हो गए हैं। इसी तरह महापौर का चुनाव अगर योगेश जीत जाते हैं तो वे भी भाजपा से पिछड़ा वर्ग के एक बड़े नेता के रूप में स्थापित हो जाएंगे। ऐसे में पिछड़ा वर्ग की राजनीति करने वालों के लिये योगेश एक विकल्प बन सकते हैं। लिहाजा उनकी भी सदाशयता इस बार देखने वाली होगी।

सिद्धार्थः महापौरी के रास्ते सांसदी पर नजर

कांग्रेस से महापौर प्रत्याशी और विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा का कांग्रेस में कदम विन्ध्य के क्षत्रप अजय सिंह के जरिये पड़ा था। लेकिन बाद में इन दोनों नेताओं के बीच समन्वय कम होता चला गया। आज कांग्रेस खेमे में सिद्धार्थ की जो स्थिति है उसे देखते हुए माना जाता है कि महापौर का चुनाव जीतने के बाद सिद्धार्थ की महत्वाकांक्षा सांसद पद के लिये भी होगी। खुद गाहे बगाहे वे ऐसा संकेत देते भी रहते हैं। इस चुनाव को जीतने के बाद उनका कद जिले में कांग्रेस की राजनीति में काफी ऊपर हो जाएगा। ऐसे में कांग्रेस खेमे को वे लोग जो खुद लोकसभा में अपना भविष्य देखते हैं या फिर आज कांग्रेस के बड़े नाम में शामिल हैं उनके लिये सिद्धार्थ वक्ष स्थल के वासुदेव बने हुए हैं। लिहाजा इस स्थिति में बागियों के साथ अपनी पार्टी के भितरघात का भी अंदेशा भी उनके साथ जुड़ा रहेगा।

सईद के लिए राजनीति की संजीवनी होगी जीत

सईद अहमद कांग्रेस के कद्दावर परिवार से माने जाते रहे हैं। वे खुद भी मंत्री रह चुके हैं और विन्ध्य के बड़े मुस्लिम नेताओं में शामिल हैं। उम्र के जिस पड़ाव पर वे हैं उनके लिये यह जीत एक राजनीतिक संजीवनी है। लेकिन अगर वे यह चुनाव हार जाते हैं तो उनके पास राजनीतिक रूप से पाने के लिये कुछ नहीं बचेगा और अपना पुराना सारा खो चुके हैं। हालांकि उनके पास भितरघात जैसा कुछ नहीं है क्योंकि वे खुद बगावत करके चुनाव लड़ रहे हैं और बागियों का अच्छा खासा समर्थन है। लेकिन यह चुनाव वे हारते हैं तो उनका राजनीतिक कैरियर धराशायी हो सकता है।

Published on:
18 Jun 2022 10:34 am