सतना

गैंगस्टर से भी खतर नाक यहां के बंदर, सोच समक्ष कर गुजरें इस मोहल्ले से

बंदरों से बचने लोग घरों में रहते हैं कैद, बचने के लिये घरों में लगाई जाली , कलेक्टर, निगम प्रशासन से बचने लगाई गुहार
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Updated: 6 Aug 2018, 3:16 PM IST
satna shahar me bandaro ka aatank
satna shahar me bandaro ka aatank

सतना। शहर की एक पॉस कालोनी में बीते कई माहों से चित्रकूट जैसे हालात हो गए है। आलम यह है कि इस कालोनी में बंदरों का आतंक है। लोगों का मोहल्ले में स्थित मंदिर में पूजा करने जाना दूभर हो गया है। शहर की जीवन ज्योति कालोनी के आसपास और कोल्हा देवी मंदिर के रहवासी बंदरों से हमेशा त्रस्त रहते हैं। इस इलाके में सैकड़ों की संख्या में बंदर दिन भर उछल कूद करते दिखाई पड़ते हैं।

यहां के हालात कोई चित्रकूट धाम से कम नहीं हैं। लोगो के घरों से खाना, बर्तन तक बंदर उठा ले जाते है। मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्वालुओं को कई बार बंदरो ने अपना शिकार बनाया है। इसी के चलते ज्यादातर लोग मंदिर में दर्शन करने से कतराते हैं। रहवासी घरों में कैद रहने को मजबूर हैं।

हर घर में लगी रैलिंग
खुंखार बंदरों से निजात पाने के लिये घरों में लोगो ने लोहे व स्टील की जाली लगा रखी है। जिससे किसी तरह इनसे बचा जा सके। बंदरो से पार पाने के लिये स्थानीय जनों ने कलेक्टर से लेकर निगम प्रशासन तक गुहार लगाई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आज भी लोग बंदरों से प्रताडि़त हैं।

दर्जनो बच्चों को बना चुके हैं शिकार
यहां आसपास रहने वाले दर्जनो मासूम बच्चों को बंदर काट चुके हैं। जिसके कारण यहां का माहौल खराब रहता है। बच्चे तो ठीक बड़े बुजुर्ग भी इनका शिकार बन चुके हैं। बंदरों से डर के कारण छतों में कपड़े तक फैलाने से लोग परहेज कर रहें हैं।

पूजा करने नहीं देते
कोल्हा देवी मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि सुबह जैसे ही मोहल्ले के लोग पूजा करने जाते हैं बंदर खाने की लालच में मंदिर आ जाते है। पूजा करने वाले कई भक्तों को कई बार जख्मी भी कर चुके है। भक्त लोग सुरक्षा के लिए डंडा लेकर आते है। वहीं बच्चों को मंदिर बंदर की डर से नहीं भेजा जाता है।

-बंदरों के आतंक के कारण पूजा के साथ मोहल्ले में निकलना मुश्किल हो गया है। बंदरों को लेकर कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।
- सत्य प्रकाश बिनियानी, पीड़ित

- बंदरों से परेशान हो कर निगम तक को पत्र लिखकर सुरक्षा की गुहार लगा चुके है। समस्या को सुनने वाला कोई नही है। हमारे घर के बच्चे बंदरों के हमले से जख्मी भी हो चुके है।
-सुनील साहू, पीड़ित

-शक्ति बिहार कालोनी की बिल्डिगों में बंदारों से बचने के लिए घरों के बारजे में रेलिंग लगाकर सुरक्षा की गई है। वन विभाग के अधिकारी भी नहीं सुन रहे हैं।
-यज्ञ नारायण गुप्ता, पीड़ित

-बंदरों के आतंक के कारण मोहल्ले के लोगों व्दारा घरों की छत पर आनाज धोकर सुखाना मुश्किल है जिस कारण मोहल्ले के लोग रेडिमेड आटा खरीद रहे हैं। मोहल्लें के महाराजा स्टेट व श्रीराम एपार्टमेंट बंदरों का घर स बन गया है।
-अभिषेक साहू, पीड़ित

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