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गांव-घर के पास उतरने बेखौफ खींचते हैं जंजीर, इस रेलखंड में 631 बार खींची गई चेन

चेन पुलिंग: आपात स्थिति में उपयोग की जाने वाली सुविधा का मजाक, ढाई साल में मैहर-मानिकपुर के बीच 631 बार खींची चेन

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satna-manikpur rail khand 631 chain pulling

satna-manikpur rail khand 631 chain pulling

सतना। किसी भी आपात स्थिति में मुसीबत से बचने के लिए ट्रेन के हर कोच में जंजीर होती है। उसे खींचकर गाड़ी को कुछ देर के लिए रोका जा सकता है। लेकिन, सतना रेलखंड की हकीकत कुछ और है। मैहर से मानिकपुर स्टेशन के बीच यात्री किसी इमरजेंसी की बजाय अपने हिसाब से ट्रेन में चढऩे-उतरने के लिए चेन पुलिंग कर रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो सतना आरपीएफ के इलाके में इस साल हुई एसीपी (अलार्म चेन पुलिंग) की घटनाओं में से 90 फीसदी मामले एेसे रहे जब बेवजह चेन खींचकर ट्रेन को रोका गया। कुछ मामलों में यात्रियों ने सिर्फ इसलिए ट्रेन की जंजीर खींच दी कि उन्हें अपने घर-गांव के पास उतरना था। ज्यादातर में आरपीएफ ने रेल अधिनियम की धारा 141 के तहत प्रकरण कायम कर रेल न्यायालय में पेश किया।

अर्थदंड रेलवे ने 56 हजार वसूले

बीते साल 195 मामलों में आरोपी यात्रियों से बतौर अर्थदंड रेलवे ने 56 हजार वसूले थे। बताया गया कि बीते ढाई साल में यानी 2016 से जुलाई 2018 तक सतना आरपीएफ एरिया में चेन पुलिंग के 631 मामले सामने आए। इनमें से करीब 10 फीसदी ही एेसे मामले रहे, जहां जरूरत के समय ट्रेन की जंजीर खींची गई। सतना आरपीएफ एरिया में 6 एेसे भी स्टेशन आते हैं जो दस्यु प्रभाव वाले इलाके में हैं। इनमें मझगवां, इटवा डंडेला, टिकरिया, मारकुंडी, बारामाफी व बांसा पहाड़ शामिल हैं। इन स्टेशनों पर चेन पुलिंग होने पर सतना से लेकर जबलपुर तक हड़कम्प मच जाता है।

एलएचबी कोच में चेन खिंचने पर 40 मिनट खड़ी रहती ट्रेन
आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन के एलएचबी (लिंक हाफमैन बुश) कोच वाली ट्रेनों में चेन पुलिंग होने के बाद इन्हें दोबारा आगे बढ़ाने में 30 से 40 मिनट का वक्त बर्बाद हो रहा है। जानकारों की मानें तो रेल सेफ्टी के मद्देनजर एलएचबी कोच में एक जगह की बजाय हर केबिन में अलार्म चेन मौजूद होती है। चेन पुलिंग के बाद आरपीएफ व ट्रेन स्टॉफ को एसीपी डिटेक्ट करने भारी मशक्कत करनी पड़ती है। सूत्रों के मुताबिक जबलपुर मंडल भेजी गई एसीपी की एक रिपोर्ट में इस समस्या का जिक्र आरपीएफ ने किया है।

कोच में एक जगह अलार्म चेन हो

एक कोच में कई जगह चेन होने से यह जल्दी पता नहीं चल पाता कि एसीपी किस प्वॉइंट पर हुई है। चेन पुलिंग के बाद एलएचबी कोच से आवाज कम आने पर भी जल्द से जल्द एसीपी का पता नहीं चल पाता। एलएचबी कोच में चेन पुलिंग के बाद ट्रेन में मौजूद एसी मैकेनिक या फिर सीएंडडब्ल्यू विभाग के पास ही वह टूल होता है जिससे प्वॉइंट चेक कर दुरुस्त किया जाता है। यदि कोच में एक जगह अलार्म चेन हो तो एसीपी करने वाला जल्द पकड़ में आ सकता है। हाल ही में एलएचबी कोच वाली आनंद-विहार एक्सप्रेस में दो बार चेन पुलिंग होने के बाद 30 से 40 मिनट तक ट्रेन खड़ी रही थी।

यात्रियों की आफत, रेलवे को चपत
चलती ट्रेन में चेन पुलिंग होने से जहां परिचालन प्रभावित होता है वहीं यात्रियों को अपनी सुरक्षा की चिंता बढ़ जाती है। रेलवे को भी लाखों की चपत खानी पड़ती है। जानकारों की मानें तो सतना आने-जाने वाली गाडि़यों में डीजल इंजन लगा होता है। यदि ट्रेन में डीजल इंजन लगा है तो चेन पुलिंग के दौरान कम से कम बीस से चालीस लीटर तक डीजल खर्च हो जाता है।

मालगाड़ी के संचालन पर भी असर

अगर ट्रेन की चेन पुलिंग वजह जल्द सामने आ जाती है तो गाड़ी 5 से 10 मिनट तक खड़ी रह जाती है। ऐसे में उस ट्रेन के पीछे चल रही यात्री या मालगाड़ी के संचालन पर भी असर पड़ता है। आरपीएफ प्रभारी मान सिंह ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाकर चेन पुलिंग के नियम कायदे लोगों को बताए जाते हैं। बीते दो-तीन सालों से हर साल एसीपी के मामलों में कमी आ रही है।

चेन पुलिंग का प्वॉइंट तलाशने में देरी
30 जुलाई को आनंद विहार-रीवा एक्सप्रेस में सतना-मानिकपुर सेक्शन के दस्यु प्रभावित मारकुंडी स्टेशन के पास चेन पुलिंग हुई। एलएचबी कोच में एसीपी होने ने आरपीएफ को चेन पुलिंग का प्वॉइंट तलाशने में देरी हुई। जब तक प्वॉइंट तलाशकर दुरुस्त किया गया यहां ट्रेन 30 मिनट तक खड़ी रही।

30 मिनट तक खड़ी रही ट्रेन
एक अगस्त को आनंद विहार-रीवा एक्सपे्रस में सतना-रीवा सेक्शन के बीच तुर्की स्टेशन के पास अज्ञात व्यक्ति द्वारा ट्रेन की चेन खींची गई। यहां भी टे्रन करीब 30 मिनट तक खड़ी रही।