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अनन्य भक्त को ही मिलते हैं परमात्मा, सच्ची भक्ति के बाद खुद दौड़कर आते हैं भगवान

श्रीराधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रावण की बीतक कथा प्रारंभ, बीतक वाचक प्रिया स्नेह
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सतना

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Rajesh Sharma

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Updated: 6 Aug 2018, 1:41 PM IST

bhagwat katha in satna

bhagwat katha in satna

सतना । 'जिन रोये तिन पाईया प्रीतम प्यारा मीत' परमात्मा के प्रति अनन्य भक्ति हो तो परमात्मा सहज मिल जाते हैं। जिस प्रकार एक बच्चा दूध के लिए रोता है, किंतु माँ जानती है वो नाटक कर रहा है तो केवल डाँट के चुप करवा देती है। किंतु यदि बच्चा वास्तव में ही भूखा होता है तो माँ सब काम छोड़ के आती है गोद में लेकर दुलार करती है दुग्ध पान कराती हैं। इसी प्रकार जब कोई सच्चे हृदय से परमात्मा के लिए रोता है तो सांसारिक माँ को तो आने में टाइम भी लग सकता है लेकिन मेरी परम किशोरी को कहीं आना जाना नहीं होता वो तो हृदय में ही व्याप्त होती है। यह अमृत वचन श्रीराधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में हिसार हरियाणा से पधारे धर्म उपदेशक प्रिया स्नेह ने भक्तजनों को संबोधित करते हुए कही है।

जीवन में कृष्ण लीला सुख लाती :
कथा का वाचन करते हुए प्रिया स्स्नेह ने कहा कि श्रीकृष्ण की त्रिधा लीला पर प्रकाश डाला गया जिसमें पारब्रह्म पूर्ण परमात्मा का सर्व प्रथम कृष्ण रूप में धरा धाम पर अवतरण , गोलोक बिहारी की मथुरा में कंस आदि को मारने की लीला व श्री राधिका जी का धरा धाम पर 100 वर्ष तक वियोग की लीला का एवं विष्णुजी की द्वारिका लीला करना आदि को विस्तार से बताय गया। उन्होंने आगे कहा कि बीतक कथा के श्रवण ने कई पुराने राज खोले हैं। जीवन को सुखमय बनाने के लिए हमे धर्म से जुडऩा जरूरी है। हमारे नोनिहालो को धर्म से जोडऩा जरूरी है जिससे उनका जीवन सुखमय होगा।

श्रावण कथा जीवन से जोड़ती :
प्रिया स्स्नेह ने कहा कि सावन माह में देश के कोने-कोने में श्रावण कथाएं चल रही हैं। इसी प्रकार शहर में चल रही श्रावण कथाओं में सभी को शामिल होना चाहिए। जीवन में जिस तरह हर किसी की आवश्यकता है उसी तरह कथा का भी महत्व है। हमें जीवन से जोडऩे के लिए भागवत कथा को या अन्य कथा से जुडऩा चाहिए।