सतना । 'जिन रोये तिन पाईया प्रीतम प्यारा मीत' परमात्मा के प्रति अनन्य भक्ति हो तो परमात्मा सहज मिल जाते हैं। जिस प्रकार एक बच्चा दूध के लिए रोता है, किंतु माँ जानती है वो नाटक कर रहा है तो केवल डाँट के चुप करवा देती है। किंतु यदि बच्चा वास्तव में ही भूखा होता है तो माँ सब काम छोड़ के आती है गोद में लेकर दुलार करती है दुग्ध पान कराती हैं। इसी प्रकार जब कोई सच्चे हृदय से परमात्मा के लिए रोता है तो सांसारिक माँ को तो आने में टाइम भी लग सकता है लेकिन मेरी परम किशोरी को कहीं आना जाना नहीं होता वो तो हृदय में ही व्याप्त होती है। यह अमृत वचन श्रीराधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में हिसार हरियाणा से पधारे धर्म उपदेशक प्रिया स्नेह ने भक्तजनों को संबोधित करते हुए कही है।