अब कक्षा 1-2 के बच्चों को प्राप्तांक की जगह 'स्माइली', इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी डीईओ को पत्र जारी कर दिया गया है।
सतना। अब कक्षा 1 व 2 के बच्चों को प्राप्तांक की जगह 'स्माइली' मिलेगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी डीईओ को पत्र जारी कर दिया गया है। इसके पीछे कारण बताया गया है कि बच्चों पर अंकों का मानसिक दबाव न हो। उनकी मासूमियत बनी रहे।
इस व्यवस्था को इस साल से ही लागू कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में होने वाले वार्षिक मूल्यांकन की तिथियां घोषित की गई हैं।
मूल्यांकन इस वर्ष 7-31 मार्च तक
कक्षा 3 से 8 तक का वार्षिक मूल्यांकन इस वर्ष 7-31 मार्च तक होगा। इस वर्ष नया शिक्षण सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा। वार्षिक मूल्यांकन और नए शिक्षण सत्र की तैयारियों के संबंध में जिला शिक्षाधिकारियों और राज्य शिक्षा केन्द्र के जिला समन्वयकों को निर्देश जारी किए हैं।
मूल्यांकन में बदलाव
सरकारी स्कूलों की कक्षा 1 व 2 में बच्चों का 50 प्रतिशत लिखित व 50 प्रतिशत मौखिक रूप से मूल्यांकन किया जाएगा। हिन्दी, गणित व अंग्रेजी की अभ्यास-पुस्तिका में लिखित रूप से कार्य करवाया जाएगा। लर्निंग आउटकम्स की आवश्यकतानुसार बच्चों की उपलब्धि का स्तर मौखिक मूल्यांकन द्वारा किया जाएगा। इन्हीं मूल्यांकन के आधार पर विद्यार्थियों के नवीन प्रगति-पत्रक भरे जाएंगे।
3 स्माइली प्रदान किए जाएंगे
सरकारी स्कूलों में हिन्दी, गणित और अंग्रेजी के लिए लर्निंग आउट कम्स आधारित नवीन प्रगति-पत्रक तैयार किए गए हैं। इनमें शिक्षक द्वारा बच्चे की उपलब्धि का स्तर स्माइली चिन्हों द्वारा अंकित किया जाएगा। विद्यार्थी ने दक्षता प्राप्त कर ली है तो उसके लिए 3 स्माइली प्रदान किए जाएंगे। अगर विद्यार्थी किसी दक्षता को सीखने के स्तर पर है तो दो स्माइली और विद्यार्थी के अधिक प्रयास की जरूरत है, तो उसके प्रगति-पत्रक पर एक स्माइली अंकित किया जाएगा।
अभ्यास पुस्तिका बनेगी आधार
कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों का मूल्यांकन उत्तर-पुस्तिका के स्थान पर अभ्यास पुस्तिका के आधार पर किया जाएगा। छोटे बच्चों को भयमुक्त वातावरण में आंनददायी तरीके से मूल्यांकन के लिए उनकी अभ्यास पुस्तिकाओं में प्राप्तांक के स्थान पर स्माइली अंकित किए जाएंगे। विद्यार्थियों के मूल्यांकन के संबंध में नेशनल केरीकुलम फ्रेम वर्क में अनुशंसा की गई है कि भयमुक्त वातावरण में बच्चों के सीखने-सिखाने की प्रक्रिया व मूल्यांकन किया जाये।