सतना। संचालनालय की मिली भगत से स्कूलों में रिपेयरिंग के नाम पर हुए घोटाले की राशि जांच के साथ बढ़ती जा रही है। मैहर जिले के रामनगर की स्कूलों में बिना निर्माण कार्य के भुगतान करने का आंकड़ा 4 करोड़ 20 लाख रुपए तक पहुंच गया है। पत्रिका में हुए खुलासे के बाद कलेक्टर मैहर […]
सतना। संचालनालय की मिली भगत से स्कूलों में रिपेयरिंग के नाम पर हुए घोटाले की राशि जांच के साथ बढ़ती जा रही है। मैहर जिले के रामनगर की स्कूलों में बिना निर्माण कार्य के भुगतान करने का आंकड़ा 4 करोड़ 20 लाख रुपए तक पहुंच गया है। पत्रिका में हुए खुलासे के बाद कलेक्टर मैहर रानी बाटड ने एसडीएम रामनगर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की है। इस टीम ने 18 स्कूलों का निरीक्षण किया है जिसमें बिना निर्माण किए भुगतान किया जाना पाया गया है। उधर जिला शिक्षाधिकारी ने पत्रिका की खबर के आधार पर संचालनालय से चाहा गया तथ्यगत प्रतिवेदन आयुक्त लोक शिक्षण को भेज दिया है। इस मामले में बीईओ रामनगर संतोष कुमार सिंह और सुलखमा विद्यालय के प्राचार्य निलंबित किए जा चुके हैं।
काम के नाम पर कुछ स्कूलों में गड्ढे खुदे मिले
कलेक्टर मैहर ने एसडीएम रामनगर एसपी की मिश्रा की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की है। जिसमें सांदीपनी उमावि मैहर के प्राचार्य दिनेश पुरी गोस्वामी और सहायक लेखाधिकारी जनपद विनय सिंह शामिल हैं। जांच टीम ने रामनगर विकासखंड के 18 विद्यालयों की जांच पूरी कर ली है। जांच टीम ने मौका मुआयना के साथ ही निर्माण कार्य की वीडियोग्राफी भी करवाई है। इस दौरान पाया गया है कि 3-4 विद्यालयों में चबूतरा बनाकर खानापूर्ति की गई है। कुछ विद्यालयों में शेड स्थापित करने के लिए गड्ढे खुदे हुए पाए गए हैं। इसके अलावा कोई कार्य नहीं किया गया है। हालांकि मामला तूल पकड़ने के बाद अब ठेकेदार ने कुछ स्कूलों में निर्माण सामग्री डाली है। लेकिन कार्य करवाने से स्कूल प्रबंधन ने मना कर दिया है, लिहाजा सामग्री यूं ही पड़ी है।
18 स्कूलों में बिना निर्माण 4.20 करोड़ का भुगतान
इधर रामनगर बीईओ के डीडीओ कोड की हुई जांच में पाया गया है कि इस खेल में 18 विद्यालयों से बिना काम के भुगतान किया गया है। इन विद्यालयों में सुलखमा, छिरहाई, देवरा मोलहाई, गोविंदपुर, मनकहरी, देवराजनगर, हर्रई, मिरगौती, गोरसरी, कंदवारी, सगौनी, बड़वार, गुलवार गुजारा, देवदहा, मझटोलवा, मर्यादपुर, बालक रामनगर और हाईस्कूल मड़वार शामिल है। इन सभी विद्यालयों में फर्जी कार्यादेश, बिना काम हुए फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र के आधार पर भोपाल की चिन्हित ठेका कंपनी वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर को भुगतान किया गया है। इन विद्यालयों से ठेका कंपनी को कुल 4.20 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।
बिना मांग के संचालनालय से दिया काम
पत्रिका ने अपने खुलासे में लोक शिक्षण संचालनालय के संयुक्त संचालक वित्त राजेश मौर्य की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। जांच के बाद अब ये प्रमाणित होते नजर आ रहे हैं। दरअसल बीईओ ने 19 विद्यालयों में भवन मरम्मत, अतिरिक्त कक्ष, भवन जीर्णोद्धार और बाउंड्रीवाल के कार्यों की मांग भेजी थी। लेकिन संचालनालय से राजेश मौर्य ने इन कार्यों को न केवल बदल दिया बल्कि दो उन विद्यालयों के लिए भी कार्य स्वीकृत करते हुए राशि आवंटित कर दी गई जिनके नाम मांग पत्र में शामिल नहीं थे। इन विद्यालयों में उमावि रामनगर और हाईस्कूल मड़वार शामिल है। वहीं मांग पत्र में शामिल तीन विद्यालयों के नाम हटा दिए गए। अपने से किस आधार पर दो विद्यालयों के नाम संचालनालय की वित्त शाखा ने जोड़े इसका कोई जवाब मैहर-सतना के अधिकारियों के पास नहीं है। वहीं हाईस्कूल सेमरिया, उमावि बड़ाइटमा और उमावि सरिया को मांग के बाद भी काम स्वीकृत नहीं करने पर भी चुप्पी है।
डीईओ ने आयुक्त लोक शिक्षण को भेजा प्रतिवेदन
पत्रिका की खबर को संज्ञान में लेते हुए संचालनालय ने डीईओ से तथ्यगत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने कहा था। जिस पर डीईओ ने अपना प्रतिवेदन आयुक्त लोक शिक्षण को भेज दिया है। जिसमें बताया गया है कि 18 स्कूलों में 4.20 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। इसमें आवंटित राशि के दुरुपयोग किए जाने की बात कही गई है। साथ ही इस मामले में व्यापक एवं उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा की गई है।
राशि स्वीकृति होते ही भोपाल से ठेका कंपनी स्कूलों में पहुंची
करोड़ों के इस घोटाले में लोक शिक्षण संचालनालय की भूमिकी संदिग्ध है। दरअसल स्कूलों के सुदृढ़ीकरण और निर्माण संबंधी जो प्रस्ताव संचालनालय (आयुक्त लोक शिक्षण) को बीईओ ने भेजे थे संचालनालय से उन्हें बदल दिया गया। संयुक्त संचालक वित्त राजेश मौर्य ने अपनी मर्जी के अन्य निर्माण कार्य स्वीकृत कर राशि जारी की। हद तो यह हो गई कि जैसे ही संचालनालय से स्वीकृति आदेश रामनगर पहुंचते हैं उसके साथ ही भोपाल से ही ठेका कंपनी वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर इन स्कूलों में पहुंच जाती है। इतना ही नहीं इसी ठेका कंपनी को काम भी मिल जाता है फिर बिना काम किए ही भुगतान भी हो जाता है।
संयुक्त संचालक मौर्य की भूमिका संदिग्ध
मामले की शुरुआत में बीईओ ने स्कूलों के प्राचार्यों से उनके विद्यालयों में आवश्यक निर्माण संबंधी प्रस्ताव चाहे थे। प्राचार्यों के प्रस्ताव के आधार पर बीईओ ने जनपद शिक्षा केन्द्र के उपयंत्री और जिला शिक्षा केन्द्र के सहायक यंत्री से प्राक्कलन तैयार कर संचालनालय को भेजा। लेकिन संयुक्त संचालक ने इसमें बदलाव कर मनमानी कार्य स्वीकृत किए। मसलन हाईस्कूल सुलखमा के प्राचार्य ने भवन की छत से पानी का रिसाव होने और भवन की कमी का प्रस्ताव भेजा। जिसके आधार पर बीईओ ने छत मरम्मत, भवन मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष का प्रस्ताव 24.65 लाख रुपए के स्टीमेट के साथ भेजा। लेकिन संयुक्त संचालक राजेश मौर्य ने सुलखमा विद्यालय को साइकिल स्टैण्ड, पार्किंग शेड और लघु निर्माण कार्य कराने की स्वीकृति देते हुए 24.65 लाख रुपए का आवंटन जारी किया। जैसे ही यह आवंटन आदेश सुलखमा पहुंचा उसके तीन दिन के अंदर भोपाल से ठेका कंपनी वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर भी यहां पहुंच गई और उसने कार्यादेश एक ही दिन में हासिल कर लिया और इसके दो दिन बाद बिल भी लगा दिया और एक माह के अंदर बिना काम किए भुगतान लेकर चलती बनी। यही खेल सभी 18 विद्यालयों में किया गया।
संचालनालय की भवन शाखा से हुई खेल की शुरुआत
इस खेल की शुरुआत संचालनालय की भवन शाखा से होती है। यहां से बीईओ की मांग के आधार पर सीधे रामनगर विकासखंड के 18 विद्यालयों में लघु निर्माण कार्यों के लिए 25-25 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी। स्वीकृति के साथ ही संबंधित राशि बीईओ के खाते में डाल दी। चौंकाने वााली बात यह है कि यह मांग बीईओ ने बिना डीईओ की जानकारी के सीधे संचालनालय को भेजी और संचालनालय ने भी डीईओ से इस संबंध में कोई जानकारी नहीं ली। हद तो यह हो गई कि लोक शिक्षण संचालनालय के संयुक्त संचालक वित्त राजेश मौर्य ने जो वित्तीय स्वीकृत आदेश जारी किया उसकी प्रतिलिपि में डीईओ और संयुक्त संचालक रीवा का उल्लेख है लेकिन इन्हें यह पत्र कभी भेजा नहीं गया। वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों ने जिस तारीख को ठेकेदार को कार्यादेश जारी करते हैं उसके दो दिन बाद ठेकेदार बिल लगा देता है। जिसके आधार पर संबंधित को भुगतान भी कर दिया जाता है।
बिना चैनल आई मांग आयुक्त ने कैसे स्वीकार की
रामनगर बीईओ संतोष सिंह ने डीईओ को बायपास करते हुए 18 विद्यालयों में रिपेयरिंग वर्क का प्राक्कलन सीधे आयुक्त लोक शिक्षण को भेजा। आयुक्त ने बिना चैनल के आई इस मांग को स्वीकृत कर संबंधी भवन शाखा के पास भेजा। भवन शाखा के प्रभारी पीके सिंह है। जहां से स्वीकृति की फाइल संयुक्त संचालक वित्त राजेश मौर्य के पास पहुंची। राजेश मौर्य इन विद्यालयों में लघु निर्माण कार्य, पार्किंग शेड एवं साइकिल स्टैण्ड आदि के लिए राशि जारी कर दी। इन विद्यालयों में से सुलखमा विद्यालय के लिए 24,65,000 रुपए का आवंटन 1 सितंबर 2025 को जारी वित्तीय स्वीकृति आदेश में जारी किया और 30 सितंबर को कार्य पूरा करने के निर्देश भी दिए। निर्माण एजेंसी एसएमडीसी (स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति) को बनाया गया और राशि बीईओ के खाते में भेज दी।
दो दिन में हो गया 25 लाख का निर्माण कार्य
लोक शिक्षण संचालनालय से 1 सितंबर को स्वीकृति मिलते ही हाईस्कूल सुलखमा के प्राचार्य ने निर्माण कार्य करने कथित तौर पर कोटेशन मंगाया जिसका कोई आदेश उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही 3 और 4 सितंबर को रीवा, सतना और भोपाल की ठेका कंपनियों के कोटेशन भी पहुंच गए। लेकिन किसी भी कोटेशन में संदर्भित आदेश का हवाला दर्ज नहीं था। सभी कोटेशन एक ही फार्मेट के थे और ठेका कंपनी के नाम बस अलग-अलग थे। इसके बाद 9 सितंबर को प्राचार्य सुलखमा ने विद्यालय में 24.65 लाख रुपए का निर्माण कार्य करने भोपाल की ठेका कंपनी वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर को कार्यादेश जारी किया। 9 को कार्यादेश जारी होता है और ठेका कंपनी वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर ने 11 सितंबर को 23.81 लाख रुपए का बिल प्रस्तुत कर दिया। जिसके आधार पर 27 सितंबर को प्राचार्य ने इस राशि के भुगतान का स्वीकृत आदेश जारी कर दिया। प्राचार्य के स्वीकृत आदेश के दो दिन बाद 29 सितंबर को बीईओ ने भी भुगतान स्वीकृति आदेश जारी कर दिया और इसके बाद वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर को राशि का भुगतान कर दिया गया। जबकि इस अवधि तक काम प्रारंभ ही नहीं हुआ था। यही खेल रामनगर के 18 स्कूलों में किया गया।