वास्तु के अनुसार जानें सोने का सही तरीका, इन 12 मुद्राओं का रखें ध्यान
सतना। दिनभर की भाग दौड़ भरी जिंदगी में रात में सोना सबसे जरूरी है। ये हमारी दिनचर्या का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। शयन अर्थात सोना, नींद लेना। मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी शयन करते हैं। शयन किस तरह हमारे स्वास्थ्य और चेतना के लिए लाभदायी हो सकता है, इसके लिए शास्त्रों में निर्देश दिए गए हैं। जैसे कि रात्रि को भोजन करने के तुरंत बाद शयन नहीं करना चाहिए। सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना चाहिए। आयुर्वेद में 'वामकुक्षि' की बात आती हैं, बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिए हितकर हैं। बाईं करवट सोने की धारणा के पीछे भी वैज्ञानिक आधार है।
ये है कारण
दरअसल यह प्रक्रिया स्वर विज्ञान पर आधारित है। हमारी नाक से जो श्वास बाहर निकलती और अन्दर आती है उसे स्वर कहते हैं। नाक के बाएं छिद्र से श्वास लेने व छोडऩे की क्रिया को चन्द्र स्वर कहते हैं। इसी तरह दाहिनी ओर का स्वर सूर्य स्वर कहलाता है। सूर्य स्वर हमारे शरीर में उष्मा उत्पन्न करता है। इससे भी भोजन पचने में मदद मिलती है। इसीलिए हमारे शास्त्रों में बाईं करवट सोने को कहा गया है। शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आंखे बिगड़ती है।
शयन के समय बरतें ये सावधानियां
- मस्तक और पांव की तरफ दीपक रखना नहीं। दीपक बायीं या दायीं और कम से कम 5 हाथ दूर होना चाहिए।
- संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी चाहिए।
- शय्या पर बैठे-बैठे निद्रा नहीं लेनी चाहिए।
- द्वार के उंबरे/ देहरी/थलेटी/चौकट पर मस्तक रखकर नींद न लें।
- ह्रदय पर हाथ रखकर, छत के पाट या बीम के नीचें और पांव पर पांव चढ़ाकर निद्रा न लें।
- सूर्यास्त के पहले सोना नहीं चाहिए।
- पांव की और शय्या ऊँची हो तो अशुभ है। केवल चिकित्स उपचार हेतु छूट हैं।
- शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है।
- सोते-सोते पढ़ना नहीं चाहिए।
- ललाट पर तिलक रखकर सोना अशुभ है।
- सोते-सोते तंम्बाकू चबाना नहीं।
- शय्या पर बैठकर सरोता से सुपारी के टुकड़े करना अशुभ हैं।
वैज्ञानिक आधार
- पूर्व (E) दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।
-दक्षिण (S) में मस्तक रखकर सोने से धनलाभ व आरोग्य लाभ होता है ।
-पश्चिम (W) में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती है ।
-उत्तर (N) में मस्तक रखकर सोने से मृत्यु और हानि होती है ।