सतना

नवगीत सम्राट नाम से मशहूर प्रोफेसर का दिल का दौरा पड़ने से निधन, यहां पढ़िए डॉ. निगम की काव्य रचानाएं

शासकीय महाविद्यालय सतना में समाजशास्त्र विषय के थे डॉ. हरीश निगम प्राध्यापक, निधन से जिलेभर में शोक की लहर, 10 साल से अध्यापन के साथ-साथ गोपनीय विभाग, परीक्षा नियंत्रक की निभा रहे थे जिम्मेदारी

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Jul 28, 2018
Sociologist dr. harish nigam passes away in satna

सतना। मध्यप्रदेश सहित देशभर में नवगीत सम्राट नाम से मशहूर प्रोफेसर डॉ. हरीश निगम का दिल का दौरा पडऩे से शनिवार की सुबह निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद चाहने वालों और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है। डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामबहोरी त्रिपाठी ने बताया कि डॉ. निगम के निधन से सतना जिले को एक बड़ी छति पहुंची है। कहा, आज हम लोगों ने एक बड़ा समाजशास्त्री खो दिया। जिसकी भरपाई अब कभी नहीं हो सकती है।

उनके विचार और अध्यापन शैली हम लोगों के बीच जीवन भर जिंदा रहेगी। डॉ. निगम प्राध्यापक के साथ-साथ करीब 10 वर्षों से गोपनीय प्रभारी और परीक्षा नियंत्रक भी थे। इनका तजुर्वा गजब का था। आपके पढ़ाए हुए कई छात्र आईएएस और आईपीएस बनकर देश की सेवा कर रहे है। साथी प्राध्यापकों ने शासकीय महाविद्यालय परिसर में डॉ. निगम के निधन के बाद शोक सभा व्यक्त की है।

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मैहर में हुआ था जन्म
बता दें कि, 31 जुलाई सन् 1955 को मैहर नगर में डॉ. निगम का जन्म एक साधारण से परिवार में हुआ था। उन्होंने रसायन शास्त्र से एमएससी, समाजशास्त्र से एमए और पीएचडी की थी। इसके बाद 80 से 90 दशक के बीच प्रोफेसर बन गए। डॉ. निगम ने अध्यापन के साथ-साथ एक सैकड़ा कविताएं और कई पुस्तक भी लिख चुके है। वे डिग्री कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष भी थे। उनकी धर्म पत्नी भी शासकीय कॉलेज में प्रोफसर है। आपका पूरा परिवार पढ़ा लिखा हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी सरकारी सेवक है।

नवगीत-संग्रह
होंठ नीले धूप में / हरीश निगम
अक्षर भर छाँव / हरीश निगम
बालगीत-संग्रह
टिंकू बंदर / हरीश निगम
नवगीत
दुख नदी भर / हरीश निगम
बादल लिखना / हरीश निगम
बिखरे हैं पर / हरीश निगम
फुनगियों तक बेल / हरीश निगम
मँझधार में रहे / हरीश निगम
धूप की मिठाई / हरीश निगम
इस नगर से / हरीश निगम
ऊँघता बैठा शहर / हरीश निगम
कहाँ जाएँ / हरीश निगम
चाँदनी सिसकी / हरीश निगम
ज़िंदगी की बात / हरीश निगम
पनघटों पर धूल / हरीश निगम
शेष हैं परछाइयाँ / हरीश निगम
फागुन में / हरीश निगम
फुलझड़ियाँ लिख देतीं / हरीश निगम
बालगीत
पंख दिला दो ना / हरीश निगम
भइया बस्‍ते जी / हरीश निगम
तितली और भौंरा / हरीश निगम
जाड़े की हवा / हरीश निगम
बाल कविताएँ
मामी कहाँ हमारी / हरीश निगम
हवा का गीत / हरीश निगम
दिन इमली से / हरीश निगम

हरीश निगम की बाल कविताएँ
तितली और भौंरा
तितली रानी,
बड़ी सयानी,
बोली-भौंरे सुन!

ओ अज्ञानी,
पड़ी पुरानी,
तेरी ये गुनगुन!

कालू राजा,
खा के खाजा,
छेड़ नई-सी धुन!

भइया बस्‍ते जी
थोड़ा अपना वजन घटाओ
भइया बस्‍ते जी।
हम बच्‍चों का साथ निभाओ
भइया बस्‍ते जी।

गुब्‍बारे से फूल रहे तुम
भरी हाथी से,
कुछ ही दिन में नहीं लगोगे
मेरे साथी से।
फिर क्‍यों ऐसा रोग लगाओ
भइया बस्‍ते जी।

कमर हमारी टूट रही है
कांधे दुखते हैं,
तुमको लेकर चलते हैं कम
ज्‍यादा रूकते हैं।
कुछ तो हम पर दया दिखाओ
भइया बस्‍ते जी।

डॉ. हरीश निगम
जन्‍म- 31 जुलाई 1955 (मैहर, सतना, म0प्र0)
शिक्षा- एम0एस-सी0 (रसायन शास्‍त्र), एम0ए0 (समाजशास्‍त्र), पी-एच0डी0
प्रकाशन- नवगीत संग्रह- 1. होंठ नीले धूप में

2. अक्षर भर छाँव
कहानी संग्रह- 1. हरापन नहीं लौटेगा
बालगीत संग्रह-1. टिंकू बंदर
बालकथा संग्रह-1. मिक्‍कू जी की लंबी दुम
इसके अतिरिक्‍त अनेक सहयोगी संकलनों तथा देश की प्रतिष्‍ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
विशेष- 1. आकाशवाणी के विभिन्‍न केंद्रों से नवगीतों, नाटकों एवं अन्‍य विविध रचनाओं का प्रसारण।

2. कहानियों पर टेलीफिल्‍म का निर्माण
3. एन0सी0ई0आर0टी0 द्वारा प्रकाशित पाठ्‌य पुस्‍तकों में रचनाएँ सम्‍मिलित
संप्रति- प्राध्‍यापक एवं अध्‍यक्ष (समाजशास्‍त्र-विभाग)
शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय, सतना (म0प्र0)
संपर्क- बसेरा, प्रेम विहार कॉलोनी, प्रेमनगर, पोस्‍ट बॉक्‍स-96
सतना-485001(म0प्र0)

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Published on:
28 Jul 2018 05:23 pm
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