सरकारी अस्पतालों की स्थिति दयनीय: जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चिकित्सकों की कमी के कारण चरमराई हुई है।
विक्रांत दुबे सतना। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चिकित्सकों की कमी के कारण चरमराई हुई है। हालत यह है कि महज 90 डॉक्टरों के कंधे पर करीब 30 लाख लोगों के इलाज का जिम्मा है। एक डॉक्टर के भरोसे 33334 मरीजों के इलाज का बोझ है। जबकि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार करीब 600 रोगी पर एक डॉक्टर होना चाहिए।
जिलेभर में डॉक्टरों के 232 से अधिक पद स्वीकृत हैं, लेकिन 142 पद रिक्त हैं। यानी पचास फीसदी से अधिक चिकित्सकों के पद खाली पड़े हुए हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा मुसीबत ग्रामीण अंचल के मरीजों को झेलनी पड़ती है। बताया गया, जिले के 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक विहीन हैं।
जांच मशीनें बंद
इन स्वास्थ्य केंद्रों को वार्ड ब्यॉय और स्टाफ नर्स के भरोसे चलाया जा रहा है। इनमें वर्षों से डॉक्टरों की पदस्थापना नहीं की गई है। स्टाफ की कमी के चलते संचालनालय से भेजी गई जांच मशीनें सहित अन्य उपकरण बंद पड़े हुए हैं। उनका लाभ रोगियों को नहीं मिल पा रहा है।
दम तोड़ रही यूनानी होम्योपैथी विधा
मर्ज को दूर करने में अचूक इलाज की विधा यूनानी और होम्योपैथी भी दम तोड़ती नजर आ रही है। यूनानी के जिले में दो उपचार केंद्र हैं, लेकिन एक में सालों से चिकित्सक नहीं हैं। होम्योपैथी के आठ औषधालय हैं। इनमें से 5 केंद्र स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के भरोसे चलाए जा रहे हैं।
कार्यकर्ताओं के भरोसे औषधालय
आयुर्वेद चिकित्सा से जोडऩे के लिए अभियान चलाया जा रहा है। कुपोषण मिटाने और जननी की सुरक्षा के लिए आयुष का सहारा लिया जा रहा है। लेकिन आलम यह है कि जिले के 66 में से आधा सैकड़ा औषधालय कम्पाउंडर और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के भरोसे संचालित किए जा रहे हैं। इससे तमाम अभियानों के क्रियान्वयन का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
जबलपुर, नागपुर जाना मजबूरी
जिले में चिकित्सकों की कमी होने के कारण पीडि़तों को इलाज नहीं मिल पा रहा। लोगों को मजबूरी में इलाज के लिए जबलपुर, नागपुर सहित बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, डॉक्टरों की कमी उनका मर्ज बढ़ा रही है। स्वास्थ्य महकमा चिकित्सकों की पदस्थापना के लिए महज प्रस्ताव भेजने तक सीमित रह गया है। आलम यह है कि दोनों शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में वर्षों से चिकित्सक नहीं हैं। पीडि़तों को हो रही परेशानी के बाद भी जिले के जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए हैं।
सीएचसी में भी चिकित्सकों का टोटा
जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञों सहित 35 पद रिक्त हैं। सीएचसी अमरपाटन को छोड़कर सभी केंद्रों में भी विशेषज्ञ सहित चिकित्सक नहीं हैं। लोग मजबूरी में नीम-हकीमों के पास जा रहे हैं या फिर निजी चिकित्सा संस्थानों के चक्कर काट रहे हैं।
600 पर हो एक डॉक्टर
वल्र्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार 600 की जनसंख्या में एक चिकित्सक होना चाहिए। जबकि जिले में स्थिति इसके ठीक विपरीत है। यहां करीब 33334 मरीज पर एक डॉक्टर की उपलब्धता है।
स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की पदस्थापना के लिए पत्र लिखा गया है। ग्रामीणों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा मिले, इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. डीएन गौतम, सीएमएचओ
जिले में अस्पताल की हकीकत
जिला चिकित्सालय 01
सिविल अस्पताल 01
सीएचसी 10
पीएचसी 44
आयुर्वेद औषधालय 66
यूनानी स्वास्थ्य केंद्र 02
होम्योपैथी स्वास्थ्य केंद्र 08
निजी अस्पताल 02 (सौ बेड)
नर्सिंग होम 45
पैथोलॉजी 27
जिले की जनसंख्या 30 लाख