मध्यप्रदेश के 51 जिलों के लिए निकली एकात्म यात्रा सोमवार को सीधी से चलकर सतना जिले में जिगना में प्रवेश की।
सतना। मध्यप्रदेश के 51 जिलों के लिए निकली एकात्म यात्रा सोमवार को सीधी से चलकर सतना जिले में जिगना में प्रवेश की। जहां नागरिकों ने ढोल-नगाड़े, पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ स्वागत किया। सतना पड़ाव के दौरान मंगलवार के दिन निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर एवं गोसंवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानन्द द्वारा दलित के घर का भोज चर्चा का विषय रहा।
बताया गया कि भोजन का इंतजाम वार्ड क्रमांक-1 स्थित अमौधा मोहल्ला निवासी संजय चौधरी और उनकी पत्नी संगीता चौधरी ने यात्रा में शामिल संतों के लिए भोजन बनाया। भोजन में खीर, चने की भाजी, चावल, दाल, हाथ की रोटी, देशी आचार आदि एकात्म यात्रा में चल रहे 8 संतों ने ग्रहण किया है।
51 स्थानों पर होगा स्वागत
सोमवार को दोपहर 12 बजे से शा व्यंकट क्रमांक-2 में जनसंवाद का कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमे जिले के जनप्रतिनिधियों समेत आला-अधिकारी मौजूद रहे। जिले में यात्रा का अंतिम पड़ाव 27 दिसम्बर को चित्रकूट में होगा। इसके बाद आगे की यात्रा आरंभ होगी। एकात्म यात्रा का जिले में 51 स्थानों पर स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मंगलवार को रमपुरवा, इचौल, उचेहरा, पिपरीकला, गुलुवा, लगरगंवा, तिघरा, सतना, बाबूपुर, कोटर, तिहाई, डोमहाई, बिरसिंहपुर, पगरकला, पिपरीटोला, गुझवा, चितहरा, मझगंवा, पिण्डरा और चित्रकूट में यात्रा का स्वागत, चरण पादुका पूजन होगा।
अमरपाटन में हुआ चरण पादका पूजन
यात्रा दल रामनगर के जिगना में शंकराचार्य की चरण पादुका पूजन के बाद सगौनी, हटवा, नारायणपुर, गोविन्दपुर, कर्रा, गणेशनगर, गिधैला, देवराजनगर, रामनगर, गैलहरी होते हुए गोरसरी पहुंचा। इसके बाद यात्रा अमरपाटनकिरहाई बंधा पहुंची। वहां जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, नागरिकों एवं ग्रामीणजनों ने पुष्पवर्षा और कलश से स्वागत किया। अमरपाटन नपं की सीमा में प्रवेश करने पर यात्रा का स्वागत किया गया। अमरपाटन के राजा पैलेश में चरण पादका पूजन और प्रबोधन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
550 क्विंटल धातु-पत्र एकत्रित
आदि शंकराचार्य की एकात्म यात्रा रीवा के पचमठा से शुरू होकर सिंगरौली और सीधी में छठवें दिन पूरी हो गई। सोमवार को यात्रा सतना जिले में प्रवेश कर गई। जिले में एकात्म यात्रा पूरी होने के बाद यात्रा के दौरान एकत्रित धातु-पत्रों और मिट्टी को ओंकारेश्वर के लिए भेज दिया गया। यात्रा के दौरान 1100 कलश यानी 550 क्विंटल धातु-पत्र एकत्रित हुआ। जिसे आदिशंकराचार्य की मूर्ति स्थापना के लिए ओंमकारेश्वर भेज दिया गया।