सूचना के बोझ तले घुट रहा दम
सतना. सूचना क्रांति का दौर है। अब हर व्यक्ति हर वक्त दुनिया से जुड़ चुका है। कुछ हमारे काम की और कुछ हमारे सामाजिक जीवन को भी जरूरत है इसलिए भी हम लगातार नेटवर्क में रहते हैं । थोड़ा कुछ शौक भी है जो हमें लगातार सोशल नेटवर्किंग साइट से जोड़े रखता है, लेकिन इससे कई नुकसान भी हैं। एक्सपर्ट डॉ. दिवाकर सिंह सिकरवार का कहना है कि नुकसान से बचने के लिए कभी कभी नेटवर्क से बाहर रहकर लोगों को खुद के करीब जाकर भी जा कर देखना चाहिए । एक अनुमान के मुताबिक रोज व्हाट्सएप पर 55 खरब से अधिक टेक्स्ट मैसेज और 4.5 खरब फ ोटो शेयर किए जाते हैं। हमारा शहर और यहां के लोग भी पीछे नहीं है। लोग इस कदर सोशल नेटवक से जुडें है कि सूचना के बोझ तले उनका दम घुट है और उन्हें मालूम भी नहीं होता। शहर के लोगों में स्क्रीन की वजह से होने वाली थकावट, किसी भी चीज को समझने में अस्पष्टता, सूचना की जरूरत से ज्यादा बोझ और व्यवहार के स्वरूप में बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाली पीढ़ी के समग्र सुख पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। इस लिए अब वक्त आ गया है कि लोग एक दिन के लिए वर्चुअल वल्र्ड से ब्रेक लें वरना बहुत देर हो जाएगी। ये इतना आसान नहीं है ,लेकिन मुश्किल भी नहीं है।
कोई मुश्किल नहीं है
एक्सपर्ट डॉ. संगीता जैन का कहना है कि जब लोग एयर ट्रैवल करते हैं तो उस दौरान नेटवर्क बंद रखा जाता है। उस वक्त में वहां ध्यान आकर्षित करने वाला कोई पुश नोटिफि केशन य नया मैसेज बिल्कुल नहीं होता है । तब लोग पूरी तरह से अपने पास होते हैं और दुनिया खत्म नहीं होती है। इसी तरह लोगों को सोचना चाहिए कि जब एयर ट्रैवेल के दौरान खुद को वचुर्अल वल्र्ड से रोका जा सकता है तो फिर उसके बाद लोग क्यों नहीं एेसा कर सकते।
दिमाग को करें व्यवस्थित
एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ महीनों में अपनी अलमारी या किताबों की शेल्फ को दोबारा सलीके से लगाते हैं। ठीक वैसे ही उन सभी विचारों को दोबारा व्यवस्थित करने और एक कागज पर लिखने की कोशिश करें जो आपके सिर में अव्यवस्थित रूप से टंगे हुए हैं । जैसे ही आप इन सभी अव्यवस्थित विचारों को कागजी रूप देंगे वैसे ही यह संभावना पैदा हो जाएगी कि आपका दिमाग आपके बेहतर नियंत्रण में आ जाएगा और आपका मन अपनेआप वचुर्अल वल्र्ड से दूर हो जाएगा। स्क्रीन से रहें दूर आज बड़े ही नहीं बच्चों की भी आंखे स्क्रीन की वजह से खराब हो रही है। यह जरूरी है कि हम अपनी जिंदगी में स्क्रीन टाइम का अनुशासन पैदा करें। सुबह जागने के लिए अपनी पुरानी अलार्म घड़ी को वापस लाइए और रात को अपने फ ोन को एक अलग कमरे में रखिए । यही नहीं बच्चों को भी इससे दूर रखिए।
डिजिटल उपवास भी रखिए
अगर हम अपनी धार्मिक आस्थाओं की वजह से उपवास रख सकते हैं तो ठीक उसी तरह यह भी जरूरी है कि हम अपनी जिंदगी को सामान हालत में लाने के लिए एक महीने में एक दिन या एक महीने में कुछ दिन डिजिटल माध्यमों के लिए व्रत रखें।