राजधानी जैसी वारदात से सतना भी नहीं अछूता, नागरिक भी नहीं निभाते अपनी जिम्मेदारी
सतना। प्रदेश की राजधानी भोपाल में नौकर ने बुजुर्ग दंपती की हत्या कर सनसनी फैला दी। इस वारदात के बाद सतना की हकीकत जांची तो कड़वी सच्चाई सामने आई। पुलिस के पास किराएदार और नौकरों का हिसाब ही नहीं है। जबकि सतना भी एेसी वारदात की आशंका से अछूता नहीं है। राजधानी की तर्ज पर सतना शहर में भी इस तरह की वारदात हो चुकी है। लेकिन, इसके बाद भी खाकी सबक लेने को तैयार नहीं है। देखने में यह आ रहा कि नागरिक तो लापरवाह हैं ही, पुलिस भी बेपरवाह बनी है।
अगर पुलिस इस ओर संजीदा हो जाए तो नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझेंगे और भविष्य में एेसी घटनाओं से बचाव हो सकेगा। नागरिकों की जिम्मेदारी भी बनती है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहें और नियमों का पालन करते हुए सुरक्षा व्यवस्था बनाने में सहयोगी साबित हों।
जारी किए जाते हैं आदेश
बिना पुलिस सत्यापन कराए या व्यक्तिगत जानकारी रखे बिना कोई घरेलू नौकर, ड्राइवर, चौकीदार, निजी कर्मचारी, सेल्समैन आदि नहीं रखे जाएं। इस संबंध में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस विभाग के सक्षम अधिकारों द्वारा लोक शांति एवं लोक व्यवस्था की सुरक्षा हेतु धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अंतर्गत पाबंदी आदेश जारी किए जाते हैं।
अपराध पर लगेगा अंकुश
नौकरों, किराएदारों और बाहर से आकर बिना किसी सूचना के शहर में बसने वालों का सत्यापन करने से अपराध पर अंकुश लग सकेगा। साथ ही घर-घर सत्यापन करने से पुलिस और जनता के बीच बनी दूरी को भी कम किया जा सकता है। इसके लिए शीर्ष स्तर पर अगर पुलिस अधिकारी पहल करें तो इस काम में आसानी होगी।
सतना में हो चुका अमृता नय्यर हत्याकांड
अमृता नय्यर (62) कोलगवां थाना अंतर्गत भरहुत नगर बैंक कॉलोनी में अपने पुत्र गौरव उर्फ गोगा के साथ भारत तिवारी के मकान में किराए से रहती थीं। 30 अक्टूबर 2012 को गौरव अपने काम से कटनी जाने के लिए सुबह करीब 10 बजे निकले। रात 11 बजे जब वापस लौटे तो उनकी मां की हत्या हो चुकी थी। घर में रखी नकदी व जेवर भी चोरी हुए थे। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद इस वारदात में अमृता के पुराने नौकर रोहित बारी का हाथ होना पाया। उसे गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है।
एसपी ने चलाया था अभियान
सतना जिले के तत्कालीन एसपी कमल सिंह राठौर और फिर इरशाद वली ने नौकरों का सत्यापन करने का अभियान चलाया था। इसके तहत थाना के बीट प्रभारियों को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह अपने इलाके में एेसे सभी व्यक्तियों का सत्यापन करें जो बाहर से आकर सतना में काम कर रहे हैं या किसी के घर में नौकरी करते हैं। इस संबंध में शासन स्तर पर भी चेकिंग के आदेश हैं।
बाजार में मिलेगा फार्म
नौकरों का सत्यापन करने में पुलिस कितनी संजीदा है, यह जानने के लिए पत्रिका ने अपने प्रतिनिधि को थाने भेजा। थाने पहुंचे प्रतिनिधि ने जब थाना पुलिस से नौकर का सत्यापन कराने के लिए जानकारी ली तो थाना सिविल लाइन में मौजूद स्टाफ ने कहा कि बाजार से फार्म लेकर उसमें डिटेल भरकर जमा कर दें। जब बीट प्रभारी जाएगा तो सत्यापन करा लिया जाएगा। यही हाल कोतवाली और थाना कोलगवां का रहा। लेकिन पुलिस ने इसकी मियाद नहीं बताई कि सत्यापन कितने दिनों में हो जाएगा। सत्यापन के लिए पहले पुलिस फॉर्मेट खुद देती थी, लेकिन अब जब इस काम के लिए कोई संजीदा नहीं तो फार्म बाजार से लेने को कह दिया जाता है।
एक्सपर्ट कमेंट्स
परस्पर समन्वय जरूरी
पब्लिक को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए नौकर और किराएदारों का सत्यापन कराना चाहिए। थाना पुलिस के व्यवहार से जनता कदम पीछे हटा लेती है। पुलिस को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। परस्पर समन्वय से सत्यापन प्रक्रिया सरल हो सकती है।
रमेश मिश्रा, लोक अभियोजक
बीट सिस्टम प्रभावी बनाएं
पुलिस का बीट सिस्टम कमजोर है। इसे प्रभावी बनाने की जरूरत है। बीट स्टाफ को चाहिए कि अपने क्षेत्र में लोगों से संपर्क बनाकर रखे। ताकि नए किराएदार या नौकरों का ब्योरा जुटाया जा सके। अपराधी प्रवृत्ति के लोग साधारण घरों में या गरीब तबके के बीच रहते हैं। इन जगहों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
प्रकाश सिंह, रिटायर्ड डीएसपी
कलेक्टर साहब से बात कर इस संबंध में आदेश जारी करेंगे। थाना पुलिस को भी निर्देश दे रहे हैं कि वह नौकर और किराएदारों के सत्यापन में गंभीरता बरतें।
गुरुकरन सिंह, एडिशनल एसपी