सतना

सिरगो पहाड़ पर देखने के बाद आंखों से ओझल हुआ बाघ, ये है बाघ के मूमेंट की पूरी कहानी

वन विभाग की टीम लौटी, पपरा और नरो पहाड़ जाने का अनुमान
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Jan 06, 2018
tiger panic jamtal village in satna
tiger panic jamtal village in satna

सतना। अमरपाटन रेंज के जमताल से सिरगो पहाड़ तक दो दिन दहशत फैलाने वाला बाघ अचानक ओझल हो गया है। बाघ ने सिरगो पहाड़ से किस दिशा का रुख किया, इसका अनुमान वन विभाग के अधिकारी भी नहीं लगा पा रहे। फिर भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि बाघ सिरगो से दक्षिण पर मौजूद पपरा पहाड़ी या फिर नरो पहाड़ चला गया होगा।

बताया गया कि गुरुवार अलसुबह जमताल से ढाई किमी का फासला पार कर सिरगो पहाड़ पहुंचा बाघ दिनभर वहीं जमा रहा फिर रात होते ही कहीं चला गया।

वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात सिरगो पहाड़ पर मौजूद सिद्ध बाबा मंदिर के पास बाघ की लोकेशन मिली थी। यहां मंदिर में मौजूद व्यक्ति ने बाघ को देखने का दावा वन विभाग के अधिकारियों से किया है। जमताल से सिरगो पहाड़ के नीचे तक करीब सवा सौ पगमार्क मिलने के बाद अधिकारी ग्रामीण के दावे को सच मान रहे हैं। बताया जाता है कि शुक्रवार को दिनभर सिरगो पहाड़ में सर्चिंग के दौरान एक बार भी बाघ नजर नहीं आया। कोई पगमार्क व बाघ के शिकार का निशान भी हाथ नहीं लगा।

50 घंटे जमी रहीं तीन टीमें, फिर भी नहीं दिखे वनराज
वन विभाग को जमताल गांव में बाघ होने की सूचना बुधवार को शाम ५ बजे मिली थी। इसके बाद मैहर, अमरपाटन व मुकुंदपुर रेंज की तीन टीमें मौके पर भेजी गई थीं। एसडीओ व तीन रेंजरों की अगुवाई वाली टीमें बुधवार शाम से शुक्रवार रात 9 बजे तक मौके पर डटी रहीं। करीब 50 घंटे की सर्चिंग के दौरान एक बार भी किसी टीम को बाघ की पूछ तक नजर नहीं आई।

सर्चिंग पूरी तरह बंद नहीं हुई

बाघ देखे जाने के सभी दावे आधा दर्जन ग्रामीणों ने किए। जमातल में पगमार्क मिलने से वन विभाग यही संभावना जताता रहा कि यहां आने वाला बाघ संजय नेशनल पार्क सीधी से टेरिटरी की तलाश में भटक रहा है। डीएफओ राजीव मिश्रा ने बताया कि बाघ की सर्चिंग पूरी तरह बंद नहीं हुई है।

बाघों के लिए मुफीद हैं जिले के जंगल
जिले में यह पहला मौका नहीं जब दूसरे जिलों से चहलकदमी करते हुए यहां बाघ आए हों। जानकारों के अनुसार बीते पांच सालों में एेसे आधा दर्जन मामले सामने आए हैं जब बाहर के बाघ जिले के जंगलों में विचरण करते पाए गए। इनके अनुसार जिले के जंगल बाघों के लिए मुफीद हैं। अनुकूल मौसम व शिकार की प्रचुरता से बाघ यहां चले आते हैं। साल 2014 में पन्ना टाइगर रिजर्व से निकला बाघ पी-215 अमरपाटन रेंज के उसी जगह से गुजरा था, जहां इस समय बाघ होने की संभावना जताई जा रही है।

वन्य जीवों का एक कॉरिडोर
जिले के जंगल यूपी का रानीपुर अभ्यारण्य, पन्ना टाइगर रिजर्व, संजय राष्ट्रीय उद्यान व बांधवगढ़ नेशनल पार्क की इंटर कनेक्टिविटी के लिए वन्य जीवों का एक कॉरिडोर रहे होंगे। इसी के चलते अक्सर यहां बाघ चले आते हैं। बीते साल चितहरा के जंगल में घूम रहा नर बाघ ट्रेन की टक्कर से मारा गया था। वह बाघ रानीपुर अभ्यारण्य का बताया गया था। इसी तरह पूर्व में पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघों को भी जिले के जंगल भाते रहे हैं। जिले में वर्तमान में एक बाघिन व दो शावक मझगवां के जंगल में मौजूद हैं।

Published on:
06 Jan 2018 06:25 pm