सतना

यहां दो साल बाद बढ़ेगा बाघों का कुनबा

मुकुंदपुर टाइगर सफारी में बाघों का कुनबा बढऩे पर विशेषज्ञों ने राखी राय, बाहर से आई टीम ने लिया जायजा।

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Oct 12, 2017
white tiger Mukundpur in Satna district

सतना। दुनिया की पहली ओपन व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर में बाघ शावकों की अठखेलियां देखने के लिए पर्यटकों को लम्बा इंतजार करना पड़ सकता है। सफारी के माहौल में एक साल से ज्यादा का वक्त गुजारने के बावजूद सफेद व पीला बाघ मादा से मिलन के लिए तैयार नहीं है। सफारी में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए जू प्रबंधन विशेषज्ञों की राय के अनुसार ही आगे बढ़ेगा।

बुधवार को जू में सफेद व पीले बाघों के व्यवहार व स्वास्थ्य का परीक्षण 7 सदस्यीय दल ने किया। दल में शामिल ग्वालियर जू के वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभिषेक सिंह, जबलपुर के सीनियर विटनरी चिकित्सक डॉ. एबी श्रीवास्तव व ग्वालियर जू के विटनरी चिकित्सक डॉ. उपेंद्र यादव ने जू प्रबंधन को सलाह दी कि रणनीति के तहत ही बाघों की ब्रीडिंग संभव है, ताकि खतरा उठाए बिना बिग कैट का कुनबा बढ़ाया जा सके। बाड़ों के निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने सफेद व पीले बाघों के व्यवहार का अध्ययन किया। इसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि यहां नए मेहमान आने में डेढ़ से दो साल का वक्त भी लग सकता है। विशेषज्ञों ने एक कार्यशाला में कीपर स्टॉफ को बाघों की देखभाल से संबंधित जानकारियां दी।

जू में बनाया जाएगा फ्रैंडली वातावरण
जू में मौजूद सफेद व पीले बाघ-बाघिन के बीच मेलजोल बढ़ाने के लिए फ्रैंडली वातावरण तैयार किया जाएगा। जू कीपरों को बताया गया कि अधिकारियों की मौजूदगी में समय-समय पर बाघों के बाड़ों की अदला-बदली होती रहे। इस काम की मॉनिटरिंग कैमरे के जरिए होगी।

तैयार होगा मेडिकल डाटाबेस
मुकुंदपुर जू संचालक एसीएफ संजय रायखेड़े ने बताया, विशेषज्ञों ने यहां मौजूद एक सफेद बाघिन, एक सफेद बाघ व एक पीले बाघ-बाघिन का मेडिकल डाटाबेस बनाने की राय दी है। इसके अनुसार बाघों की पूरी हिस्ट्री खंगालनी पड़ेगी। मसलन वे कहां पैदा हुए और उनके माता-पिता की मौत कैसे हुई, इन सब बातों से बाघों का व्यवहार समझने में मदद मिलेगी। बाघों के ब्लड सेम्पल लेकर पूरी हिस्ट्री तैयार की जाएगी।

Published on:
12 Oct 2017 12:45 pm
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