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जब आपका डॉक्टर 3 किलोमीटर में है तो 5 किलोमीटर दूर झोलाछाप के पास इलाज कराने लोग क्यों जा रहे?

कुपोषण पर कलेक्टर के तल्ख सवालों के आगे अधिकारियों के होंठ सिल गए। कहा, आपका मैदानी अमला काम नहीं कर रहा है इसलिए लोग 3 किमी दूर बैठे सीएचओ के पास न जाकर झोलाछाप के पास जा रहे।

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सतना। मझगवां विकासखंड के ग्राम सुरांगी में कुपोषण से बालिका सुप्रांशी की मौत के बाद आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति प्रमुख मुद्दा रही। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने व्यवस्थागत खामियों पर तीखे सवाल उठाए, जिनका संतोषजनक जवाब अधिकारियों के पास नहीं था। उन्होंने कुपोषण से निपटने और स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार के लिए तत्काल प्रभाव से एसओपी तैयार कर उसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए।

जवाब देते नहीं बना

कलेक्टर ने पूछा कि जब आपका कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) बस्ती से 3 किलोमीटर दूर है, तो ग्रामीण 5 किलोमीटर दूर झोलाछाप चिकित्सक के पास क्यों जा रहे हैं। इस सवाल का जवाब देते अधिकारियों से नहीं बना और चुप्पी साधे बैठे रहे।कलेक्टर ने इसे मैदानी स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता बताया। बैठक में सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला और जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास राजीव सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

अभियान चलाकर दर्ज कराएं एफआईआर

झोलाछाप चिकित्सकों पर सख्ती के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि सभी आशा और एएनएम अपने क्षेत्रों में ऐसे लोगों की सूची तैयार करें। यह सूची जिले के अधिकारी चेक करें। जो योग्य हैं लेकिन लाइसेंस नहीं है, उन्हें वैधानिक प्रक्रिया में लाया जाए, जबकि अवैध रूप से इलाज कर रहे झोलाछाप लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर बीएमओ, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम कार्रवाई करें। क्लिनिक सील करें और एफआईआर दर्ज कराएं।

तो बच सकती थी बच्ची की जान

कुपोषित बालिका सुप्रांशी की मौत पर बीएमओ ने माना कि यदि 15 दिन पहले सही इलाज मिलता तो उसे बचाया जा सकता था। इस पर कलेक्टर ने कहा कि झोलाछाप चिकित्सक स्थिति बिगाड़ रहे हैं, इसलिए इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। साथ ही मैदानी अमले को संवेदनशील बनाकर जिम्मेदारियों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि शिशु और मातृ मृत्यु दर कम हो सके।

कुपोषित बच्चों की सूची का होगा वाचन

कलेक्टर ने कुपोषण शिविरों में अनुपस्थित बच्चों का 'वाचन' करने के निर्देश दिए। अनुपस्थित प्रत्येक बच्चे की स्थिति पूछी जाएगी और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य अमला घर जाकर जांच करेगा। आरबीएसके टीम को 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की जांच पर फोकस करने को कहा गया। जहां एएनएम नहीं है, वहां सीएचओ द्वारा टीकाकरण सुनिश्चित करने और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

एनआरसी के खाली बेड पर नोटिस

पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में खाली बेड मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। जिले में औसत 83 प्रतिशत बेड भरे पाए गए। मझगवां में 82 और कोठी में 70 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी मिलने पर यहां के सीडीपीओ, बीपीएम और बीसीएम को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी को एनआरसी का नोडल अधिकारी नियुक्त करने निर्देशित किया। 79 प्रतिशत होम केयर पाए जाने पर भी उन्होंने अप्रसन्नता जताई।

नागौद सीडीपीओ को नोटिस

बैठक में दानदाताओं की मदद लेने के सुझाव पर कलेक्टर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टेक होम राशन (टीएचआर) के 8-10 लाख रुपए के बिल बिना जांच के स्वीकृत किए जाते हैं। यदि इनकी जांच कराई जाए तो दानदाताओं की जरूरत नहीं पड़ेगी और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। इस दौरान यह तक कह दिया की ऐसी जांच होगी कि जिंदगी नर्क बन जाएगी। इसके बाद नागौद सीडीपीओ को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।