लोकलुभावना बजट पेश: वित्तमंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को लोकसभा में बजट पेश किया।
सतना। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को लोकसभा में बजट पेश किया। उन्होंने बजट में युवा, बुजुर्ग, गरीब, व्यापारी, उद्यमी व किसान सब पर ध्यान दिया। लेकिन, पूरे बजट में किसानों को सबसे ज्यादा समय दिया। पौने दो घंटे के बजट में एक घंटा किसानों के नाम पर रहा।
लेकिन, पुराने अनुभव को ध्यान रखते हुए किसानों में उत्साह कम दिखा। महिलाओं के श्रृंगार पर महंगाई का बोझ बढ़ा है, तो आय सीमा के टैक्स स्लैब में वृद्धि न होने से नौकरी-पेशा लोगों को निराशा हाथ लगी है। वहीं सीमेंट सेक्टर की उम्मीदें भी टूटी हैं।
औसत बजट बता रहे औद्योगिक घराने
इंफ्रा स्ट्रक्चर को लेकर कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। कोल सेक्टर को लेकर भी कोई विशेष घोषणा नहीं की गई है। इसलिए विंध्य के औद्योगिक घराने बजट को औसत बता रहे हैं। वहीं बुजुर्ग उत्साहित बजट बता रहे हैं। कारण है कि वरिष्ठ नागरिकों को डिपॉजिट में राहत दी गई है, उनकी डिपॉजिट 10 हजार से बढ़कर 50 हजार (बिना टैक्स) हो गई है।
एक हाथ से दिया, दूसरे हाथ से छिना
सीए विराम जैन ने कहा कि, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वेतनभोगी क्लास को राहत देने के नाम पर 40,000 रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का ऐलान किया। दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा छीन ली है। अभी 15 हजार रुपए तक के मेडिकल बिल और 19,200 रुपए तक के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट की सुविधा थी। इस तरह एक हाथ दिया, तो दूसरे हाथ से छिन लिया। ये बजट चलाकी पूर्वकबनाया गया है। किसानों को भी तत्काल लाभ नहीं मिलने वाला, ये लॉगटर्म सिस्टम है। इसलिए बहुत प्रभावकारी बजट नहीं बताया जा सकता।
पेंशनभोगी को लाभ
स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी से पेंशनभोगी वर्ग को सीधा लाभ मिलने वाला है। पहले उन्हें ट्रांसपोर्ट अलाउंस (परिवहन भत्ता) और चिकित्सा पर विभिन्न खर्चों (मिसलेनियस मेडिकल एक्सपेंसेज) का रीइंबर्समेंट नहीं मिला करता था। लेकिन, नए फैसले के दायरे में पेंशनर्स भी आ चुके हैं, जिससे उनके टैक्सेबल इनकम में 40,000 रुपए की और कटौती हो जाएगी। यानी, अब उनका टैक्सेबल इनकम 40,000 रुपए कम हो जाएगा। जिसका सीधा लाभ टैक्स सेविंग्स के रूप में होगा।
स्वास्थ सुरक्षा पर जोर, अच्छा कदम
मेडिकल आफिसर डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव का मानना है कि, नेशनल हेल्थ प्रॉटेक्शन स्कीम की घोषणा की गई है। ये दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ केयर प्रोग्राम है। जिसका सीधा फायदा आम व्यक्ति को होने वाला है। अब गरीब परिवारों को हर साल 5 लाख रुपए तक के इलाज पर अपने पैसे खर्च नहीं करने होंगे। इससे गरीब व मध्यम दोनों वर्ग को लाभ मिलेगा। जहां स्वास्थ सुविधाएं बेहतर होंगी। वहीं इलाज सुविधा हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध रहेगा। पहले शासकीय अस्पताल के भरोसे गरीब रहता था। इससे निजी अस्पतालों में भी इलाज कराना आसान होगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीब परिवारों के बीमा के लिए सरकार ने महज 30 हजार करोड़ रुपए आवंटित कर रखे थे। अब राहत की उम्मीद है।
हिसाब-किताब से राहत
इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद पाले सैलरीड और मध्य वर्ग के लोगों को इस बजट से कुछ खास नहीं मिल पाया। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने सैलरीड क्लास के मौजूदा टैक्सेबल इनकम में से 40 हजार रुपए का स्टैंडर्ड डिक्शन कर दिया। यानी जितनी सैलरी पर टैक्स बनेगा, उसमें से 40 हजार घटाकर टैक्स देना होगा। वेतनभोगियों को स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा दो प्रकार से होगा। पहला इनकम टैक्स की देनदारी कम होगी और दूसरा उन्हें कागजी-कार्रवाई भी कम करनी होगी। 40,000 रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन के लिए खर्च या निवेश का कोई हिसाब-किताब नहीं मांगा जाएगा।